रायगढ़——- पिछले सप्ताह से जिले भर से लूटपाट,हत्या,छेड़छाड़, चोरी,डकैती,छिनतई, बलात्कार के मामलों में काफी तेजी देखी जा रही है। जो कि शहर की शांत फिजा के लिये शुभ संकेत नही है। आज किरोडिमलनगर के स्टेट बैंक के ए टी एम में घटे डकैती,हत्या के लोमहर्षक मामले के दुस्साहस को देखते हुए। आई जी दिपांशु काबरा,केबिनेट मंत्री उमेश पटेल को भी मुआयना करने घटनास्थल पर आना पड़ गया।
एक लुटेरे ने गार्ड को गोली मारी तो दूसरे ने कैश वाहन में बैठे ड्राइवर पर लगभग सर में रिवाल्वर सटाकर गोली मारी। जिसके बाद दोनों लुटेरों ने इत्मीनान से ए टी एम के अंदर से 13 लाख रुपयो से भरा बैग पीठ पर लादा और आराम से मोटरसाइकिल स्टार्ट कर बकायदा यू टर्न लेकर बगैर हड़बड़ी के लोगो को तमंचा दिखलाते न्यूनतम स्पीड के भरे बाजार से फरार हो गये। उनके जाने की स्टाईल से लगता है कि उन्हें पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के चप्पे चप्पे का ज्ञान होगा। हो सकता है वे ज्यादा दूर न जाकर शहर में वापस आ गए हों और आराम से कहीं छिपे बैठ पुलिस कार्रवाई पर नजर रख रहे हों।गोलियों की बौछार पर लोगो की भगदड़ मचना स्वभाविक है परंतु इस तरह से लोगो को गोली मारकर देश की रकम ले जाना और किसी का साहस न दिखलाना भी कायरता की निशानी है। यदि किसी 1 ने भी साहस दिखलाया होता तो लुटेरों का गेम उल्टा पड़ सकता था। लुटेरों का इत्मीनान देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे जैसा सोचकर आये थे। घटना स्थल पर उससे कहीं ज्यादा बेहतर वातावरण मिला होगा। लुटेरो का बाहरी होना गले से नीचे नही उतरने वाला क्योंकि इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने 2 व्यक्ति ही वह भी मोटरसाइकिल पर आना- जाना रात्रिकालीन कर्फ्यू,पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए।संभव नही हो सकता। यदि वे बाहर के होंगे तो उनके स्थानीय सूत्रों से इंकार भी नही किया जा सकता। बरहाल जो भी हो पुलिस के हाँथ बहुत लंबे होते है। कोतरारोड कोतवाल युवराज तिवारी मामले को गम्भीरता से ले रहे है। सीसीटीवी कैमरे में कैद आरोपी बहुत जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे। इसमे कोई शक सुबह नही हो सकती।
अंत मे सबसे बड़ा सवाल की वैन में बैठे ड्राईवर को क्यो खत्म कर दिया गया ? क्या ड्राईवर आरोपियों को पहचानता था ?







