🎤टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ आशा के विपरीत संपन्न विधानसभा चुनावो के अप्रत्याशित, चौका देने वाले परिणाम आने से भाजपा खेमे में खुशियों,जश्न का माहौल बना हुआ था.सारी खुशियां उस समय काफूर हो गई. जब राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चुनने की बारी आई. भाजपा ने जातिवाद के आधार पर 1 मुख्यमंत्री 2उप मुख्यमंत्रियों वाला कार्ड खेलकर सभी समुदाय के वोटरों को खुश करने का प्रयास किया गया . बस इसी चूक की वजह से भाजपा को संगठन के भीतर नाराजगी,आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है और पुराने चेहरे असंतुष्ट हो गए है. जिस वजह से इसका खामियाजा भाजपा को आने वाले लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ेगा.भाजपा के द्वारा ब्राम्हण, ओबीसी,आदिवासी कार्ड खेलकर मैनेज करने का प्रयास किया गया परंतु इससे डेमेज होने से इंकार नहीं किया जा सकता.
छत्तीसगढ़ में आधा दर्जन से अधिक पुराने अपराजेय, वरिष्ठ,कद्दावर बीजेपी नेता है. इसके बावजूद भाजपा संगठन ने विष्णु देव साय का नाम मुख्यमंत्री के रूप में लाकर सबको चौंका दिया. उससे ज्यादा अचंभा तब हुआ जब उपमुख्यमंत्री के रूप में दो नए चेहरों को तवज्जो दी गई. अरुण साव, विजय शर्मा को उपमुख्यमंत्री पद देने का ऐलान किया गया. जिस वजह से अपनी उम्मीद लगाए बैठे भाजपा नेताओं को गहरा सदमा पहुंचा किंतु वे खून का घूंट पीते हुए चुप्पी साध लिए. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को विधानसभा अध्यक्ष का पद देकर लॉलीपॉप थमा दी गई. छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा चर्चित चेहरे पूर्व कलेक्टर एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी को लेकर लोगों में यह उम्मीद थी कि ओपी चौधरी को संस्था की बागडोर सौपी जा सकती है. मगर उन्हें सट्टा की बागडोर सौपना तो दूर की बात हुई उपमुख्यमंत्री पद का भी लाभ नहीं दिया गया. जिस वजह से ओपी चौधरी के समर्थकों में काफी रोष और आक्रोश देखा जा रहा है.
जिस तरह से भाजपा संगठन कद्दावर एवं बुजुर्गवार चेहरों को तवज्जो ना देखकर नए चेहरों को सामने ला रही है. इससे भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में संगठन के प्रति अंदर ही अंदर चिंगारी सुलग रही है जिसका परिणाम आने वाले लोकसभा में देखा जा सकता है.
छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त अन्य दो प्रदेशों मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में नए चेहरों को प्रदेशों की बागडोर सौंप दी गई है. भाजपा का यह कार्य हर किसी के समझ से बाहर हो चुका है. राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान छत्तीसगढ़ में डॉक्टर रमन सिंह बृजमोहन अग्रवाल आदि का कद्दावर नेताओं को पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की तरह से सम्मान दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश में तो शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री न बनाए जाने पर प्रदेश की सारी महिलाएं मीडिया के सामने फुट फुट का रोई एवं शिवराज सिंह ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर x मुख्यमंत्री की जगह मां एवं भाई लिखना जन चर्चा का विषय बना हुआ है. देश के प्रत्येक नागरिकों का यह मानना है कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार शिवराज सिंह चौहान की लाडली बहना योजना की वजह से महिलाओं के साथ प्रतिशत वोट मिलने पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई और मुख्यमंत्री चुने जाने के समय शिवराज सिंह चौहान को धोखा दे दिया गया. शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा और कुछ मांगने से अच्छा मर जाना पसंद करूंगा. इस बयान से शिवराज सिंह की उभरी पीड़ा सब ने देखी है.







