नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, लोगों की पहली पसंद टूटी कलम समाचार बन चुका है, सरकार एवं जिला प्रशासन का व्यवस्थाओं समस्याओं पर ध्यान आकर्षण करवाना हमारा पहला कर्तव्य है
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इन दिनों दोहरी चुनौतियों से जूझ रही है – एक तरफ संगठन और कार्यकर्ताओं की उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ अफसरशाही की बढ़ती पकड़।
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤न्यूज 🌍 रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🏹 कुछ समय पहले वित्त मंत्री ओपी चौधरी के अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कार्यकर्त्ता के प्रति उदासीन रवैये पर सवाल उठाने वाला पत्र वायरल हुआ था। अब उसी सिलसिले में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने सरकार और संगठन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कंवर ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है और यहां तक कह दिया है कि अगर तीन दिन में तबादला नहीं हुआ तो वे स्वयं जनता के साथ सड़क पर उतरकर धरना देंगे। यानी, एक वरिष्ठ नेता को अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ रही है।
यह घटनाक्रम सिर्फ किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ा संदेश यह निकल रहा है कि भाजपा सरकार और उसके कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की खाई गहराती जा रही है। कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा तेजी से फैल रही है कि सरकार पर जनता से ज्यादा अफसरों की पकड़ है।
प्रश्न यह है कि यदि सत्ता में बैठी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री तक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो आम कार्यकर्ता और सामान्य जनता की सुनेगा कौन?
यह स्थिति भाजपा के लिए केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट का भी संकेत है। क्योंकि अगर “अफसरशाही की हिटलरशाही” का यह दौर यूँ ही जारी रहा तो विपक्ष से पहले जनता और संगठन ही सरकार पर सवाल खड़े कर देंगे। ✍️

