रायगढ़—-सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के गजमार पहाड़ पर पिछले 4 दिनों से दानावल ने कोहराम मचाया हुआ है। जिससे वन्य जीव जंतुओं का जीना खाना हराम हो गया है। बतलाया जा रहा है कि लगभग 1 किलोमीटर की परिधि में ज्वाला धधक रही है। जिसको बुझाने की दिशा में वन विभाग कोई कार्यवाही न कर 10 लाख रुपये की बंदरबांट कर ली गई है।
गर्मियों के दिनों में बांस की आपस मे रगड़ के परिणाम स्वरूप लगी आग को दानावल कहा जाता है परन्तु तापमान में इतनी वृद्धि नही हुई है कि अपने आप भीषण आग लग सके। जानकारों का मानना है कि विभाग के लोग ही जानबूझ कर आग लगवाते है ताकि पेड़ो,बांसों की अवैध कटाई के सबूत मिटाये जा सके और आरोप महुआ बीनने वालो पर मढ़ा जा सके।
रात के समय दानावल बड़ा ही खूबसूरत दिखता है परन्तु इस आग से बचकर भागते वन्य प्राणी किसी को नही दिखते। मेडिकल कालेज के पीछे पहाड़ पर आग फैली हुई है बतलाया जा रहा है कि आग से बचने के लिए भालू,सर्प,बंदर आदि यदि मेडिकल कालेज में घुस जाएंगे तो आरोप किस पर लगाया जायेगा।
कुछ सवाल सक्षम अदिकारियो से 4 दिनो से लगातार खैरपुर पहाड़ का जंगल जलता रहा,कोई कर्मचारी क्यो नही पहुचा आग बुझाने साहब ?
गजमार में बारबार दावानल लग रहा है ? अब तक तो न महुआ फूल आया है और न ही तेंदूपत्ता झड़ना शुरू हुआ है ?
क्या इसी साल तेंदूपत्ता महुआ फूल के लिये दावानल हो रहा है ?
दावानल से जंगल जीवजंतु बचाने के लिये क्या प्रयास किये गये है वह विभाग की तरफ से ?
क्या वनप्रबन्धन समिति की बैठक डिवीजन स्तर पर या रेंज स्तर पर या सर्किल स्तर पर या बीट स्तर पर आयोजित की गई ?
अब तक रेंज वाइज कितने हेक्टेयर जंगल जल चुके है ?
अब तक कितने हेक्टेयर जंगल जलने के पी ओ आर किया गया,क्या कार्यवाही की गई है ?
पी ओ आर न करते हुए अपराध छुपाने का अपराध क्यों किया जा रहा है ?
अग्नि सुरक्षा के लिये कितना फंड आया ? कितना रिलीज किया गया,मौके पर क्या अग्नि सुरक्षा का कार्य किया गया है?






