🎤टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में छुपा ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को उखाड़ फेंका. जिसकी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह, सहित प्रदेश के नेताओ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव,यहां तक की स्वयं प्रत्याशियों ने भी अपनी जीत की उम्मीद नहीं की होगी क्योंकि प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जादू लोगों के सर पर चढ़कर बोल रहा था और कांग्रेस के द्वारा की गई चुनावी घोषणाओं ने भाजपा को अंदर तक हिला कर रख दिया था. राष्ट्रीय चैनलो के साथ-साथ प्रादेशिक चैनेलो,लोकल मीडिया के द्वारा अपने अपने एग्जिट पोल में भूपेश सरकार की वापसी पूर्ण बहुमत के साथ तय बतलाई जा रही थी. कांग्रेस को 45 से 55 सीट के बीच मिलना बतलाया जा रहा था किंतु जब मत पेटियां खुली तो सबको चौका देने वाले परिणाम सामने आए और प्रदेश में भाजपा कांग्रेस से बहुत आगे निकल गई. जिसे सभी ने मोदी मैजिक मान कर संतुष्टि प्राप्त कर ली मगर मतदाताओं को भी आश्चर्य है कि यह सब कैसे हो गया. भाजपा से जीते प्रत्याशियों को स्वयं को यकीन नहीं हो रहा है कि वे विधायक कैसे बन गए.
चुनाव में रायगढ़ जिले की चार विधानसभाओं की बात की जाए तो एकमात्र रायगढ़ सीट पर ही भाजपा के प्रत्याशी ओपी चौधरी को जीत मिली . वही लैलूंगा,धरमजयगढ़,खरसिया विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशियों को करारी हार का मुंह देखना पड़ा.जबकि कांग्रेस ने लैलूंगा से चक्रधर सिदार को कमजोर प्रत्याशी, खराब रिजल्ट के कारण टिकट से वंचित कर दिया था और नए चेहरे पर दांव खेला था. वहीं भाजपा अपने ने पुराने चेहरे को मैदान में उतारा था. इसके बावजूद भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खरसिया विधानसभा से कद्दावर भाजपा नेता ओ पी चौधरी को आपसी समझौते के तहत रायगढ़ से चुनाव लड़ावाया गया ताकि कांग्रेस की नाक बची रह सके अन्यथा इस बार खरसिया से कांग्रेस का सफाया होना निश्चित माना जा रहा था. डमी प्रत्याशी के रूप में महेश साहू को भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़वाया गया जिन्होंने लगभग 80,000 वोट पाकर सिद्ध कर दिया कि इस बार ओ पी,भाजपा खरसिया सीट कांग्रेस से आसानी से छीन सकती थी. पूरे प्रदेश में सभी जगह से भाजपा को लीड मिलने के बावजूद रायगढ़ जिले की तीन विधानसभा क्षेत्र में मिली हार को प्रदेश भाजपा संगठन के द्वारा गंभीरता से विचार करना होगा और जिला भाजपा संगठन में व्यापक फेर बदल कर लोकप्रिय,भीड़ जुटाऊ ऊर्जावान, जननेताओ को स्थान देना उचित होगा क्योंकि आने पहले समय में लोकसभा एवं नगरी निकाय, पंचायत के चुनाव होने हैं. भाजपा के द्वारा तीनों चुनाव में यदि अपनी जीत बरकरार रखनी होगी तो संगठन में फेर बदल करना ही होगा. पदाधिकारी के नाम पर व्यवसाय करने वालों को व्यवसाय करने का मौका दे देना चाहिए और पार्टी के लिए काम करने वालों को अवसर दिया जाना चाहिए. जिला भाजपा रायगढ़ के कार्यकारिणी बनने के बाद से भाजपा लगातार हार का मुंह देख चुकी है. अब समय परिवर्तन हो रहा है. इसलिए जिला भाजपा में भी परिवर्तन करना अति आवश्यक हो गया है.
रायगढ़ शहर के जिन-जिन लोगों को अलग-अलग विधानसभाओं में प्रयेक्षक बनाकर भेजा गया था. उन सभी विधानसभाओं में भाजपा की करारी हार हुई है. इसलिए भाजपा के द्वारा पूरे संगठन में आमूल चूल परिवर्तन करते हुए तेज तर्रार,भीड़ जुटाउ, वाकपटु,तार्किक, कुशाग्र लोगो को स्थान दिया जाना ही पार्टी हित में होगा.ओ पी चौधरी का बंपर वोटो से चुनाव जीतना यह उनकी काबिलियत,स्वयं का मैनेजमेंट संभालना ही है.
यदि लोकसभा चुनाव से पहले रायगढ़ जिला भाजपा में आमूल चूल परिवर्तन नहीं किया जाएगा तो शायद भाजपा के प्रत्याशी को रायगढ़ जिले की चारों विधानसभाओ से मात खानी पड़ सकती है. इसलिए चाहिए कि भाजपा अध्यक्ष भीड़ जुटाउ,प्रखर वक्ता,जमीनी व्यक्ति होना चाहिए ना की कोई ठेकेदार,व्यवसाई क्योंकि आगामी 5 साल धन कमाने का अवसर आ चुका है. वैसे जिला भाजपा अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व मारवाड़ी समाज को मिलता रहा है. इस कारण अब अध्यक्ष बनने का अवसर किसी और को मिलना चाहिए. जिनमे सरदार गुरुपाल सिंह भल्ला, जगन्नाथ पाणिग्रही,विलिस गुप्ता,स्वप्निल स्वर्णकार,आदि है जो भाजपा के जमीनी नेता कहलाते है. वैसे विजय अग्रवाल पूर्व विधायक इस पद के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेंगे. जिनके पास जनाधार है,युवाओं की फौज है,कुशल वक्ता,राजनीति के चाणक्य है.







