रायगढ़—– शहर में तालाबंदी,सोशल डिस्टेंगसिंन, मास्क वितरण,सेनेटाइजर पर जोर,बार बार हांथो को साबुन से धोना, अपने घरों से बाहर न निकलना,बाजार सुबह 5 से 9 तक ही खुलवाना,दवाई,राशन,सब्जी,दूध आदि पूरे शहर में पेट्रोलिंग,चौक चौराहों पर ड्यूटी,रोगियों को अस्पताल पहुंचाना, गरीबो को निःशुल्क भोजन बांटना,दान दी गई लोगो की राहत सामग्रियों को भी बंटवाना,चौबीसों घँटे ड्यूटी बजाना,पसीना बहाना,सुनसान सड़को पर बैठे रहना क्या किसी प्रताड़ना,सजा से कम है ? तीस पर लोगो से तकरार,कचर,कचर,लाठी भांजना ये सारा काम पुलिस प्रशासन,यातायात पुलिस, होमगार्ड्स के जवान,csf के जवान कर रहे है.जिसमे निगम प्रशासन, जिला प्रशासन के अपर कलेक्टर, एस डी एम, डिप्टी कलेक्टरो,तहसीलदारो की भी भमिका है. वहीं अन्य विभागों के अधिकारी,कर्मचारी लाकडाउन का लुफ्त उठा रहे है. निगम के जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य है क्योंकि निगम में अभी लीपापोती हेतु धनराशि अप्राप्त होने की वजह से इनका दिल भी कामचोर हो चुका है.बिन धन आवक के मन भी नही लगता.महापौर ने सभी वार्डो के विकास के लिये 5 करोड़ ₹ का आबंटन हेतु मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था परन्तु सर मुड़ाते ही ओले पड़े । महापौर का पत्र गन्तव्यं तक पहुंचा नही की 21 दिनों का लाकडाउन हो गया.जिससे 5 करोड़ मांगे जाने का मामला महीनों आगे खिसक सकता है.अब बेचारे ये पार्षद करे तो क्या करे ? जिला प्रशासन को चाहिए कि इन पार्षदों को अपने अपने वार्डो की व्यवस्था सौप कर पुलिस बल के बोझ को कम कर दिया जाना चाहिए. पुलिस को मात्र कानून व्यवस्था सम्भालने के लिए छोड़ना चाहिए ताकि ये हर परिस्थितियों में फीट रहे.जब पुलिस भोजन,नाश्ता,दूध बांटेगी तो पार्षद घर पर बैठ कर कितना टी वी देखेंगे ? कितना कैरम,लूडो, शतरंज,हाउजी,ताश,खेलेंगे ?







