रायगढ़———– जिले में लकड़ी तस्करी थमने का नाम नही ले रही है किंतु कमी बहुत आई है। जिसका कारण वनमण्डलाधिकारी मनोज पांडेय की टीम है। जिसमे वनपरिक्षेत्राधिकारी राजेश्वर मिश्रा एवं प्रशिक्षु रेंजर लीला पटेल सरीखे धाकड़ अधिकारी शामिल है। जिनकी ताबड़तोड़ कार्यवाही से लकड़ी तस्करों,फर्नीचर वालो,आरा मिलो वालो में बेचैनी देखी जा सकती है। इन लोगो की लगातार कार्यवाही के कारण आरा मिल,फर्नीचर वाले अपनी टी पी,स्टाक पंजी आदि व्यवस्थित करने में लग गये है।
मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कोतवाली थाना प्रभारी “शिवनारायण सिंह” की टीम ने उर्दना के पास 2 पिकप को लकड़ी के इधर से उधर करते पकड़ा था।जांच के बाद 1 वाहन में 350 जग अवैध लकड़ी के चिरान पाये गये थे। जिनकी टी पी जांच करने पर 200 नग चिरान की अनुमति लिखी थी। पिकप वाहन को वनमंडल के सुपुर्द करने पर यह बात सामने आई की 2 अलग अलग वाहनों में 200 एवं 150 नग चिरान शंकर टिम्बर के माध्यम टी पी जारी कर चिरान लोड कर रवाना किया गया था परन्तु एक वाहन में लदे 150 नग चिरान को दूसरे वाहन में अनलोड कर फिर से 150 नग चिरान की अफरा तफरीह करने का षडयंत्र आरा मिल के मालिक ने रचा था।
अगले दिन वनमण्डलाधिकारी मनोज पांडेय के आदेश पर रेंजर राजेश्वर मिश्रा के नेतृत्व में वनमंडल की छापा मार टीम ने मौदहापारा स्थित शंकर टिम्बर पर छापेमारी कर दी। जहां कईं तरह की अनिमियताये सामने आई। वहीं आरा मिल के अंदर लकड़ी के बने अवैध चौखट,दरवाजे,फर्नीचर काफी मात्रा में मिले साथ ही अर्जुन प्रजाति की लकड़ियों के चिरान मिले जिनका कोई वैध दस्तावेज मिल संचालक प्रस्तुत न कर पाया। वहीं चौखट खरीदी का कोई बिल भी प्रस्तुत न कर पाया। अर्जुन लकड़ी के अवैध चिरान ग्रामीणों से खरीदना बतलाया गया। जिसका मौखिक जवाब भी संतोषप्रद न मिलने पर मौके पर उपस्थित वनमंडल के अनुविभागीय अधिकारी ए आर बंजारे के आदेश पर राजेश्वर मिश्रा ने उक्त “शंकर टिम्बर” को सील कर आगे की कार्यवाही की जा रही है। वन विभाग की छापेमारी शैली से अवैध लकड़ी के कारोबारियों, तस्करों,पनाहगारों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग की छापामारी आगे भी जारी रहेगी। अगला नम्बर किसका होगा इस असमंजस में लकड़ी वालो की नींदे हराम हो गई है।बतलाया जा रहा है कि राजेश्वर मिश्रा की टीम को लगातार मिल रही सफलता से लकड़ी तस्करों के आका एवं पूर्व वन अधिकारी पचा नही पा रहे है। वे अपने मुखबिर तंत्र से लकड़ी तस्करों को सचेत एवं कार्यवाही में रुकावट डालने में प्रयासरत रहते है।









