🔥 टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद से मीडिया में जितनी गिरावट देखी जा रही है उतनी गिरावट शायद ही लोकतंत्र के किसी स्तंभ में आई होगी। लोकतंत्र के अन्य तीन स्तंभ अपने अपने कार्य क्षेत्रों का कार्य ठीक-ठाक तरीके से कर रहे हैं परंतु चौथा स्तंभ केवल महिमा मंडित, चापलूसी, चाटुकारिता, वसूली, उगाही, धमकी, चमकी करने के अतिरिक्त किसी भी तरह के कार्य समाज सेवा,जनसमस्याओं शिक्षा बिजली पानी सड़क रोजगार आदि के समाधानों पर लिए सरकार एवं प्रशासन का ध्यानाकर्षण नहीं करवा पाते हैं। जिसका एकमात्र कारण यह है कि राजनीतिक दलों के द्वारा आर्थिक प्रलोभन के मार्फत पत्रकारिता एवं पत्रकारों को खरीद लिया जाता है।
निरक्षर,अनपढ़,मूर्ख,मूढ़, लोग पत्रकार बन बैठे हैं दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है कि राजनीतिक दलों के द्वारा इस श्रेणी के युवकों को पत्रकारिता करने का अधिकार देकर अपने पक्ष में समाचार चलवाकर व्यक्ति विशेष एवं पार्टी का विज्ञापन करवाने का सरल एवं सुलभ साधन ढूंढ लिया गया है। जो लोग कभी अखबारों को घर-घर बांटने वाले हाकर, कैमरामैन, प्रूफ रीडर, कंपोजिटर, अखबारों के बंडल बांध कर रेलवे स्टेशन बस स्टैंड पहुंचाया करते थे। वह सब अपने संपादकों की प्रतिष्ठा को देखते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में कमाई करने का जरिया ढूंढ लिए हैं। जो कंप्यूटर ऑपरेटर किसी समय अखबारों के पीडीएफ तैयार किया करते थे। वे स्वयं संपादक बन बैठे हैं। अखबारों के संपादकों उनकी मित्र मंडलियों के लिए जो लोग चाय नाश्ता पानी पानी की व्यवस्था किया करते थे । वे आज सरकारी दफ्तरों,ठेकेदारों,कबाडियो, भू माफियाओं कॉल माफियाओं खनिज माफियाओं आदि के यहां 500- 1000 लेने की खातिर मिन्नतें करते,,गिड़गिड़ाते,हाथ जोड़ते, पांव पकड़ते उक्त लोगों के यहां बाहर बैठे देखे जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश बिहार महाराष्ट्र मध्य प्रदेश के 420 लोगों के द्वारा बनाया जाता है मूर्ख इन प्रदेशों के बुद्धिमान लोगों के द्वारा चैनलों के प्रदेश प्रमुख जिला प्रमुख शहर प्रमुख ब्लॉक प्रमुख आदि मोटी रकम लेकर नियुक्ति पत्र, माइक आईडी, स्टीकर,रिबन, आई कार्ड किसी भी ऐरे गेरे, नत्थू खैरे को अपना प्रतिनिधि बना दिया जाता है और 15 अगस्त 26 जनवरी दीपावली होली आदि के अवसर पर विज्ञापन के नाम पर मोटी रकम मांगी जाती है। जिसके बाद जो दिया उसका भला जो ना दिया उसका भला और तथाकथित चैनल अपना बोरिया बिस्तर समेट कर नौ दो ग्यारह हो जाता है। इस तरह के चैनलों पर पुलिस के द्वारा भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है। चैनलों के द्वारा ठगाए गए लोगो के द्वारा प्रेस वार्ताओं में काम ना आने वाले भोथे,खोखले, शो पीस बन चुके माइक आईडी को टेबल के ऊपर रखकर अपना रसूख दिखलाया जाता है। यदि प्रेस वार्ता के दौरान माइक आईडी की वास्तविकता की जांच की जाए तो 100 में से 90 माइक आईडी बेकार, बेवजह रखें पाए जा सकते हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रेस वार्ता का आयोजन वायरल होने पर बगैर बुलाए जा धमकते तथाकथित लोग किसी के द्वारा भी व्हाट्सएप पर प्रेस वार्ता का समाचार लगाने पर बगैर बुलाए लोग चाय ,नाश्ता ,गिफ्ट की आशा लिए कहीं भी जा पहुंचते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि जिस किसी के द्वारा भी प्रेस वार्ता कर आयोजन किया जाए उसे व्यक्तिगत तौर पर मैसेज या फोन के द्वारा प्रेस वालों को आमंत्रित किया जाना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान कई लोगों की निगाहे नाश्ता रखने के स्थान पर और गिफ्ट खोजने में लगी रहती है। प्रेस वार्ता के पश्चात गिने-चुने पढ़े-लिखे खुद का चैनल चलाने वाले नाम मात्र के पत्रकारों के द्वारा समाचार लिखे जाते हैं और चैनलों पर दिखाए जाते हैं।
प्रेस विज्ञप्तियो पर टीका है भविष्य… राजनीतिक पार्टियों, समाजसेवियों, पुलिस डीएसआर, जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति, नगर पालिका निगम की विज्ञप्ति, प्रेस वार्ता आयोजित करने वालों की विज्ञप्ति को बगैर किसी सुधार के जस का तस चलाकर बहुतेरे लोग पत्रकार कहला रहे हैं। सुधार तो तब किया जाएगा जब पत्रकार बुद्धिमान और पढ़े लिखे होंगे।




