रायगढ़—— नगर पालिका निगम रायगढ़ प्रदेश में स्वच्छता रैकिंग में भले ही टॉप टेन मे जगह बना ले परन्तु धरातल पर उतरकर देखा जाये तो रायगढ़ प्रदेश के 29 जिलों में सबसे फिसड्डी साबित होगा। शहर का ऐसा कौन सा क्षेत्र है,ऐसी कौन से गली है जो चलने लायक बची है,चंहुओर अतिक्रमण,गंदगी का आलम है। न व्यवस्थित सब्जी मंडी है,न व्यवस्थित ठेले आदि लगाये जाते है। फल मार्केट के लिये मरीन ड्राइव में जगह देने के बावजूद सारे फल ठेले सभी चौक चौराहों पर लगे हुए है। सारी सड़के अपनी व्यवस्था पर आंसू बहा रही है। शहर में मूत्रालय की व्यवस्था नगण्य है तो वाहनों के पार्किंग स्थल गांधी गंज मे व्यवसाईयों ने अस्थाई गोदाम बना रखे है। नमक की बोरियाँ सड़क की शोभा बढ़ा रही है। भवन निर्माण सामग्रियों ने आधे मार्ग को अवरुद्ध किया हुआ है।
एम जी रोड पर भगवान लक्ष्मीनारायण का प्राइवेट मंदिर है। जहां की सारी गतिविधिया मालिकों की मर्जी से संचालित होती है। किसी जमाने मे इस मंदिर में खुदे कुँए का मृदु जल आसपास के निवासी बड़े चाव से पीते थे। कुँए के बाहर नगर पालिका का सार्वजनिक नल लगा होता था। जहां से महिलाएं सुबह शाम पानी भरा करती थी। अब निगम प्रशासन की अनदेखी के कारण इस फायदेमंद कुँए को पाट दिया गया है। सार्वजनिक नल गायब हो चुका है। जिसकी जगह अब गंदगी का ढ़ेर लगा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंदिर के मालिक इस कुँए की जगह पर दुकान निर्माण कर मोटी धनराशि सकेलने के गुणा भाग में लगा है। निगम प्रशासन को चाहिये कि उक्त कुँए की सफाई करवाकर,सार्वजनिक नल लगवाकर,सुंदर चबूतरा बनवाये जिससे खोती हुई धरोहर को बचाया जा सके।






