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TuTi KaLaM RaIgArH : अधिकारियों के लग्जरियस शौक की वजह से छत्तीसगढ़ में अपनी पहचान खोने लगे हैं 02 शासकीय वाहन, एवं 03 पुलिस बल के वाहन ™️ आरक्षको, हेड कांस्टेबलों, सब इंस्पेक्टरो के निजी वाहन चलाए जा रहे हैं मोटे किराए पर ™️ निजी वाहनों का मोटा किराया किस मद से दिया जाता है ™️

CHANDRAKANT TILLU SHARMA by CHANDRAKANT TILLU SHARMA
31st January 2023
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💣 टिल्लू शर्मा 🙏टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि उच्चाधिकारी मोटे किराए पर ली गई लग्जरी वाहनों की सवारी कर रहे हैं जिनकी नंबर प्लेट भी निजी एवं टैक्सी परमिट की लगी रहती है जिस वजह से आमजन को यह समझ में नहीं आता है कि उक्त वाहन निजी है टैक्सी है या फिर शासकीय है। बड़े अधिकारियों से लेकर छोटे अधिकारियों तक मोटे किराए पर ली गई इनोवा, स्कॉर्पियो, आदि लग्जरी वाहनों का बराबर रूप से लुफ्त उठाते हैं। इनोवा की सवारी कलेक्टर सीईओ, पुलिस अधीक्षक तो करते ही हैं मगर सब इंस्पेक्टर तक ऐसे वाहनों का उपयोग करते हैं। जिनमें शासकीय नंबर 02 नहीं लगा होता है। इसी तरह पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से लेकर थानेदार तक काली फिल्म लगी स्कॉर्पियो का उपयोग करते हैं। मैं भी पुलिस से संबंधित नंबर 03 नहीं होता है। इन सबके बावजूद किराए पर ली गई निजी वाहनों में बकायदा नीली बत्ती लगी होती है और अधिकारियों के पद की प्लेट भी लगी रहती है। लगभग सभी शासकीय विभागों एवं पुलिस विभाग में इसी तरह के वाहन चल रहे हैं । यदि वाहन में अधिकारी के पद एवं पुलिस का नाम ना लिखा हो तो आमजन यह भी नहीं पहचानेंगे की उक्त वाहन किसकी है।

गहन जांच पड़ताल करने के बाद यह बात स्पष्ट हुई की पुलिस महकमे में चल रहे निधि नंबर एवं टैक्सी नंबर वाले वाहन पुलिस कर्मियों के द्वारा ही विभाग में मोटे किराए पर चलाई जाती है और अपनी तनखा के साथ साथ वाहन का किराया भी लिया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के के अनुसार पुलिस विभाग में चल रहे प्रति वाहन का किराया प्रतिमाह 50,000 ₹ है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि वाहन की ड्राइविंग भी स्वयं गाड़ी मालिक आरक्षक के द्वारा की जाती है। शासकीय विभागों में चल रहे किराए के वाहनों के पीछे हैं ईशा,यादव आदि नाम लिखे होने की वजह से यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है की क्या वाहन में बैठे थानेदार यादव हैं, और वाहन में बैठे अधिकारियों के बच्चों का नाम क्या ईशा है ? कई वाहनों की विंडस्क्रीन पर महादेव का त्रिपुंड बना होता है एवं महाकाल लिखा रहता है क्या इस तरह सरकारी वाहनों में कुछ भी लिखे जाने की अनुमति होती है। वाहनों में लिखें जय श्री राम, जय मां बंजारी, जय बूढ़ी माई, live young, live free आदि पर क्या जुर्माना करने का प्रावधान नहीं है।

एक समय ऐसा था कि MP 02 नंबर को देखकर लोग समझ जाया करते थे कि उक्त वाहन किसी शासकीय विभाग की है। इसी तरह MP 03 नंबर देख कर बच्चे भी समझ जाया करते थे कि उक्त वाहन पुलिस विभाग की है। छत्तीसगढ़ राज्य अलग बनने के बाद कुछ वर्षों तक तो CG 02 एवं CG 03 नंबर वाले वाहन चलन में थे परंतु अधिकारियों के लग्जरी वाहन प्रेम की वजह से ये सरकारी नंबर विलुप्त होने की कगार पर चल रहे हैं।

सुस्त है आरटीओ विभाग… जिले में चलने वाले डंपर ट्रेलर हाईवा आदि भारी वाहन के फिटनेस यदि जांचा जाए तो आधे से अधिक वाहन रिजल्ट कर दिए जाएंगे। लोकल कार्यों में लगे हुए सभी वाहन पुराने एवं कंडम हो चुके हैं। जिनकी बैक लाइट तो क्या हेड लाइट भी कार्य नहीं करती है। शायद ही कोई ऐसा वाहन होगा जिसका इंडिकेटर कार्य करता होगा। इसी तरह पीली नंबर प्लेट वाले वाहनों के टैक्स शायद ही पटाए जाते होंगे। लग्जरी निजी वाहनों का उपयोग बेधड़क होकर व्यवसायिक रूप में किया जाता है और अधिकतर वाहन सरकारी विभागों फैक्ट्रियों के अधिकारियों के उपयोग हेतु वोट माहवारी किराए पर चलाए जा रहे हैं। शायद ट्रैवलिंग एजेंसीयो के वाहनों की नंबर प्लेटें पीले रंग में की होनी चाहिए और काले अक्षर से नंबर लिखे होने चाहिए ताकि उनकी पहचान टैक्सी परमिट के रूप में आसानी से हो सके।

दद्दा रे दद्दा आगे लिखा है “पुलिस” और पीछे बना हुआ है “तलवार” का मोनोग्राम, सामने में नंबर प्लेट है ही नहीं एक तो वैसे ही आमजन पुलिस के नाम से घबराते हैं और नीली बत्ती लगे वाहन को देखकर दिल की धड़कने तेज हो जाया करती है। उस पर यदि वाहन के पीछे के कांच में तलवार का चित्र बना हो तो फिर जनता के दिलों दिमाग में पुलिस के प्रति कैसा भाव उत्पन्न होगा यह उक्त वाहन को देखने वाला ही बतला सकता है। पुलिस के वाहनों पर इस तरह की दबंगई वाले नाम लिखे होंगे तो शहर के बिगड़ैल नवाबजादे, टपोरी, छूट भैया,गली के गुंडे,अवाली,मवाली कुछ भी लिखवा कर या मोनोग्राम बनवा कर अपना रुआब झाड़ने में भला क्यों पीछे रहेंगे। सड़क सुरक्षा सप्ताह में यातायात पुलिस की नजरें उक्त वाहन की नंबर प्लेट पर क्यों नहीं गई यह सबसे बड़ा प्रश्न है क्योंकि वाहन के सामने नंबर प्लेट लगी ही नहीं है। नंबर प्लेट के स्थान पर छोटे-छोटे अक्षरों में रेडियम के नंबर चिपका दिए गए हैं। इस तरह के नंबर लिखे वाहनों पर नियमतः जुर्माना किया जाना चाहिए।

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CHANDRAKANT TILLU SHARMA

CHANDRAKANT TILLU SHARMA

●प्रधान संपादक● छत्तीसगढ़ स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा, रायगढ़ जिले का नंबर 1, रायगढ़ के दिल की धड़कन “✒️टूटी कलम 📱वेब पोर्टल न्यूज़” जिसका कारण आप लोगों का असीम प्रेम है। हम अपने सिद्धांतों पर चलते हैं क्योंकि “इतिहास टकराने वालों का लिखा जाता है। तलवे चाटने वालों का नहीं” इसलिए पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। “बहते हुए पानी में मुर्दे बहा करते हैं” जिंदा लोग बहाव के विपरीत तैरकर किनारे पर आ जाते हैं। पत्रकारिता करने के लिए शेर के जैसा जिगर होना चाहिए और मन में “सोचना क्या जो भी होगा देखा जाएगा” होना चाहिए। आवत ही हरसे नहीं, 👀नैनन नहीं सनेह टिल्लू तहां न जाईए चाहे कंचन बरस मेह ।

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