🎤 टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़. रायगढ़ कांग्रेस की राजनीति में चल रही अटकल बाजी सच साबित हो गई. जब किसान कांग्रेस नेता नेतनगर निवासी लल्लू सिंह ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया गया।
कांग्रेस में लॉलीपॉप नुमा किसान कांग्रेस प्रकोष्ठ के जिला पदाधिकारी का औचित्यहीन पद देकर भोले भाले ग्रामीण से अपना उल्लू पिछले 43 वर्षों से सीधा किया जा रहा है। अविभाजित मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर रहे रायगढ़ के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार गुप्ता, स्वर्गीय डॉक्टर शकराजित नायक एवम खरसिया के पूर्व विधायक स्वर्गीय नंद कुमार पटेल जैसे कद्दावर नेताओं के अंधभक्त समर्थक के रूप में जाने पहचाने जाने वाले लल्लू सिंह को कांग्रेस में वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार है। लल्लू सिंह को किसान प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाकर लॉलीपॉप थमा दी गई थी। राजनीति पार्टियों के द्वारा प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बांटना पद बांट देना सही मायने में लॉलीपॉप बांट देना जैसा कार्य होता है। प्रकोष्ठों की पार्टियों में कोई पूछ परख नहीं होती है।
पिछले कई माह से लल्लू सिंह कांग्रेस विरोधी बयान बाजी कर रहे थे। उनके निशाने पर रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक ,खरसिया विधायक उमेश पटेल थे। इन विधायकों ने लल्लू सिंह की नाराजगी का कारण कभी जानना नहीं चाहा। पिछले कई माह से नेट नगर में किसान आंदोलन चलाया जा रहा था जिस के समर्थन में राजनीतिक लाभ लेने की खातिर भाजपा, आम आदमी की पार्टी ,बहुजन पार्टी, आदि पार्टियों के नेताओं के द्वारा नेतनगर पहुंचकर किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया गया परंतु सत्ता पक्ष के ईमानदार कार्यकर्ता लल्लू सिंह के किसान आंदोलन को समर्थन देने कांग्रेस पार्टी से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। शनै शनै लल्लू सिंह का कांग्रेस से मोहभंग होने लगा एवं उनके कभी भी इस्तीफा देने की हवा उड़ती रही। लल्लू सिंह को आम आदमी पार्टी में शामिल करने के लिए आप पार्टी के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी लगातार लल्लू सिंह के संपर्क में रहे। जिनको आप पार्टी के जिला अध्यक्ष पद देने के सब्जबाग दिखलाए गए। आप पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा लल्लू सिंह का ब्रेनवास कर दिया गया जिससे उनका झुकाव आप पार्टी की ओर हो गया। लल्लू सिंह ने 43 साल तक की गई कांग्रेस की सेवा को त्यागते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया गया।
सत्ता पक्ष के प्रकोष्ठ के नेता होने के बावजूद नेतनगर में जिला प्रशासन के द्वारा नहर खुदाई के कार्य का विरोध करने पर लल्लू सिंह के विरोध का समर्थन ना जिला स्तर पर और ना ही प्रदेश स्तर पर कांग्रेस के नेताओं के द्वारा किया गया। इसके विपरीत जिला प्रशासन के द्वारा ग्रामीणों की खड़ी फसलों पर बुलडोजर चलवा दिया गया और सैकड़ों ग्रामीणों पर शासकीय कार्य में बाधा का आरोप लगाते हुए अस्थाई जेल भेज दिया गया था। इन सब कारणों से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों के बीच स्वयं को अपमानित महसूस करने वाले किसान कांग्रेस के नेता लल्लू सिंह ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब लल्लू सिंह के राजनीति अनुभव का लाभ भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी की पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, आदि के द्वारा उठाया जाएगा। यह भविष्य के लिए सोचनीय है। मगर लल्लू सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी में अपनी विश्वसनीयता खो दी है। यदि वे भविष्य में कांग्रेस पार्टी से ही जुड़ना चाहेंगे तो पहले जैसा विश्वास कायम नहीं कर पाएंगे।







