🔴 टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम 🎤 न्यूज़ रायगढ़ 🌍 छत्तीसगढ़ ✈️ श्रीमती कुसुम जैन पत्नी – रजनीकांत जैन का 3 अगस्त को सायं 5:35 बजे दुःखद देहावसान हो गया। शोक की इस घड़ी में परिवारजनों ने अत्यंत संवेदनशील एवं अनुकरणीय निर्णय लेते हुए उनका नेत्रदान कर मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
कुसुम जैन के नेत्रदान से अब नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी का संचार होगा। यह केवल एक दान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सर्वोच्च सेवा और करुणा का प्रतीक है। उनका यह निर्णय समाज को यह प्रेरणा देता है कि मरणोपरांत भी हम किसी के जीवन में प्रकाश बन सकते हैं। यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें, तो हजारों लोगों के अंधकारमय जीवन में उजाला लाया जा सकता है। नेत्रदान वास्तव में महादान है, जो जीवन समाप्त होने के बाद भी किसी के जीवन को नई दिशा और नई आशा प्रदान करता है।
इस नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया मेडिकल कॉलेज की डॉ. शेफाली अग्रवाल एवं उनकी टीम की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस पुनीत कार्य में देवकी रामधारी फाउंडेशन से दीपक अग्रवाल (डोरा) प्रज्वल अग्रवाल एवं आशीष अग्रवाल की विशेष उपस्थिति एवं सहयोग रहा। साथ ही मारवाड़ी युवा मंच के साथीगण भी इस प्रेरणादायी कार्य के साक्षी बने एवं अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
दिवंगत कुसुम जैन अपने पीछे पति रजनीकांत जैन, पुत्र रजत जैन, मनीष जैन एवं श्री तनय जैन सहित भरापूरा परिवार छोड़ गई हैं।
कुसुम जैन का यह महान निर्णय समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा तथा नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
“मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन नेत्रदान किसी और के जीवन में नई सुबह की शुरुआत बन सकता है।







