🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ रायपुर। भूपेश बघेल श्रमवीर सम्मान 2022-23 में शामिल होने के लिए न्यू सर्किट हाउस पहुंचे। सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री बघेल जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पिहरीद में राहुल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान रिकार्ड 109 घंटे जीवंत कव्हरेज करने वाले 61 पत्रकारों को श्रमवीर सम्मान से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि संघर्ष के बहुत से साथी यहाँ उपस्थित हैं। एक दौर था जब टेबल न्यूज की चर्चा होती थी और ग्रामीण पत्रकारिता की बात होती थी। अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आ जाने पर घटना स्थल पर जाना होता है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पत्रकार साथियों के सम्मान का कार्यक्रम है आप लोगो के माध्यम से पल पल की खबर आम जनता तक पहुँची। कोरोना के कारण जो प्रथमिकताएँ थी उनके क्रम में परिवर्तन हुआ है पर पत्रकार सुरक्षा कानून हमारी प्राथमिकता में शामिल है और बहुत जल्द लागू करने के लिए प्रयासरत हैं। पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा के लिए पहल करेगी राज्य सरकार।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एक जुनून होता है पत्रकारों में। पत्रकारों का जीवन कठिन है। उससे भी कठिन इसमें स्थापित होना। पत्रकारों में एक सम्भावना होती है कि फिर वो और कुछ नहीं कर सकता । जीवन भर कलम नहीं छोड़ता। पत्रकार नेता बन सकता है पर कोई नेता पत्रकार नहीं बन सकता। राहुल साहू की जो घटना घटी यहाँ सभी लोगों ने पत्रकार, व्यवसायी, समाजसेवी सभी ने सहायता की जिससे जो बन पड़ा। इतने लंबे समय 109 घण्टे तक जीवित रह पाना देश मे इकलौता ऐसा लम्बा रेस्क्यू था।
बुद्धिजीवी यदि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा दिए गए भाषण का मनन करें तो उसके कई मायने निकाले जा सकते हैं। पत्रकार नेताओं की चापलूसी करते करते नेता बन सकते है परंतु सत्ता का नशा जिन नेताओं पर सर चढ़कर बोलता है वे पत्रकार नहीं बन सकते। पत्रकारिता करने वाले लोग अपना स्वयं का कोई व्यवसाय नहीं कर सकते क्योंकि उनको बैठे-बैठे खाने की आदत सी पड़ जाती है। रुतबा धमकी चमकी उगाही ब्लैक मेलिंग आदि करने के अस्त्र बन जाते हैं पत्रकारों के। इसलिए वे अन्य क्षेत्रों में कदम रखने से हिचकीचात हैं एवं पीछे हट जाते हैं। अगर देखा जाए तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वास्तविक रुप से पत्रकारों पर व्यंग का तीर चलाया है।



