सारंगढ—— कल सारंगढ एस डी ओ पी कार्यालय में पत्रकार के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर पत्रकारो का शिष्टमंडल आज पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहा है। जिसमे सारंगढ एस डी ओ पी के सम्बंध में व्यापक शिकायते होने की आशा बलवती है।
आखिर क्या है मामला —— सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सारंगढ एस डी ओ पी जितेंद्र खूंटे एवं थानेदार आशीष वासनिक के मध्य अच्छा तालमेल नही बैठ पा रहा है। शायद एस डी ओ पी को तेजतर्रार थानेदार वासनिक की सिंघम वाली कार्यशैली कहीं न कहीं खटक रही होगी। वासनिक जिस तरह से ताबड़तोड़ कार्यवाही कर मीडिया की सुर्खियों में रहते है और एस डी ओ पी का नामोनिशान नही रहता। शायद यही वजह हो सकती है पत्रकार से दुर्व्यवहार की, चाहे कोई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, वेब पोर्टल वाला ही क्यो न हो उसपर पत्रकार का ठप्पा लग ही जाता है। जिसका दुरूपयोग भी होता है।
मिली जानकारी के अनुसार एक मामले में बयान लेने के लिए एस डी ओ पी ने पत्रकार भरत अग्रवाल को तलब किया था। जिसमे थानेदार के विरोध में बयान दर्ज करवाने का दबाव डाला जा रहा था परन्तु पत्रकार ने थानेदार के विरोध में बयान देने से इंकार कर दिया था। यही वजह बन गई कि पत्रकार की शान में अश्लील गालियों की लड़ियाँ पिरो कर,पटक पटक कर एवं जूते से मारने की बात कह दी। जिसका वीडियो इस घटनाक्रम का साक्ष्य है।
बतलाया जा रहा है कि पत्रकार को बयान देने के लिए एस डी ओ पी ने बुलवाया था। पत्रकार उनके कार्यालय पहुंचकर कुर्सी पर बैठ गया जो कि एस डी ओ पी को नागवार लगा और मामला पुलिस अधीक्षक तक जा पहुंचा।
अपनी बेज्जती से क्षुब्ध पत्रकार ने आत्महत्या करने तक कि बात कह डाली। अब यह मामला आगे क्या रंग लायेगा यह तो पुलिस अधीक्षक से बैठक के बाद ही सामने आयेगा।
बरहाल पुलिस,प्रशासन, पत्रकार के मध्य विवाद होने पर आम जनता चटकारे लेती है। जिसमे छवि सबकी धूमिल होती है। ऐसे विवाद टाले जा सके इस दिशा में सरकार को कोई ठोस कदम उठाने होंगे। इन दिनों वेब पोर्टल पत्रकार,प्रेस लिखे वाहनों की बाढ़ सी आई हुई है। जिससे मालूम नही चल पाता कि कौन फर्जी है और कौन सही है।









