🔴जवानों की शहादत पर राजनीति कीचड़ वार शुरू हुआ🔴 मुख्यमंत्री बघेल असम चुनाव में ही मशगूल— रमन सिंह🔴 हम शक्ति से मिलकर मुकाबला करेंगे—-अमित शाह🔴 जवानों की शहादत बेकार नही जायेगी—भूपेश बघेल🔴
टूटी कलम — नक्सली हमले में मारे गए जवानों को लेकर पक्ष-विपक्ष में मौखिक वार शुरू हो चुका है। बजाये नक्सलियों को थोक में निपटाने की कार्य योजना के राजनीति आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। जिस किसी का बेटा,भाई,पति शहीद हुआ है उनसे पूछो की गम क्या होता है ? अपनी जान की परवाह किये बगैर ये जवान भूखे,प्यासे घर से दूर बियावान जंगलो में जनता की सुरक्षा के लिए दिन रात सर्चिंग करते है और अपने ही किसी भेदिये की बिभीषण पंती के कारण काल के गाल में समा जाते है। नक्सलियों के पास आखिर अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा पहुंचता कैसे है ? बगैर राजनीति,सरकारी संरक्षण के कोई भी वाद सर नही उठा सकता। देश की सेना को सबसे शक्तिशाली माना जाता है तो क्यो नही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को सेना के हवाले कर दिया जाता। अत्याधुनिक “राफेल” क्या शो पीस बनाने के लिए खरीदे गए है। सरकार को पहले अपने घर मे छिपे अलगाववादी ताकतों से निपटना होगा। तब कहीं जाकर पाकिस्तान,चीन,श्रीलंका से निपटने के विषय मे सोचा मात्र जा सकता है।
जवानों से ज्यादा तेज निकले नक्सली जो मुठभेड़ के बाद अपने घायल एवं मृत नक्सली साथियों के शव ले भागे और साथ ही शहीद जवानों के हथियार,जूते, वर्दी तक ले भागे जबकि शहीद जवानों की निश्चित संख्या अब तक जीतने मुंह उतनी सामने आ रही है। बतलाया जा रहा है कि नक्सलियों की संख्या लगभग 1500 रही थी। अब इतने बड़ा नक्सली समूह घटना को अंजाम देने घूम रहे थे तो इसकी जानकारी क्यो नही लग पाई ? क्या कर रही है गुप्तर एजेंसियां ? नक्सलियों ने हमला करने की पहले ही सूचना प्रसारित कर दी गई थी बतलाया जा रहा है।
सरकार शहीद एवं घायल जवानों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान कर अपना पल्ला झाड़ लेगी और विपक्ष मुंह पर काली पट्टी बांधकर,चौक चौराहों में दिया, मोमबत्ती जलाकर इतिश्री कर अपना कर्तव्य निभाने की रस्म अदायगी कर लेगा परन्तु जो शहीद हुए है उनके खून का बदला कैसे चुकाया जायेगा।






