रायगढ़——-15 साल के निरंतर संघर्ष के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस अपने ही लोगो की गुटबाजी के कारण सत्ता से बाहर हो जाएगी। यह हम नही आम जनता बोल रही है। पद के भूखे और बौखलाये कांग्रेसियों के बीच नीचा दिखाने की प्रतिस्पर्धा चल रही है। जिससे कांग्रेस गुटो मे बटी स्पष्ट नजर आ रही है। जिससे आने वाले समय मे आपसी मनमुटाव, मतभेद, मनभेद खुलकर सामने आ सकते है।
स्व.इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के अलग अलग घडो ने अपने अपने तरीके से अलग अलग समय पर श्रध्दांजलि कार्यक्रम आयोजित कर संकेत दे दिया था। वहीं स्व.नंदकुमार पटेल की जयंती पर भी एक घड़े ने कांग्रेस कार्यालय मे तो दूसरे घड़े ने निजी होटल में कार्यक्रम कर आपसी खाई को गहरी कर दिया गया है। जिसके पटने की संभावना क्षीण नजर आ रही है।
शहर में लगे बैनर पोस्टरों में कद्दावर मंत्री की फोटो का न होना भी जमकर वायरल हुआ था। वहीं एल्डरमैन पद पर ताजपोशी न होने की वजह से कई वरिष्ठ कांग्रेसी भी खिन्न होकर एक घड़े का साथ दे रहे है तो दूसरी तरफ मंत्री से दूरी बनाकर रखने वाले कांग्रेसियों के वाहन इन दिनों नंदेली मार्ग पर दौड़ते देखे जा सकते है। एक बार मुख्यमंत्री ने जिले के 2 विधायको के बीच सुलह करवा दी थी परन्तु “अहम सर्वोह्म”का गुरुर आड़े आ रहा है। एक जिला मुख्यालय का विधायक तो दूसरा नंद का नंदन है। जिसे हराने के लिए भाजपा के पास फिलहाल कोई प्रत्याशी नही है।
ऐसा नही है कि जिले में कांग्रेस ही कमजोर एवं गुटबाजी से घिरी है। भाजपा हर मामले में कांग्रेस से आगे चल रही है। भाजपा में तो जितने पदाधिकारी है उतने ही गुट है। जिला भाजपा अध्यक्ष का गुट तो लगभग अलग थलग पड़ गया है। निगम चुनाव,पंचायत चुनाव की हार का ठीकरा भी अध्यक्ष पर फूट चुका है। जिससे उनको विधायकी की टिकट पर पानी फिर गया है। जो कि गिरधर-रोशन की सटीक चाल थी। जिले के पांचों विधायक कांग्रेस के है तो पर भी भाजपा कार्यकर्ता आने वाले समय के विधानसभा चुनावों पर तैयारी न कर अपने व्यवसाय को कांग्रेसी मितरो के साथ आगे बढ़ाने में लगे हुए है। फिलहाल अभी 3 वर्ष बाकी है। देखना यह होगा कि दोनों ही पार्टियों व्याप्त गुटबाजी खत्म होगी या फिर और रंग लायेगी।







