टूटी कलम रायगढ़ जिले का बहुचर्चित, विश्वसनीय, पाठको की पहली पसंद नंबर वन के पायदान पर न्यूज वेब पोर्टल “टूटी कलम” अपनी लोकप्रियता की वजह से छत्तीसगढ़ स्तर पर जाना पहचाना जाने लगा है. संपादक निडर,निष्पक्ष,निर्भीक, बेबाक,बेखौफ, असलियत से नाता रखने वाला, लेखक, चिंतक, विचारक, विश्लेषक, व्यंग्यकार,स्तंभकार,कलमकार, माता सरस्वती का उपासक, लेखनी का धनी, कलम का मास्टरमाइंड चंद्रकांत (टिल्लू) शर्मा रायगढ़ छत्तीसगढ़ 83192 93002…. जिला ब्यूरो चीफ राष्ट्रीय अखबार दैनिक जन जागरण संदेश
🏹टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़… जब बैंक ही उपभोक्ताओं के रुपए पर डाला डालने लग जाए तो उपभोक्ता आखिर किस पर विश्वास करके कहां अपना पैसा जमा करें. एक ऐसा ही मामला सामने आया है. जिसमें भारतीय स्टेट बैंक के मैनेजर के द्वारा दो लाख रुपए की हेरा फेरी करते हुए उपभोक्ता को बैंक के चक्कर 10 वर्षों तक कटवाए गए.
मामला इस प्रकार है कि प्रदेश के जाने-माने ठेकेदार सुनील रामदास के द्वारा व्यवसाय के संबंध में नवंबर 2004 को दो लाख रुपए का स्टेट बैंक के माध्यम से टी डी आर बनवाया गया था. टी डी आर कि मियाद पूरी होने पर जब उपभोक्ता के द्वारा अपनी रकम वापस लेनी चाहिए तो तत्कालीन बैंक मैनेजर ने टीडीआर को पुनः 5 वर्षों के लिए जमा कर देना बतलाया गया. उपभोक्ता सुनील रामदास बैंक मैनेजर की चिकनी चुपड़ी बातों में आते हुए अपनी सहमति दे दी थी. 5 वर्षों के बाद जब सुनील रामदास अपना टी डी आर लेने बैंक पहुंचा तो उन्होंने यह पाया कि बैंक मैनेजर का स्थानांतरण हो चुका था एवं उनकी जगह पर नया बैंक मैनेजर अमित चौबे उपस्थित था. सिविल कांट्रेक्टर सुनील रामदास ने अपना टी डी आर जमा करने के साथ ब्याज सहित रकम वापसी की मांग की, जिस पर बैंक मैनेजर के द्वारा कहा गया कि उनके टीडीआर का लेखा-जोखा कंप्यूटर में नहीं है. इसलिए वे रकम नहीं दे सकते. इतना सुनने के बाद उपभोक्ता सुनील रामदास के पैरों तले जमीन खिसक गई. तब उन्होंने अपनी रकम वापसी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया.
अपनी रकम वापस लेने के लिए सुनील रामदास शहर जिले के जाने वाले अधिवक्ता अशोक मिश्रा, आशीष मिश्रा के पास जाकर अपने साथ हुई धोखा घड़ी की बातें बतलाई एवं उनसे अपनी रकम वापस दिलवाने की खातिर कानूनी लड़ाई लड़ने का निवेदन किया. अशोक मिश्रा अधिवक्ता के द्वारा पूरे मामले का गहराई से अध्ययन किया गया और यह पाया कि स्टेट बैंक के मैनेजर के द्वारा ठेकेदार सुनील रामदास की राशि दो लाख रुपए की हेरा फेरी करना पाया. तब अधिवक्ता अशोक मिश्रा,आशीष मिश्रा के द्वारा उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया गया. उपभोक्ता फोरम के माननीय न्यायाधीश के द्वारा मामले का अध्ययन कर भारतीय स्टेट बैंक शाखा चक्रधर नगर के शाखा प्रभारी से उक्ताशय का स्पष्टीकरण मांगा. तब स्टेट बैंक के द्वारा काफी हास्यपद जवाब प्रस्तुत किया गया कि बैंक ने बिना कोई रकम लिए सुनील रामदास को लाख रुपए की राशि का टीडीआर बनकर दिया गया था.
विजय शर्मा का अंतिम तर्क. मिश्रा चेंबर के एडवोकेट विजय शर्मा ने न्यायालय से कहा कि दुनिया में शायद ऐसा कारनामा रायगढ़ में पहली बार हुआ होगा की बैंक के द्वारा बगैर कोई राशि लिए किसी को टीडीआर दे दिया. उन्होंने कहा कि चाहे वह कितना बड़ा व्यक्ति मार्क जुकरबर्ग, एलन मस्क, अडानी, अंबानी याद चाहे जो कोई भी रहे. उसे भी रकम जमा करने के बाद टीडीआर प्रदान किया जाता है. माननीय न्यायालय ने अधिवक्ता के तर्क से सहमत होते हुए स्टेट बैंक शाखा चक्रधर नगर के खिलाफ फैसला देते हुए कहा कि स्टेट बैंक पीड़ित सुनील रामदास को मानसिक यंत्रणा हेतु 10,000 रुपए, वाद खर्च 2000 ₹, मूल राशि दो लाख रुपए मय ब्याज सहित 45 दिन के अंदर लोटा कार्यालय को सूचित करें.





