🔴15 वर्षो से जमे 2 बार स्थानांतरण होने के बाद भी पुनः यहीं क्यो जमे रहना चाहते है कार्यपालन अभियंता🔴पेटी के लेनदेन से चल रहा है पूरा कार्यालय🔴
रायगढ़——छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से शुरू होकर सक्ति, खरसिया,रायगढ़,कनकतुरा,बेलपहार, झारसुगुड़ा, राउरकेला से झारखण्ड,कोलकाता तक नेशनल हाईवे 49 है। जिसकी दुर्दशा एवं हुए व्यापक भ्र्ष्टाचार की पोल रायगढ़ जिले की शुरुआत होकर जिले के अंतिम छोर तक देखने को सहज उपलब्ध है। अमलिभौना से खरसिया तक जो सड़क बनाई गई थी। उसके बीचो बीच लगे हाईटेंशन विद्युत टावरों को बगैर किनारे किये बना डाली गई थी। जिसे कलेक्टर भीम की सख्त नाराजगी की वजह से हटाए गए परन्तु अभी भी 1,2 टावरों को हटाने का कार्य शेष रह गया है। एक कार्य को दुबारा करने का अर्थ सीधे सीधे भ्र्ष्टाचार की कहानी कहता है। वहीं सड़क निर्माण की वजह से मुआवजा दिलवाने की ख़ातिर कार्यपालन अभियंता ने सीधी बनने वाली सड़क को अपने चहेतों को खरीदवा दिया साथ ही इस सड़क के किनारे भी चहेते ठेकेदार को जमीन खरीदवा कर उपकृत किया गया।
बतलाया जा रहा है कि रायगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यपालन अभियंता पिछले 14,15 वर्षो से रायगढ़ में ही डटे हुए है। जिनका पूर्व में तबादला हो चुका था परन्तु एन एच 49 के बनने से होने वाली करोड़ो की कमाई का लालच लिए पुनःअपनी पदस्थापना रायगढ़ में करवा लिए। इस कार्यपालन अभियंता का चहेता ठेकेदार बहुत बड़ा वाला बतमीज व्यक्ति है। जो अपनी बतमीजी की वजह से करोड़पति होंने के बावजूद कहीं न कहीं किसी न किसी से मुक्के,थप्पड़,लात खाता रहता है। गाली खाना तो उसकी दिनचर्या में शामिल हो चुकी है।
कलेक्टर भीम सिंह के कड़े रुख की वजह से विद्युत टावरों को हटाने का कार्य लगभग हो चुका है और चल भी रहा है। दूसरी ओर गढ़उमरिया मार्ग मनमाने तरीके से बनाने पर भी कलेक्टर ने सुधार करने के आदेश दिए थे। जिसे भी ठेकेदार ने जगह जगह अपनी मनमानी कर दी। परिणाम स्वरूप यह डगर हादसों की डगर बनकर रह गई है। पिछले दिनों उधड़ी सड़क के कारण अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन स्कूटी से जा रहे दम्पति की स्कूटी सड़क के बीचों बीच गढ्ढे से उछल गई। जिस वजह से स्कूटी सवार एक महिला और उसके 3 वर्ष के शिशु को पीछे से आ रही ट्रक ने रौद दिया। जिनकी घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई थी। जबकि स्कूटी चला रही युवती छिटककर दूर फेंका जाने की वहज से गम्भीर रूप से चोटिल हुई थी। इस घटना में हुए मृतकों को तत्काल शासकीय मदद दे दी गई थी।
कलेक्टर भीम सिंह ने संज्ञान लेते हुए कार्यपालन अभियंता एवं ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दे दिए। जबकि कलेक्टर की अवमानना का मामला भी बन रहा है। केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत होकर राज्य सरकार के पास आती है। राज्य सरकार से स्वीकृत होकर राशि विभाग के पास आती है। जो ठेकेदार के पास आती है और पेटी कांट्रेक्टरो के मध्य बट जाती है। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि केंद्र से मिला 1 रुपया रायगढ़ आते तक 25 पैसे में तब्दील हो जाता है और वह 25 पैसे अधिकारियों में 15 पैसे बट कर 10 पैसा रह जाता है। जिसमे से ठेकेदार 8 पैसा रखकर 2 पैसा पेटी कांट्रेक्टरो को दे देता है। जिस वजह से सड़के थूक पालिस कर बना दी जाती है। सड़क के बीच न डिवाइडर बनाये गए है न कोई संकेतक बोर्ड लगाए गए है और न ही सड़क पर मार्किंग की गई है न यात्री प्रतीक्षालय बनाये गए है। यह दृश्य केवल रायगढ़ जिले से गुजरने वाली एन एच 49 पर ही देखने को मिलेगा। रायगढ़ जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ओड़िसा की सीमा में घुसते ही एहसास होने लगता है कि हम समृद्धशाली भारत के नागरिक है।
सरेआम हो रहा एन एच मार्ग का दुरुपयोग,फ्लाईएश डंपिंग से बढ़ रहा प्रदूषण वैसे तो नियमतः नेशनल हाईवे के किनारे कुछ कार्य नही किया जाना चाहिए परन्तु खुली आँखों से देखा जा सकता है कि इस मार्ग के दोनों तरफ कथित ट्रांसपोर्टर द्वारा मंत्री एवं विधायक के नाम का इस्तेमाल कर रुआब झाड़ा जाता है और इन जनप्रतिनिधियों की आंखों में धूल झोंककर अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है। विधायक के पड़ोसी होने वाला उक्त ट्रांसपोर्टर विशुद्ध रूप से भाजपा समर्थित है। ग्रामीण क्षेत्र से आकर शहरी रूप में ढल चुका उक्त व्यवसाई सत्ता बदलते ही अपना पाला बदलने में सिद्धस्त हो चुका है। दूसरी ओर सड़क ठेकेदार कई किलोमीटर के क्षेत्र में आधे नेशनल हाइवे अमलिभौना, कोसमनारा पर ही माइल स्टोन पत्थरो का निर्माण करता आ रहा है। जिससे सड़क की चौड़ाई 100 फिट से सिमटकर 60 हो गई है। जिसका कारण ठेकेदार को कार्यपालन अभियंता का कृपापात्र होना बतलाया जा रहा है।







