रायगढ़——– कवार नवरात्र,दशहरा त्योहार का माह,मां दुर्गा की आराधना,सात्विक भोजन, सात्विक विचारधारा के दिन और प्याज का मूल्य आसमान पर चढ़ जाना कोई कम आश्चर्य नही है। इन दिनों प्याज,लहसुन का सेवन करना निसिद्ध रहता है। इसके बावजूद प्याज रुला रहा है। जो कहीं न कहीं राज्यो में होने जा रहे विधानसभा चुनावो में केंद्र सरकार का नियंत्रण न रख पाने का आरोप बनकर चुनावी मुद्दा बन सकता है।
इन दिनों भोजनालय, होटल,ढाबे से प्याज नदारद हो गया है। सलाद की प्लेट की खूबसूरती एक बार पुनः मूली और खीरा बढ़ा रहे है। होटलों आदि में खाते समय यदि कोई प्याज मांग बैठता है तो वेटर से लेकर होटल मालिक इस बुरी तरह से घूरने लगते है मानो किसी ने चाकू के दम पर उनकी जायदाद मांग ली हो। ग्राहक बेचारा न चाहते हुए भी खीरा खाने पर मजबूर हो जाता है।प्याज के पैसे अलग से देने पर बोलने पर भी प्याज के दर्शन नही करवाये जाते क्योंकि इससे होटल में बलवा होने की संभावना भी बनी रहती है।
एक अनुमान के अनुसार अभी 80₹ प्रति किलो बिकने वाला प्याज का मूल्य दीपावली तक 150₹प्रति किलो होने की संभावना है। प्याज एक ऐसा कंद है जिसके बगैर भोजन,नाश्ते में जायका नही आता और इसी प्याज के मुद्दे पर पिछले कई विधानसभा, लोकसभा चुनाव लड़े जा चुके है। देश मे किसी भी समानों की कीमतों पर किसी का नियंत्रण नही रह गया है। रेट कंट्रोल विभाग एक जबरिया विभाग है।जिसको न कोई जानता है और न पहचानता है। इस विभाग के अधिकारियो,कर्मचारियों को पगार देना मानो पानी मे रुपये डालना है।






