🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़…… कोविड-19 संक्रमण की वजह से पूरा विश्व प्रभावित हुआ था जिससे भारत भी अछूता नहीं रहा गया था. उस समय देश संकट काल के दौर से गुजर रहा था. कोरोना वायरस कि कोई पहचान एवं दवा भी उपलब्ध नहीं थी. इस बीमारी की वजह से पूरे विश्व में कई करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और कई लाख लोगों की जानें भी गई थी. भारत के इतिहास में ट्रेनों का परिचालन पहली बार पूरी तरह से रोक दिया गया था. ट्रेनों के निरंतर आवागमन ना होने की वजह से लोहे से निर्मित पटरियों पर काफी दुष्प्रभाव पड़ा है एवं किस जगह की पटरी किस हाल में है और कितनी भार क्षमता सहन करने के लायक है। यह धीरे-धीरे रेलवे प्रशासन जानकारी ले रहा है। जिस वजह से माल गाड़ियों के फेरे बढ़ाए गए हैं एवं शेषनाग सरीखी मालवाहक गाड़ी केवल भार क्षमता का विश्लेषण करने के लिए चलाई जा रही है। शेषनाग मालवाहक गाड़ी चारमल गाड़ियों को जोड़कर चलाई जा रही है जिसकी लंबाई लगभग 3 किलोमीटर लंबी है। लॉक डाउन की वजह से कोयला परिवहन भी लगभग ठप पड़ गया था जिस वजह से देश में बिजली संकट उत्पन्न होने की संभावनाएं बलवती हो गई थी। जिसको देखकर रेल प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए कोल परिवहन को बढ़ावा दिया गया। क्योंकि अभी के समय में कोयला ही सब उद्योग धंधों के लिए जरूरी चीज है। यदि उद्योगों में कोयला ना होगा तो ना उत्पादन होगा और ना ही बिजली की आपूर्ति निरंतर बनी रह सकेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है भारतीय रेल… भारतीय रेल हिंदुस्तान का सबसे बड़ा उद्योग है जिसमें लगभग 13,00000 लोग कार्यरत हैं एवं कई करोड़ लोगों का परिवार इस उद्योग के कारण चलता है। रेलवे में छोटे-बड़े उद्योग अपने वस्तुओं की सप्लाई कर व्यवसाय करते हैं। इन व्यवसायो में करोड़ों लोग कार्य करते हैं। रेलवे प्रशासन का स्वयं का अलग विभागीय कार्य है जिसमें पुलिस, कोर्ट,मजिस्ट्रेट, जेल आदि सब अलग-अलग होते हैं। मालवाहक गाड़ियों के परिचालन से रेल विभाग को आमदनी होती है । यदि सतही आंकलन किया जाए तो यात्री ट्रेनों के परिचालन से रेल प्रशासन सालाना करोड़ों रूपयो की हानि वाहन करता है। जिसकी भरपाई मालवाहक गाड़ियों के द्वारा पूरी की जाती है। रेल विभाग केवल मालवाहक गाड़ियों के परिचालन से ही चल पा रहा है। मालवाहक गाड़ियों का गंतव्य तक पहुंचने का एवं वापसी का समय निर्धारित रहता है। जिसके अंतर्गत मालवाहक गाड़ियों को माल लोड,अनलोड कर दूसरा फेरा लगाने के लिए तैयार रहना पड़ता है। तय सीमा के भीतर मालवाहक गाड़ियों से माल अनलोड ना होने पर सामने वाली पार्टी को प्रतिदिन लाखों रुपए का हर्जाना भरना पड़ता है। शायद यही वजह है कि माल गाड़ियों को नहीं रोका जाता है। रेल विभाग किसी भी राज्य सरकार के नियम कानून से नहीं चलता है। केंद्र सरकार का पूर्ण रूप से रेल विभाग के पर नियंत्रण रहता है। ट्रेन की एक बोगी बनाने में भारत सरकार के लगभग 2 करोड रुपए खर्च होते हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिसे लोग अनदेखा करते हैं वह कितना बड़ा उद्योग है। देश में कितनी बोगियां चलती है ,कितने मालवाहक डिब्बे चलते हैं ,कितने रेल के इंजन चलते हैं ,यदि इसका अध्ययन किया जाए तो दिमाग की नसें फट सकती है। भारतीय रेल एक इतना बड़ा उद्योग है कि उसके बारे में विस्तृत चर्चा करना एवं आंकलन करना असंभव सा प्रतीत होता है। यदि भारतीय रेल माल गाड़ियों का परिचालन बंद कर केवल यात्री ट्रेन चलाने लग जाए तो शायद देश को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ सकता है।






