🔴प्रदेश में बढ़ते अपराधों के खिलाफ
महिला मोर्चा करेगी प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन🔴
रायगढ----प्रदेश महिला मोर्चा के निर्देश पर, प्रदेश में बढ़ते अपराधो के विरोध में महिला मोर्चा करेगी प्रदेश व्यापी वृहद धरना प्रदर्शन। इसी कड़ी में 20 फरवरी को जिला महिला मोर्चा के तत्वधान में धरना प्रदर्शन एवं राज्यपाल के नाम से जिला अधिकारी को ज्ञापन देने का कार्यक्रम नियत किया गया है। आज इसी विषय में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष सुषमा खलखो के नेतृत्व में बैठक रखी गई थी। जिसमे सुषमा खलखो ने बैठक को संबोधित करते हुये कहा कि सड़क से सदन तक हल्ला बोल के तहत सत्र के दूसरे सप्ताह में विधानसभा घेराव भी करने का कार्यक्रम भी तय हुआ है। उन्होने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में जबसे कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयी है, दलितों/आदिवासियों समेत समाज के हर वर्ग के खिलाफ संगीन अपराध की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। विभिन्न वर्गो की महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म और अन्याय के मामलो की चिंताजनक वृद्धि पर कांग्रेस सरकार न केवल पूरी तरह मौन है बल्कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री तक इसे ’छोटा अपराध’ कहने से नही हिचकते। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के रुप में प्रसिद्ध कोरवा जनजाति की नाबालिग बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और पिता एवं भाई के समेत उनकी नृशंश हत्या ने, इस तिहरे हत्याकांड ने तो प्रदेश को झकझोर कर ही रख दिया है। लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसा ही एक अमानवीय और घृणित मामला जशपुर से सामने आया है जहॉ अंचल की बेटी को छः बार अलग-अलग लोगों के हाथो बेची गयी थी और आज सातवीं बार में उसने आत्महत्या कर ली। छत्तीसगढ़ देश में मानव तस्करी का एक केन्द्र बनता जा रहा है। इस संबंध में पीड़िता के पिता ने पुलिस थाने में 6 माह पूर्व शिकायत की थी। इस सबके बाद भी पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया। ऐसे अनेक मामलों में तो कांग्रेस के नेताओ या कांग्रेस समर्थित/सरंक्षित लोगो की संलिप्तता भी लगातार सामने आ रही है। एक नाबालिग आदिवासी बेटी की बलात्कार के मामले में कांग्रेस नेता का शामिल होना, सरकार संरक्षित माफिया द्वारा धमतरी में आदिवासी जन-प्रतिनिधी की बर्बरता पूर्वक पिटाई समेत अनेक घटनाओं की जानकारी आपको मिली ही होगी। आदिवासी-दलित वर्ग के लोगो, खासकर महिलाओं के साथ हो रही और हुई ऐसी हजारों घटनाओ ने प्रदेश का मस्तक शर्म से झुका दिया है। दुखद एवं दुर्भाग्यजनक बात यह है कि ऐसी घटनाओं को रोकने की बात तो दूर, प्रदेश शासन जिस पर कानून व्यवस्था को बनाये रखने की जिम्मेदारी है, उसके प्रतिनिधि कैबिनेट मंत्री शिव डहरिया ऐसी लोमहर्षक घटना को ’छोटा अपराध’ कहते है। मंत्री के बयान से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी असहमति नहीं जताकर साफ-साफ इस भावना को समर्थन दिया है। सस्ती राजनीति के लिये अन्य प्रदेशो की घटनाओं पर मुखर रहने वाले सीएम का अपने ही प्रदेश की इन तमाम घृणित घटनाओं पर मौन रहना वास्तव में उन्हें भी अपराध समर्थक बनाती है। कुछ दिनों पहले ही एक दर्दनाक घटना बस्तर के केशकाल से सामने आई है। वहां दुष्कर्म की शिकार नाबालिग आदिवासी किशोरी न केवल 7-7 दोषियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई बल्कि कहीं से न्याय नहीं मिलने पर उसने आत्महत्या भी कर ली। फिर भी मामले को दबाने की भरसक कोशिश की गयी। अंत में किशोरी के पिता ने भी आत्महत्या की कोशिश की, तब मामला बाहर आ पाया है। मामले में पुलिसकर्मियां द्वारा रिष्वत लेने समेत अन्यों द्वारा चावल आदि की रिष्वत लेकर घटना को दबा देने की खबर सामने आ रही है। इससे पहले प्रदेश के धरमजयगढ़ में कांग्रेस नेता और पूर्व जनपद सदस्य, कोल माफिया अमृत तिर्की द्वारा किये दुष्कर्म की बात हो, सुकमा, रायगढ़, बलरामपुर, कवर्धा, रायपुर, धमतरी आदि की नृशंस घटना हो। किसी भी मामले में शासन के किसी जिम्मेदार व्यक्ति के कान पर जूं नहीं रेंगी है। बलरापुर की रोंगटे खड़े करने वाली खबर यह कि वहॉ 9 माह के भीतर 104 ऐसे केस सामने आये हैं जिनमें 79 तो केवल नाबालिगो के खिलाफ दुष्कर्म हुये है। इसी तरह बिलासपुर में पुलिस विभाग के आंकड़ो के अनुसार 1 जनवरी से 30 अक्टूबर तक जिले के 20 थाना क्षेत्रों में 6 हजार से अधिक अपराध दर्ज किये गये है। इनमें हत्या, चोरी, बलात्कार, मारपीट सहित अन्य माइनर एक्ट् के अपराध भी शामिल है। लगातार ऐसी घटनायें होना और उसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखाने के पीछे सरकार का यह अलिखित आदेश लगता है कि ऐसी घटनायें दर्ज न किये जाये। ऐसा इसलिये क्योंकि राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आकड़े में प्रदेश में अपराधों की संख्या में लगातार वृद्धि का खुलासा हो रहा है। ऐसे में अपराध कम करने और दोषियों के खिलाफ कारवाई करने से अधिक ध्यान सरकार का मामले को छिपाने पर है, यह स्पष्ट दिख रहा है। बावजूद इसके दर्ज हुये अपराधों के आंकड़े भी भयावह है। सदन में सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य मे 1 जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2020 तक डकैती, लूट, हत्या, बलात्कार और अन्य अपराधों के 17,009 मामले सामने आये है। इस दौरान यहां केवल बलात्कार के ही 25,75 मामले प्रकाश में आयें है यानि दुष्कर्म की लगभग 7 घटनायें रोज सामने आ रही है। कई घटनाओं की तो रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हो पाती है, उसका तो सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है। एक नवीनतम आंकड़े के अनुसार पिछले दो वर्ष में 5347 बलात्कार और 4038 अपहरण के मामले सामने आयें है। यहां फिर यह दुहराना होगा कि ये आंकड़े तो वे है जो दर्ज हुये है। जिन वारदातों को प्रदेश भर में दर्ज ही नहीं किया जाता है, उसकी तो सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। एक आंकड़े के मुताबित हर तीसरे घंटे में अनाचार का एक मामला दर्ज किया जा रहा है। हमेशा से शांति का द्वीप कहा जाने वाला हमारा छत्तीसगढ़ अब अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। आज की बैठक में प्रमुखरुप से पूर्व विधायक केराबाई मनहर,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महिला मोर्चा शिला तिवारी, जिला पंचायत सदस्य गोपिका गुप्ता, नेता प्रतिपक्ष पुनम सोलंकी, जिला कार्यसमिति सदस्य लक्ष्मी पटेल, जिला महामंत्री शोभा शर्मा, सविता उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष द्वय दुर्गा देवांगन, त्रिवेणी डहरे, खरसिया मंडल अध्यक्ष सरिता सहिस, कार्यालय मंत्री भगवती कहार, जिला उपाध्यक्ष सुशीला चौहान, कार्यकर्ता लक्ष्मी विश्वास, सहोद्रा राठिया जिला पंचायत सदस्य, रिता निषाद, सरिता चौहान, रेखा निषाद, शकुंतला रतेरिया, बीना चौहथा, यशवंती पंडा, सरिता चौहान, सरोज निर्मलकर उपस्थित रहे।







