✒️टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़…. छत्तीसगढ़ में सन 2023 में विधानसभा चुनाव होने है। महज 1 साल 2022 ही बाकी है कि जिला भाजपा को बहुत मेहनत कर जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओ को इस मुकाम तक पंहुचाये की 5 कांग्रेसी विधायको को टक्कर दे सके। हार-जीत अलग है परन्तु इसके लिए मुकाबिल तोपो की खोज करना पड़ेगा। वर्तमान में जिला भाजपा की स्थिति को देखते हुए नही लगता कि कोई भी पदाधिकारी,कार्यकर्ता चुनाव लड़ने को लेकर उत्सुक हो या उत्साहित हो। प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जादू लोगो के सर चढ़कर बोल रहा है। जिसका उदाहरण बीते निकाय चुनावों के आये परिणामो के रूप में देखा जा सकता है एवं रही सही कसर आगामी पंचायत चुनाव में पूरी हो सकती है। टूटी कलम
स्व.रोशनलाल, .स्व.लख्खीराम, स्व.पी के तामस्कर, स्व.जयदयाल बेरीवाल,स्व.दिलीप सिंह जूदेव, पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, गिरधर गुप्ता आदि नेताओ ने तत्कालीन जनता पार्टी वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी का झंडा उस समय उठाया था जब पूरे देश मे कांग्रेस का परचम लहरा रहा था एवं लौह महिला स्व.इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री हुआ करती थी। इन रणबांकुरों ने धीरे धीरे कर प्रदेश में सत्ता के शिखर तक पहुंचाया। प्रदेश मे भाजपा ने लगातार 15 वर्षो तक शासन किया। इन 15 वर्षों में भाजपाइयों ने पार्टी की चिंता छोड़ जमकर धन कमाया। जिसके परिणाम विपरीत आने लगे। विधानसभा, निकाय,पंचायत चुनावों में भाजपा की जबरदस्त हार होने लगी। भाजपाई जन सरोकार छोड़ स्वयं के सरोकार एवं ओवर कॉन्फिडेंस में रह गए ।प्रदेश से खत्म हो चुकी कांग्रेस के लिए भूपेश बघेल हनुमान साबित हुए। जिन्होंने अकेले के दम पर कांग्रेस में संजीवनी फूंकने की खातिर पूरे प्रदेश में पदयात्रा कर गांधी की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए भाजपा को इतने जबरदस्त तरीके से पटखनी दी। जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। टूटी कलम
पिछली पीढ़ी की तरह पदाधिकारी बन चुके वर्तमान की पीढ़ी के लोग पार्टी हित से बढ़कर स्वयं का हित साधने एवं पार्टी को पीछे धकेलने के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य नही कर रहे है। सत्ता पक्ष में रहने के बावजूद अपनी ही पार्टी का विरोध नशा मुक्ति अभियान के बैनर तले करने वाले को पार्टी ने जिला अध्यक्ष का पद देकर यह साबित कर दिया कि पार्टी विरोधी कार्य करने पर उपकृत किया जा सकता है। टूटी कलम
सांसद के कार्यो को लेकर तीव्र रोष है आमजन में…जिले के नेशनल हाइवे टूटी फूटी सड़को को लेकर आमजनो में काफी रोष देखा जा रहा है। रायगढ से बिहार, झारखंड बॉर्डर तक कि सड़के मौत की सड़कें कही जाती है। बतलाया जाता है कि जिले से बाहर निकलने वाली चारो दिशाओ की सड़कें अत्यंत जर्जर हो रही है। जिन्हें बनवाने के लिए केंद्र सरकार से धन आबंटन किया जाता है परन्तु केन्द्र में भाजपा सरकार एवं जिले की सांसद भाजपा की होने के बावजूद केंद्र से आबंटन उपलब्ध न करवा पाने की वजह से सांसद भी बैकफुट पर आ रही है। जिसके परिणाम 2024 में होने वाले आम चुनाव में विपरीत आ सकते है। टूटी कलम






