⭕️ टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ 15 साल के वनवास के बाद कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में धमाकेदार वापसी की थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री को लेकर यह कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस के कद्दावर एवं वरिष्ठ नेता अंबिकापुर के राजा टी एस सिंहदेव( बाबा) को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है परंतु कांग्रेस के जब सितारे गर्दिश में थे तब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पदयात्रा कर पूरे छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभाओ तक पहुंचे एवं कांग्रेस स्कोर कांग्रेस की डूबती नाव को तिनके का सहारा भी दिए। जिस वजह से भूपेश बघेल का नाम भी सूची में प्रथम पायदान पर ही था। इस बीच यह समाचार प्राप्त हुए की टी एस बाबा एवं भूपेश बघेल के बीच ढाई ढाई साल के फार्मूले पर रजामंदी हो गई है। टीएस बाबा एक राजा के अनुसार पहले के ढाई साल भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया। जिसे एक टी एस बाबा का मास्टर स्ट्रोक भी कहां जा सकता है। क्योंकि 15 साल के बाद मिली सत्ता के कारण प्रदेश का कोष खाली हो चुका था एवं कांग्रेस से चुनकर आए नए विधायकों को मंत्री पद भी दिया जाना था एवं साथी प्रदेश के विकास कार्य को भी गति दिया जाना था। जिसको लेकर बाबा ने समझा था कि भूपेश बघेल के अढ़ाई साल यही सब मैनेजमेंट करने में कट जाएंगे एवं बाद के ढाई साल में वे स्वयं मुख्यमंत्री बन कर इत्मीनान से राज्य का कार्य सुचारू रूप से कर सकेंगे। भूपेश बघेल पुनः आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उसमें सक्रिय हो जाएंगे परंतु पाशा उल्टा पड़ गया ढाई साल के भीतर भूपेश बघेल ने चाणक्य नीति का इस्तेमाल करते हुए प्रदेश के खाली पड़े खजाने को धन से लबालब कर दिया एवं धान खरीदी का समर्थन मूल्य बढ़ाकर गौ चंदन की भी खरीदी शुरू कर प्रदेश की ग्रामीण जनता के दिलों पर अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया। ढाई साल के बाद जब टी एस सी देव ने भूपेश बघेल से अपने राज्य करने का समय बतलाया तब भूपेश बघेल 56 विधायकों को लेकर दिल्ली जा पहुंचे एवं सोनिया एवं राहुल पर दबाव डाल दिए कि अगर वे मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तो साथ में आए सारे विधायक भी अपना त्यागपत्र दे देंगे। जिस वजह से कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने को कहा एवं टी एस बाबा को बहला-फुसलाकर दिल्ली से बैरंग वापस रायपुर भेज दिया गया. टूटी कलम
छत्तीसगढ़ डोल रहा है बाबा बाबा बोल रहा है कि हवा निकली एक समय लगने लगा था कि अब प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव बनने जा रहे हैं परंतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिमाग से बहुत ज्यादा परिपक्व राजनेता बन चुके हैं । उनकी दस जनपथ के भीतर सीधी पेठ बन चुकी है जिस वजह से सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी किसी की भी सुनने को तैयार नहीं रहते हैं। टूटी कलम
उम्र दराज हो चले स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव अब प्रदेश में जिन जिलों में दौरा कर रहे हैं ।वहां उनके स्वागत सत्कार एवं आगमन के समय प्रस्थान के समय संबंधित जिलों के कलेक्टर,एस पी, विधायक प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर टीएस बाबा के कार्यक्रम में से दूरी बनाकर रखते हैं जो संभवत ऊपरी इशारे पर हो रहा है। टीएस बाबा भी अब इस तरह के प्रोटोकॉल से वाकिफ हो चुके हैं इसलिए वे कलेक्टर एसपी विधायक के ना आने पर भी बुरा नहीं मान रहे हैं । अब तो बात यहां तक पहुंच गई है कि जहां भी बाबा जा रहे हैं वहां के स्थानीय नेता ,पंच, सरपंच, पार्षद, भी टी एस बाबा के कार्यक्रम से कन्नी काटने लगे हैं। टूटी कलम
पिछले बार की अपेक्षा इस बार सरगुजा संभाग से कांग्रेस की कम सीटें आने की प्रबल संभावनाएं है…. एक आंकलन के अनुसार पिछली दफे के चुनाव में सरगुजा संभाग से सारी सीटें कांग्रेस को मिली थी। जिसमें टी एस बाबा का अहम भूमिका रही थी ,परंतु टी एस बाबा जिन जिन को राजनीति करना सिखाए, विधायक बनवाएं, उन लोगों ने ही बाबा को बीच मझधार में छोड़कर धोखा दे दिए। अब यह संभावनाएं बन रही है कि इस दफे के चुनाव में कांग्रेस को महज 2-4 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। टूटी कलम
किंग टी एस बाबा को अब किंग मेकर बन कर राजमहल में ही बैठकर सारी गतिविधियां संचालित करनी चाहिए । लगभग 1000 करोड रुपए की संपत्ति के मालिक मालिक टी एस बाबा को अब इस उम्र में गली गली घूमने की कतई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। सरगुजा संभाग के दौरे पर चाहे प्रधानमंत्री , देश के ग्रह मंत्री आए या मुख्यमंत्री आए तो उनके दरबार राजमहल में उनसे मिलने स्वंय चलकर जाए। वर्तमान में राजनीति का स्तर इतना निचे गिर चुका है कि बाबा सरीखे धीर, गंभीर, शांत, शालीन, इंसान के लिए करना ठीक नहीं है। टूटी कलम






