रायगढ़——- किसानों के समर्थन में भारत बंद का आह्वान सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के द्वारा किया गया था। जिसे सफल बंद नही कहा जा सकता क्योंकि वैसे भी ठंड के इन दिनों बाजार 12 बजे तक पूरा खुलता है।इससे पहले लगभग आधा बंद रहता है।
भारत बंद के आह्वान पर कांग्रेसी भी दोपहर बाद नादारद होकर शायद भारत-आस्ट्रेलिया वन डे मैच का आनंद लेने अपने अपने घरों में दुबक गये। जिससे व्यवसासियों को बल मिला और वे अपने अपने प्रतिष्ठान खोलकर रोज की तरह से व्यवसाय करते दिखे। शहर में आभूषण दुकानों से लेकर सब्जी-भाजी,ठेले,गुमटियां भी खुली नजर आई। पेट्रोल पंप सुबह से खुले रहे,सारे सरकारी दफ्तर खुले रहे,समस्त औद्योगिक इकाइयां कार्यशील रही। तो भला सरकारी बंद के आह्वान को सफल कैसे बोला और माना जा सकता है। दिलचस्प बात तो यह रही कि अपने आप को जन्मजात कांग्रेसी बोलने कहलाने वाले कार्यकर्ताओं, पदाधिकारीयो के प्रतिष्ठान सबसे पहले खुलते नजर आये। जिनकी देखा देखी पूरा बाजार गुलजार हो गया। कांग्रेस कार्यालय के इर्दगिर्द की सभी दुकाने,ठेले आदि व्यवसाय करते नजर आये। जिसे बंद की सफलता कदापि नही कहा जा सकता। शराब,चखना,पानी,डिस्पोजल, मांस मटन की कोई किल्लत न रही। एक बात तो तय है कि हड़ताल,बंद की सफलता भाजपा वालो को ही मिल सकती है। अन्य किसी के बस की बात नही है क्योंकि भाजपा का सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी पार्टी की बात का पालन पूरे मनोयोग से करता है।






