🏹 टिल्लू शर्मा 🖋️टूटी कलम रायगढ़ ….. गत दिनों चक्रधर नगर थाना क्षेत्र स्थित बोईरदादर इलाके की कॉलोनी स्वास्तिक विहार में एक 23 वर्षीय सिंधी युवती काजल मसंद की हत्या अज्ञात तत्वों द्वारा कर दी गई थी। जिसके खुलासे को लेकर पुलिस भी भ्रमित रही एवं लगातार बढ़ते दबाव के कारण पुलिस ने उसी क्षेत्र के आदतन बदमाश को पकड़कर आरोपी बतला दिया गया एवं साथी उसके साथ देने वाले दो लोगों को भी सह आरोपी बनाकर पेश कर दिया गया था. उक्त हत्याकांड से संबंधित पुलिस के पास कोई भी ठोस प्रमाणिक साक्षय नहीं है। जिस वजह से किसी भी कानून के जानकार के द्वारा आरोपियों को बड़ी आसानी से दोषमुक्त करवाया जा सकता है। गत दिनों सिंधी समाज के लोगों ने मिलकर जिला अधिवक्ता संघ से निवेदन किया था कि वह आरोपियों की पैरवी ना करें जो कि किसी भी रूप में सही नहीं माना जा सकता क्योंकि बड़े-बड़े आतंकवादियों इंदिरा गांधी राजीव गांधी के हत्यारों की भी पैरवी करने के लिए वकील उपलब्ध हुए थे। सलमान खान के काले हिरण के मामले में भी सलमान खान की तरफ से वकील ने दलील देकर उनकी जमानत करवा दी थी। तो फिर इस मामले में रायगढ़ अधिवक्ता संघ के मेंबरान आरोपियों की ओर से पैरवी क्यों नहीं करेंगे ? वकीलों के द्वारा पैरवी ना करने के निर्णय से कोर्ट के द्वारा आरोपियों को वकील उपलब्ध करवाया जा सकता है। टूटी कलम
बताया जा रहा है कि मृतक काजल मसंद के कोई भी रिश्तेदार रायगढ़ में नहीं रहते हैं। वह और उसकी मां ही रायगढ़ में रह रही थी। इसके बावजूद सिंधी समाज के लोगों के द्वारा ए एस पी से मिलकर ज्ञापन देना एवं वकीलों से पैरवी न करने का निवेदन करना काजल मसंद के साथ पढ़ने वालों के द्वारा रैली निकालकर हत्यारे को फांसी देने की मांग करना बहुत बड़ा मास्टर प्लान हो सकता है शायद किसी रसूखदार को बचाने के लिए उक्त ओर से पुलिस का ध्यान भ्रमित किए जाने का प्रयास किया जा रहा हो। टूटी कलम
ना पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हुई है, ना ही कोई ठोस साक्ष्य पुलिस के हाथ लगा है,ना ही मामला कोर्ट में पेश किया गया है, परंतु हत्यारे को फांसी दो को लेकर माहौल को गरमाने एवम पुलिस की जांच दिशा को स्थिर रखने का प्रयास किया जा रहा है। हत्यारे को फांसी देने का फैसला न्यायलय के द्वारा किया जाता है जो ठोस प्रमाण के पेश करने पर ही संभव हो सकता है। इस हत्याकांड में पुलिस ने जो भी साक्ष्य इकट्ठे किए हैं वह न्यायालय में पत्ते की तरह उड़ जाएंगे. यदि कोई कानून का थोड़ा बहुत भी जानकार होगा तो वह पुलिस के द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को झूठा एवं बनावटी साबित कर देगा. ना कोई चश्मदीद गवाह है ना ही कोई कॉल डिटेल है ना ही सीसीटीवी कैमरा के फुटेज आरोपी को सजा दिलाने के लिए काफी होंगे. पानी में फेंक दिए गए काजल मसंद के मोबाइल एवं आघात करने वाले पत्थर को निकालने पर भी यह साबित नहीं किया जा सकता की उसी पत्थर से आघात कार काजल की हत्या की गई थी. टूटी कलम