🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़…. रायगढ़ जिला एनएसयूआई के बैनर तले आज रायगढ़ में रेल रोको आंदोलन का आह्वान किया गया था. बताया जा रहा है कि उक्त आंदोलन की सूचना एनएसयूआई के द्वारा आरपीएफ बल रायगढ़ एवं डीआरएम बिलासपुर को दे दी गई थी. जिसको लेकर आरपीएफ बल, जीआरपी पुलिस, जिला पुलिस बल के लगभग 100 अधिकारी, जवान किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए लैस होकर प्लेटफार्म पर मौजूद थे। रेलवे प्रशासन पुलिस प्रशासन एवं आम जनता को यह उम्मीद थी कि उक्त आंदोलन व्यापक होकर उग्र हो सकता है। लेकिन एनएसयूआई ,यूथ कांग्रेस के उंगलियों पर गिने जाने वाले लोगों को उपस्थित देखकर मौके पर उपस्थित रेलवे सुरक्षा बल, पुलिस प्रशासन बल,एवं रेलवे के अधिकारी, कर्मचारी मंद मंद मुस्कुराते हुए एवं उपहास उड़ाते हुए सरीखे नजर आए। जब आंदोलनकारी आंदोलन कर रहे थे तो रेल पटरियों पर धड़धड़ाती हुई मालवाहक गाड़ियां दौड़ रही थी। इस आंदोलन के कारण ट्रेनों की चालें सेकंड भर भी प्रभावित नहीं हुई। पुलिस बल की पर्याप्त मौजूदगी, मौसम में भरी उमस, गर्म रेल पटरियों की वजह से आंदोलन करने आए कांग्रेसी समाचार एजेंसियों को बाइट देते समय भी अपने पसीने पोछते नजर आए। उनके दिलों में एक अनजान सी दहशत भरी हुई थी जो चेहरों से स्पष्ट झलक रही थी।

आम जनता तो आम जनता कांग्रेस पार्टी को भी इस आंदोलन से कोई सरोकार नहीं रहा…. इस आंदोलन को देखकर यह नहीं लगा कि सत्तारूढ़ प्रदेश सरकार के पार्टी कार्यकर्ताओं के द्वारा कोई धरना आंदोलन किया जा रहा है। शायद रेल रोको आंदोलन करने से मंत्री उमेश नंद कुमार पटेल, रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक, धर्मजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया, लैलूंगा विधायक चक्रधर सिंह सिदार,सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े एवं जिला कांग्रेस को सूचित नहीं किया गया होगा। कुछ लोगों के द्वारा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस तरह का आंदोलन कर कांग्रेस सरकार की पूरी तरह मिट्टी पलीद करके रख दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 15 साल के पश्चात सत्ता में वापसी के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे। उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ को अपने कदमों से नाप दिया था। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के सभी ब्लॉकों में पहुंचकर भूपेश बघेल ने कांग्रेश के लिए व्यापक समर्थन जुटाया एवं लोकप्रियता हासिल कर सरकार बनाई गई। सत्ता मिलने के पश्चात कांग्रेस के छूट भैया नेता सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए बगैर पार्टी संज्ञान के धरना आंदोलन प्रदर्शन कर पार्टी की छवि को खराब करने पर तुले हुए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस आंदोलन में कुछ चेहरे ऐसे रहे जिन्हे फूल छाप कांग्रेसी के रूप में जाना पहचाना जाता है। एवं कांग्रेस पार्टी के द्वारा इन लोगों को निष्कासित कर बाहर का रास्ता भी दिख लाया जा चुका है। फिर भी ये लोग अपने आप को कांग्रेसी साबित कर पार्टी की छवि को लगातार धूमिल कर रहे हैं।

मीडिया उड़ा रही है उपहास ™️ शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया रेल रोको आंदोलन….. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेल रोको आंदोलन में शामिल होने गए लोगों से काफी ज्यादा संख्या में रेलवे पुलिस बल एवं जिला पुलिस बल तैनात था जो कि हर एक परिस्थिति से 2- 4 होने के लिए तैयार था. आधा आंदोलन तो पूरी तरह लैस पुलिस बल को देखकर ही समाप्त हो गया था। बताया जा रहा है कि जैसे ही कुछ लोग प्लेटफार्म से उतर कर रेल पटरियों पर बैठने की कोशिश किए तो उपस्थित पुलिस बल ने उन्हें खदेड़ दिया गया। जिसके पश्चात तथाकथित कांग्रेसी नेता मीडिया में यह बयान देते दिखे की आज यदि आज के आंदोलन के पश्चात हमारी मांग पूरी नहीं होगी तो अगली बार प्रदेश स्तर पर रेल रोको आंदोलन को वृहद दिया जाएगा।

रेलवे के अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बतलाया कि जो लोग आंदोलन में शामिल होने आए थे। उनमें से अधिकांश लोग मुफ्त में एसी बोगी में बैठकर रायपुर – बिलासपुर जाने के लिए हाथ जोड़ते, मिन्नतें करते हमारे पास आया करते हैं। शायद इन लोगों ने यह सोचा होगा कि जिस तरह से ब्रजराज नगर, झाड़सुगुड़ा, बेलपहाड़ में रेल रोको आंदोलन को सफलता मिल जाती है ।उसी तरह रायगढ़ में भी इस तरह का आंदोलन सफल हो सकता है। जिससे इन लोगों को राजनीति करने का अवसर भी पुख्ता हो सकता है परंतु आम आदमी की दूरी यह बतला देती है कि आम आदमी को इन लोगों के रेल रोको आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है और ना ही रेल प्रशासन से कोई शिकवा शिकायत है।




