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🛑 टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम न्यूज रायगढ़ कलेक्टर कार्तिकेय गोयल के संज्ञान लेने के बाद सोची समझी षड्यंत्र का हिस्सा जनसुनवाई
२० मार्च को जनसुनवाई नियत की गई थी. जो सोंचे समझे षड्यंत्र का ही हिस्सा हैं। जन सुनवाई के बाद केंद्र सरकार से फ्रेश स्वीकृति प्राप्त कर वर्षों से चल रहे अवैधानिक प्लांट को वैधानिक दर्जा मिल जाता। मामला फाइलों में बंद और उद्योग व् पर्यावरण विभाग दोनों की बल्ले बल्ले हो जाती. मगर रायगढ़ के ऊर्जावान, संवेदनशील कलेक्टर कार्तिकेय गोयल के सख्त होने के बाद क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग ने जनसुनवाई निरस्त कर दी
ई.आई. ऐ. २००६ के अनुसार केंद्र से स्वीकृति पश्चात् ही उद्योग की स्थापना व् उत्पादन शुरू किया जा सकता है। पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम 1986, एयर एक्ट १९८१ एवं वाटर एक्ट १९७४ के तहत ऐसे मामलों में पर्यावरण विभाग कोर्ट में उद्योग के विरुद्ध अपराधिक मामला दर्ज करवाता है जिसमे सजा का प्रावधान है।
शिकायत होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं
इस बारे में जन चेतना मंच के रमेश अग्रवाल ने बताया कि इस संगीन अपराध की जानकारी मैंने जिला कलेक्टर, मुख्य सचिव व् केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तक कर दी है लेकिन यदि कुछ नहीं होता है तो सिवाय हाई कोर्ट या एनजीटी जाने के कोई विकल्प नहीं बचता।
नपेंगे आला अफसर भी
लेकिन मामला यंहा पेचीदा हैं। इस मामले में दोषी तो उद्योग के साथ साथ विभाग के आला अधिकारी भी माने जायेंगे| उद्योग के खिलाफ तो फिर भी पर्यावरण विभाग कोर्ट जाकर अपनी खाल बचाने की कोशिश कर सकता है लेकिन सदस्य सचिव जैसे ऊँचे ओहदे पर तैनात कमाऊ अधिकारी पर कौन कार्यवाही करेगा.
अब देखना यह है कि पिछले दो सालों से जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग, श्रम एवं सुरक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंक कर धनबल के जोर पर चलाए जा रहे उद्योग पर सरकार क्या कार्रवाई करती है. याद रहे कि प्रदेश सरकार में ओपी चौधरी पर्यावरण मंत्रालय में केबिनेट मंत्री है. जिनके द्वारा उद्योग प्रबंधन के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी यह प्रश्न जनमानस के दिमाग में तैर रहा है. यदि ओ पी चौधरी कड़े रूख अख्तियार करते हुए जिले में चल रहे सभी उद्योगों की सूक्ष्मता से जांच करवायें तो बहुत बड़े-बड़े मामलों का रहस्योद्घाटन हो सकता है. ओ पी को चाहिए कि जगदंबा से लेकर जिंदल तक के उद्योगों की धरातल से लेकर उत्पादन तक की पूर्ण जांच करवाई जानी चाहिए. जिससे उनकी छवि में इजाफा हो सके. ओपी चौधरी में स्पष्ट रूप से कहा भी है कि उनके विभागो में विधि सम्मत कार्य ही किए जाएंगे.







