छत्तीसगढ़ स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा रायगढ़ जिले का बहुत चर्चित,छत्तीसगढ़ स्तर पर जाना पहचाना जाने वाला, बुद्धिजीवियों,प्रबुद्ध वर्ग के पाठकों की पहली पसंद,निडर,निष्पक्ष,निर्भीक,बेबाक,दबंग,जनहित एवं समस्याओं पर प्रकाश डालने वाला एकमात्र वेब न्यूज़ पोर्टल “टूटी कलम” संपादक परशुराम पुत्र,माता सरस्वती का उपासक,रावण प्रेमी,कलम का मास्टरमाइंड,लेखक, चिंतक,विचारक,विश्लेषक,कवि व्यंग्यकार, चंद्रकांत (टिल्लू) शर्मा…. पत्रकारिता करना केवल हमारा शौक है,दिनचर्या है,जुनून है, पागलपन है,लिखने का शौक है,आदत है, ना व्यवसाय है ना, पेट भरने का साधन है, ना धमकी चमकी,ना ब्लैकमेलिंग,ना उगाही वसूली,करने का लाइसेंस प्राप्त है, चाटुकारिता,चापलूसी,बुराई,जलनखोरी, से कोसो दूर कलम से वार करना हमारी फितरत है,दूसरों के समाचारों को कॉपी पेस्ट करना, चोरी करना, जिला प्रशासन निगम प्रशासन पुलिस प्रशासन की विज्ञप्तियों को छाप कर पत्रकार कहलाने का शौक नहीं है हमें,और ना ही हम किसी भी समाचार पर प्रश्न वाचक चिन्ह खड़े करते हैं,स्पष्ट,सपाट,खुलकर लिखने को पत्रकारिता कहते हैं .…… टिल्लू शर्मा के
समाचार ज्यों नाविक के तीर
देखन में छोटे लागे घाव करे गंभीर
जहां से लोग सोचना बंद करते हैं
हम वहां से सोचना शुरु करते हैं.
टिल्लू शर्मा
टूटी कलम
न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़
…. रायगढ़ विधायक वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बच्चों के कैरियर बनाने के दिशा में प्रदेश के अलग-अलग स्थान पर नालंदा परिसर का निर्माण करवाया जा रहा है. इस परिसर में बच्चे कोचिंग लेकर यूपीएससी, पीएससी,आईटी, उन सभी विषय का अध्ययन कर सकेंगे जिसके लिए बच्चों को प्रदेश से बाहर भेजा जाता है. इस परिसर में इंजीनियरिंग मेडिकल की पढ़ाई भी की जा सकेगी. कलेक्टर पुलिस अधीक्षक की पढ़ाई करने के लिए बाहर कोचिंग लेने जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. नालंदा परिसर का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के बच्चों को ही नहीं अपितु,उड़ीसा, बंगाल, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों के बच्चों को भी मिल सकेगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस परिसर में कोचिंग देने के लिए टॉप मोस्ट शिक्षक एवं अधिकारी रहेंगे. समय-समय पर आप चौधरी के द्वारा भी बच्चों को भविष्य रचने की गुण बताए जाएंगे.
ओपी चौधरी का जीवन काफी संघर्ष करते हुए बीता है. इनके पिता शिक्षक थे. जिनका साया महज 8 वर्ष की उम्र में ही ओ पी चौधरी के सर से उठ गया था. ओपी चौधरी ने गांव की ही सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर बिलासपुर की कॉलेज में दाखिला लिया था. जिनका मकसद आगे चलकर इंजीनियर बनने का था. मगर आते जाते कलेक्टरो के रुतबे को देखकर. चौधरी के मन में कलेक्टर बनने की जिज्ञासा उत्पन्न हो गई थी. पिता की पेंशन से पढ़ाई जारी रखना और घर चलाना संभव नहीं होने से चौधरी ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ना शुरू कर दिया और अपनी पढ़ाई जारी रखी. चौधरी जब यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे तब उन्हें पुस्तकों की जरूरत हुआ करती थी. जो काफी महंगी होने की वजह से वह खरीदने में असमर्थ होते थे. तब वे अपने सहपाठियों से पुस्तक मांग कर अध्ययन कर लिया करते थे. माता सरस्वती ओ पी चौधरी को अपना आशीर्वाद प्रदान कर दिया था. जिस वजह से उन्होंने पहले ही प्रयास में गोल्ड मेडल के साथ यूपीएससी क्लियर कर लिया. इसके बाद ओ पी चौधरी ने मां कौशल्या देवी के आशीर्वाद से पीछे पलट कर नहीं देखा. चौधरी ने पढ़ाई के दौरान गरीब बच्चों को क्या-क्या परेशानी आती है इसे देखते हुए उनके मन में विचार आया और नालंदा परिसर ने मूर्तरूप ले लिया. नालंदा परिसर की बनावट ऐसी है की जिसे देखकर नहीं पढ़ने वाले बच्चों के मन में पढ़ने की जिज्ञासा उत्पन्न हो जाएगी. आवारा,टपोरी,बेरोजगार,लफंगे घूमने वाले बच्चों का भी ध्यान पढ़ाई की ओर आकर्षित हो जाएगा. धीरे धीरे छत्तीसगढ़ को शिक्षा के हब के रूप में जाना पहचाना जाने लगेगा. बच्चों को पढ़ने के लिए कोटा,नैनीताल, देहरादून,मसूरी,बनारस, दिल्ली, कोलकाता आदि जगह जाने की जरूरत महसूस नहीं होगी. छत्तीसगढ़ एक शिक्षित राज्य के रूप में जाना पहचाना जाने लगेगा. जिसका श्रेय एकमात्र ओ पी चौधरी को मिलेगा. नालंदा परिसर के कारण ओ पी चौधरी का नाम इतिहास में अजर अमर हो जाएगा. सैकड़ो वर्षों के बाद में जब पूछा जाएगा की नालंदा परिसर किसने बनवाया था तब भी ओ पी चौधरी का ही नाम लिया जाएगा. शिक्षा के क्षेत्र में अभी छत्तीसगढ़ का नाम जितना नीचे है.भविष्य में वह उतना ही ऊंचा हो जाएगा.