
जिले की राजनीतिक पार्टियों द्वारा पत्रकारों की लगातार उपेक्षा की जाती रही है, जिसका स्थानीय पत्रकार अब खुलकर विरोध कर रहे हैं। धूप, बारिश, ठंड हो, दोपहर हो या शाम हो, धरना-प्रदर्शन या ज्ञापन या फिर प्रदेश अथवा राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों का कार्यक्रम हो स्थानीय पत्रकारों द्वारा हर परिस्थितियों में इन राजनीतिक पार्टियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों का कवरेज किया जाता रहा है।

सत्ता के लोभ में इन राजनीतिक दलों द्वारा आम जनता को छला जा रहा है। लोक-लुभावन वादों, अनर्गल प्रलाप, आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने ये मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। जन-सरोकार के विषय जैसे बढ़ती महंगाई, बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा, चिकित्सा व्यवस्था इत्यादि से सम्बन्धित जब सवाल पूछे जाते हैं तो ये कन्नी काट जाते हैं।

किन्तु अब स्थानीय पत्रकारों ने यह निर्णय लिया है कि वे राजनीतिक पार्टियों की खबरों का बहिष्कार तो करेंगे ही, साथ ही साथ उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस, विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों का भी बहिष्कार करेंगे। पत्रकारों ने बताया कि राजनीतिक पार्टियों की जिला इकाई की मनमानी चरम पर है, वह माथा देखकर तिलक लगाती है। उनके इसी आचरण एवं व्यवहार को अब रायगढ़ के पत्रकार और नहीं सहेंगे, फिर चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा। इसी कड़ी में आज शाम 4 बजे भाजपा के प्रेस कॉन्फ्रेंस के 50 से अधिक पत्रकारों ने बहिष्कार करने की सहमति दी है। धीरे-धीरे पत्रकारों का संख्याबल और बढ़ेगा तभी इन राजनीतिक पार्टियों को एहसास होगा कि चंद लोगों ने रायगढ़ प्रेस बिरादरी का ठेका नहीं ले रखा है। यदि निजी संबंध है तो निजी मामला हुआ उसे घर तक रखें। राजनीति और पत्रकारिता इससे अलग हैं।

विरोध करने वालों में शेषचरण गुप्ता, संजय बोहिदार, मुरली बोहिदार, विनय पांडे, राजेश जैन, विवेक श्रीवास्तव, राम कुमार देवांगन, नितिन सिन्हा सुशील पांडे, कैलाश आचार्य, नवरत्न शर्मा, बंसी निराला, महादेव परिहारी, लक्की गहलोत, हेमसागर श्रीवास, विशाल सिंह, मनीष सिंह, नरेंद्र चौबे, राजा खान, कृष्णा मिश्रा, भूपेंद्र सिंह चौहान, प्रकाश थवाईत, विकास पांडे, ठाकुर भूपेंद्र सिंह, सिमरन पंनघरे, अर्चना लाल संजय शुक्ला, राहुल अधिकारी, संजय शर्मा, संदीप, विजयंत खेडुलकर, यशवंत खेडुलकर, आमिर नसरुद्दीन, अभिषेक उपाध्याय, शमशाद अहमद, निमेश पांडे, विपिन सवानी, अविनाश गवेल, पिंटू तिवारी, संजय साहनी, प्रशांत तिवारी, सुदीप मंडल, श्रीपाल यादव, रंजीत चौहान इत्यादि शामिल हैं।

चमचे एवम चाटुकारनुमा पत्रकारों के कारण प्रेस का स्तर दिनों दिन लेबल से नीचे चला गया है। जिसका अहम कारण बाहर से आकर मीडिया का कार्य करने वालो को स्थानीय मीडिया वालो के द्वारा सिर पर चढ़ा लेना है। वर्तमान में राजनीतिक दलों,नेताओं के आगे पीछे मंडरा कर मैनेजमेंट का खेल इन्ही लोगो के द्वारा खेला जाता है। यदि कोई एक छोटा से छोटा कार्यकर्ता भी प्रेस वार्ता आयोजित करता है तो कर्मचारियों को चाय =नाश्ता मिलने का प्रलोभन देकर समाचार कवरेज करने भेज दिया जाता है। जब कभी किसी प्रेस वार्ता में कोई उपहार आदि के मिलने की आस होती है तब मालिक,संवाददाता,कंप्यूटर आपरेटर, कैमरामैन,मशीनमैन,हेल्पर के साथ शिरकत कर उपहारों पर डाका डाला जाता है। भविष्य में ऐसे लोगो को भी चिन्हांकित कर रोक लगाई जानी चाहिए। ताकि पत्रकारों का स्तर ऊंचा रह सके। टूटी कलम






