रायगढ़——-व्यपारियो के चुनाव के नजदीक आते आते व्यापारी एकता पैनल ने सधी हुई रणनीति के साथ अपना चुनाव प्रचार तेज कर दिया। जिससे व्यवसाइयों के दिमाग मे “सुशील और शक्ति” की छवि की छाप पड़ गई। पिछले माह से चुनवी सरगर्मियां शुरू करने वाले जय व्यापार पैनल का प्रचार बासी बन गया। रायगढ़ के दोनों युवाओ को भला कौन नही जानता। इनके मधुर स्वभाव,मीठी वाणी,उदारशीलता से हर समाज एवं जाति, धर्म के लोग काफी प्रभावित हो चुके है। मनुष्य को मनुष्य समझना एवं असहाय लोगो की मदद करना,समाजसेवा में अग्रणी बनकर अपना फर्ज निभाने का एक फितूर सा समाहित रहता है। इन दोनों युवाओ “सुशील एवं शक्ति” में,सभी राजनीतिक दलों से इनके प्रगाढ़ सम्बन्ध बने हुए है। “सुशील और शक्ति” को पूरे जिले में यूथ आईकन के रूप में पहचाना जाता है।
कोरोनकाल के समय मे जब सब अपने अपने घरों में दुबके पड़े थे तब कमजोर वर्गों के मध्य “रामदास द्रोपती देवी” फाउंडेशन ने राशन,सब्जी,तेल,मसाले आदि के हजारों थैले तैयार कर लोगो के घर घर पहुंचकर मदद की थी। शहर में होने वाले हर समाज के धार्मिक,सांस्कृतिक, रचनात्मक कार्यो में रामदास जी के परिवार की तरफ से कुछ न कुछ सहायता अवश्य प्रदान की जाती रहती है। रायगढ़,खरसिया,सारंगढ़,धरमजयगढ़, पुसौर,बरमकेला,सरिया,सारंगढ़,तमनार घरघोड़ा के व्यवसायी एक तरफा वोटिंग कर इन दोनों युवाओ को और आगे बढ़ने का अवसर सुनिश्चित रूप प्रदान करेंगे। “शक्ति अग्रवाल” देश की नामी गिरामी डी पी एस स्कूल रायगढ़ के डायरेक्टर है। “शक्ति” शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगा कर भावी पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल करने का कार्य कर रहे है। स्कूल,कालेज के माध्यम से युवाओ को रोजगार करने लायक बना रहे है।
*पैसा कमाना मुश्किल नही है मगर उसको सही ढंग से उपयोग करना एक कला है* पैसे कमाने के बाद या पैतृक धन मिल जाने के कुछ लोगो के पैर धरती पर नही टिकते और वे इंसान को इंसान नही समझते,अपने आगे सबको असहाय समझकर अपनी गर्दन ऊंची करने की कोशिश करते है परन्तु समय ऐसे लोगो की गर्दन सबके आगे झुकाने को मजबूर कर देता है। शहर में लॉक डाउन के दौरान “शक्ति” ने सैकड़ो चावल की बोरियां खरीदकर 10,10 किलो के थैले भरवाकर शहर के स्लम वार्डो में घर घर तक अपने परिचित मीडिया के माध्यम से भिजवाये थे।
“सुशील शक्ति” के प्रचार ने विपक्ष की नींदे उड़ा दी है। जिससे बौखलाकर विपक्ष अपूर्ण होने वाली घोषणाओं का सहारा लेने लगा है। चेम्बर भवन की घोषणा कर प्रभाव जमाना चाह रहा है। इसके विपरीत “सुशील और शक्ति” व्यवसाइयों के हितों के लिए संघर्ष करने की बात कर रहे है। चेम्बर भवन के लिए इन दोनों के पास भवनों की कमी नही है जबकि जय व्यपार पैनल सरकारी जमीन जुगाड़ करने की फिराक में है।
सामान्य दिनों में भी अन्य लोगो के तुलनात्मक इन दोनों युवाओ से मुलाकात करने पर भी इनका व्यवहार,बातचीत,अपनत्व,मधुरता में फर्क महसूस नही किया जा सकता ।







