स्व.सेठ किरोड़ीमल जी की आत्मा भी कराहती होगी रायगढ़ का हश्र देखकर
टूटी कलम रायगढ़—- स्व.सेठ किरोड़ीमल जी ने जीते जी कभी न सोचा होगा कि उनके द्वारा बनाये गए अस्पतालों,कालजो,मंदिरों, धर्मशाला,कालोनी आदि के इतने बुरे दिन धर्मादा ट्रस्ट के ट्रस्टी ला देंगे की उनकी धरोहर जीर्ण शीर्ण होकर बिकने शासन के अधीन होकर उनके मुंशियों,मुनीमों के स्तर के लोगो की सहायता के लिए तरसने लगेगी। टूटी कलम समाचार

स्व.सेठ किरोड़ीमल जी के द्वारा बनाई गई धरोहरों को आज भी यदि रायगढ़ से हटा दिया जाये तो रायगढ़ जिला संसाधनों की कमी से जूझने लगेगा। टूटी कलम समाचार



स्व.सेठ किरोड़ी मल धर्मादा ट्रस्ट बन गया लूट खसोट का ट्रस्ट—सेठ किरोड़ीमल जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात गठित धर्मादा ट्रस्ट में लूट खसोट,बेचो खाओ की स्थिति निर्मित हो गई। जो जिस इकाई के पदाधिकारी थे। वह उन्ही के अधीन रह गई। परिणाम स्वरूप किरोड़ीमल जी द्वारा निर्मित धरोहरें से लगभग उनका नाम मिट चुका है और दिन दुगुनी रात चौगुनी गति से मिटाने के प्रयास चल रहे है। टूटी कलम समाचार

क्या सेठ किरोड़ीमल जी के जन्म दिन-पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद कर श्रध्दांजलि नही देना चाहिए ?—- दानवीर,रायगढ़ के शिल्पी,हर तबके की मदद के लिए धरोहरों का निर्माण करवाने वाले स्व.किरोड़ीमल के जन्म उत्सव पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित नही किये जाने चाहिए ? क्या उनकी पुण्यतिथि पर दरिद्रनारायण भोज,वृद्धा आश्रम,अस्पताल,अनाथालय,अस्पतालों,कुष्ठ आश्रम, आदि स्थानों पर फल,मिठाई,कपड़े राशन आदि नही बांटे जाने चाहिए ? क्या किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की माली हालत इतनी खराब हो चुकी कि अरबो-खरबो रुपयों की सम्पतियो को दान देने वाले महामानव के लिये कुछ लाख रुपये भी खर्च करने में असमर्थ हो गया है ? अगर हां बोले तो शहर में दानवीरों की कमी नही है कि स्व.सेठ किरोड़ीमल जी के नाम से किये जाने वाले कार्यक्रमो में सहयोग करने से पीछे हट जाएंगे। छोटे छोटे दुकानदारो,ठेले,गुमटियों,दिहाड़ी मजदूरो से भी मदद मांगने पर वे भी दिल खोलकर आर्थिक मदद करने में आगे आ जायेंगे। टूटी कलम समाचार

आज जिस भूमि पर शहर के गलैक्सि मॉल, ग्रैंड मॉल सीना ठोक कर खड़े है। वह जमीन सामने की सड़क से लेकर भीतर तक धर्मादा ट्रस्ट की ही थी। जिन्हें ट्रस्टियों ने कब बेच डाला यह भी घोर आश्चर्य से कम नही है। इसी तरह कभी कालोनियों की तर्ज पर एक जैसे बने आशियाने उजाड़कर बड़ी बड़ी इमारतें तान दी गई है। यह सब किसकी सहमति से हुआ एक अनुत्तरित प्रश्न है। बूजी भवन जैसी विशाल धर्मशाला पर आज किसी फर्नीचर शो रूम वाले का कब्जा हो चुका है। जो शायद प्रशासनिक हस्तक्षेप पर ही खाली करवाया जा सकता है। टूटी कलम समाचार

कई ऐसे स्थान है जिन्हें कोई शायद ही जानता हो जिन्हें स्व.सेठ किरोड़ीमल जी ने बनवाये थे। आज वे विलुप्त हो चुके है या फिर अतिक्रमण होकर बिक चुके है। जैसे कि दांतव्य औषधालय, भरतकूप शिवालय,आदि छोटे छोटे न जाने कितने उत्कर्म होंगे जिनकी कोई ज्ञान गिनती नही है। किरोड़ीमल नगर के नाम से रेल्वे स्टेशन कोई यूँ ही रेल मंत्रालय ने नही बना दिया था। टूटी कलम समाचार
तालाबंद सेठ किरोड़ीमल जी की गद्दी के कारण से ही गद्दी चौक का नामकरण हुआ था। उस गद्दी की हालत देखकर भावुक इंसान द्रवित जरूर हो सकता है। सेठ जी वाकई राष्ट्रीय स्तर के सेठ थे। जिन्होंने हरियाणा,राजस्थान,दिल्ली,कोलकाता में भी अनेक धरोहरों का निर्माण जनकल्याण के लिए करवाया था।फिल्मी दुनिया मे भी उनके नाम का गाना बन चुका है एवं किसी पर व्यंगबाण चलाने के लिए तकिया कलाम भी है कि ज्यादा किरोड़ीमल बनने की कोशिश न करे। टूटी कलम समाचार
यदि किसी दानवीर की जिज्ञासा दान कर सेठ किरोड़ीमल जी की धरोहरों का जीर्णोद्धार करवाने जाग गई हो तो अवश्य करे। मगर दान की आड़ में स्वयं का स्वार्थ साधने की कोशिश न करे। ऐसा न हो कि 10 कमरे बनवाने के बाद उन कमरों की चाबी लेने के लिए मरीज के परिजनों को ढिमरापुर की तरफ भागना पड़े और मिन्नते करनी पड़े। सी एस आर मद की राशि को सेठ किरोड़ीमल चौक से खरसिया मार्ग की सड़क पर खर्च कर सड़क बेहतर बनवाई जाये तो जनकल्याण भी होगा। चौक पर लगी सेठ किरोड़ीमल जी की आदमकद प्रतिमा को साफ सफाई करवाकर चौक सुसज्जित कर फौव्वारे,लाईटिंग करवाने से उनकी आत्मा भी आशीर्वाद देगी। टूटी कलम समाचार





