नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, लोगों की पहली पसंद टूटी कलम समाचार बन चुका है, सरकार एवं जिला प्रशासन का व्यवस्थाओं समस्याओं पर ध्यान आकर्षण करवाना हमारा पहला कर्तव्य है
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🌍………………. घटना एक दिन में ही नहीं घटी है छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा के ट्रांसपोर्टों का विवाद लगभग दो माह से चला आ रहा था. तमनार हिंसा कांड से पहले ही छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर हिंसा होने के संकेत मीडिया के द्वारा समय-समय पर दिए जाते रहे थे. पुलिस प्रशासन इसे व्यावसायिक विवाद समझकर कोई कदम नहीं उठाई. यदि पुलिस के द्वारा पहले ही हस्तक्षे किया जाता तो शायद इस घटना को होने से रोका जा सकता था. इसी तरह से एनटीपीसी से फ्लाई ऐश का परिवहन करने वाले उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टर में भी आपसी मन मुटाव बना हुआ है। यदि समय रहते इनके विवाद का पटाक्षेप नहीं किया जाएगा to भविष्य में यहां भी खूनी संघर्ष होने की संभावना बलवती है।
खूनी वारदात का अंदेशा दे दिया था दैनिक केलो प्रवाह अखबार ने.. रायगढ़ जिले के नामचीन अखबार केलो प्रवाह के द्वारा समय-समय पर समाचार के माध्यम से उन्हें संघर्ष होने के संकेत दे दिए थे. समाचार से मालूम हुआ कि किसी सतीश नामक व्यक्ति के द्वारा इस घटना का बीज डाल दिया गया था. सतीश पहले जबल में काम करता था मगर अनेक गड़बड़ियों की वजह से उसे कम से निकाल दिया गया था. इसके बाद उसने कुछ ट्रेलर लेकर कॉल परिवहन का काम शुरू कर दिया था. सतीश के द्वारा एसईसीएल की तीनों खदानें जाम पाली, बरोद , बिजारी में अपना वर्चस्व कायम करना शुरू कर दिया था। सतीश ने 8 से 11 दिसंबर तक तीनों खदानों में किसी भी तरह का काम नहीं करने दिया गया था और उड़ीसा की गाड़ियों को घुसने नहीं दिया गया था। सीसीएल के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद काम शुरू हो पाया था। सतीश उड़ीसा की कोयला खदानों पर भी अपना प्रभुत्व जमाना चाह रहा था। जिस वजह से उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर उससे नाराज चल रहे थे। सतीश रायगढ़ के ट्रांसपोर्टरो को लेकर टपरिया बॉर्डर पहुंच गया था। जहां आपसी व्यावसायिक सहमति नहीं बनने की वजह से घटना घटी।
रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र अंतर्गत टपरिया बॉर्डर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ हुई बर्बर मारपीट, लूट और जान से मारने की धमकी की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 100 से 140 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
मिर्ची स्प्रे, लाठी-डंडे और हथियारों से हमला, कई ट्रांसपोर्टर्स घायल
पुलिस के अनुसार 18 जनवरी 2026 की शाम करीब 5 बजे, उड़ीसा से आए कुछ ट्रांसपोर्टर्स व उनके समर्थकों ने रायगढ़ के वाहन मालिकों और यूनियन सदस्यों पर अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने गाली-गलौज के बाद मिर्ची स्प्रे, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से जानलेवा हमला किया, जिससे कई लोग घायल हो गए।
मारपीट के बीच 15 हजार की लूट, जान से मारने की खुली धमकी
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि मारपीट के दौरान 15,000 रुपये नकद लूट लिए और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद टपरिया बॉर्डर क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज, BNS और आयुध अधिनियम लगाया गया
तमनार थाना पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं 296, 351(3), 115(2), 118(1), 191(2), 191(3), 190, 310(2) तथा आयुध अधिनियम 1959 की धारा 25 और 27 के तहत अपराध दर्ज किया है।
कई नामजद, सहित सैकड़ों अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी में रायगढ़ पुलिस
FIR में घनश्याम उर्फ बंटी डालमिया,गोपाल गोयंका, धीरेंद्र प्रधान, विपिन अग्रवाल, धनी मितो, तेजराम सहित 100 से 140 लोगों को आरोपी बनाया गया है।शिकायत रायगढ़ ट्रांसपोर्ट यूनियन की ओर से दर्ज कराई गई है।पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और गवाहों के बयान के आधार पर पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
ट्रांसपोर्ट कारोबार पर मंडराया खतरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बॉर्डर इलाकों में ट्रांसपोर्ट कारोबार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपोर्टर्स में भारी आक्रोश है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।





