🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ सूत्रों के हवाले से बहुत ही दिलचस्प एवं शर्मिंदा कर देने लायक खबर निकलकर आई है कि कल किसी के सातवें जन्म उत्सव पर पत्रकारों को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया गया था। पत्रकारों को भोज के समय ही मेजबान ने भोजन पर आने का आमंत्रण दिया था। जिसके बाद भी पत्रकारों की संख्या आमंत्रित किए गए पत्रकारों से दुगुनी हो चली थी। जिसका कारण यह बताया जा रहा है कि एक ही बैनर के चार चार लोग जा धमके थे। भारी भरकम संख्या को देखकर प्रबंधन के पसीने छूट गए और उनके द्वारा यह फैसला लिया गया कि पत्रकारों को गेट पर रोक कर ही परिचय लिया जाए उसके पश्चात अंदर प्रवेश दिया जाए। यह देख कर एक अखबार के संपादक ने कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज की तब कहीं जाकर लोगों को बिना परिचय के प्रवेश दिया गया। बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने उन्हीं लोगों को आमंत्रित किया था जो उनके प्रतिष्ठान की महिमामंडित साल भर करते रह सकें। जिसकी आड़ में वे कई तरह के वैद्य अवैद्य कार्यों को संपादित कर सके एवं आजू बाजू की नजूल भूमि को भी हड़प सके। किसी भी प्रेस वार्ता में सर्वप्रथम कुर्सी पर सा सम्मान बिठाया जाता है उसके बाद बारी-बारी से सब का परिचय जाना जाता है किंतु इस जगह पर अनोखा ही रूप देखने को मिला कि पहले परिचय फिर प्रवेश यदि आमंत्रित ना हो तो गो बैक। जिसकी शिकायत चार चार लोगों को एक साथ ले जाने वाले ने अखबार के संपादक से की तब उन्होंने अपनी आक्रामकता दिखलाइए जिसके पश्चात सब को प्रवेश दे दिया गया। हुआ यूं कि जिन पत्रकारो को आमंत्रित किया गया था वे अपने अन्य साथियों को भी साथ चलने का निमंत्रण दे दिये। जबकि प्रबंधन ने उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया था। बहुत से पत्रकार शहर से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। जो बड़ी जगह जाने की खुशी में पूरे गांव को बतला कर घर वालों के सामने अपने पत्रकार होने की अकड़ दिखला कर बेचारे नए कपड़े पहन कर पेट्रोल खर्च करते हुए मोटरसाइकिल के माध्यम से पहुंचे थे। परंतु बाद में उन्होंने महसूस किया कि “खोदा पहाड़ तो निकली चुहिया” बताया जा रहा है कि पुरुष पत्रकारों के अतिरिक्त महिला पत्रकार भी भोज पर गई थी जहां पर कम मात्रा में नपी तुली मात्रा में वाइन के पैक का भी इंतजाम किया गया था। जिस वजह से महिला पत्रकारों को काफी असहजता महसूस हुई थी। प्रेस वार्ता के दौरान तीन कैटेगरी में उपहार दिए जाने बतलाए जा रहे हैं चुनिंदा लोगों को ₹200 की कीमत का लैपटॉप का कवर दिया गया। जिसके बाद अधिकांश लोगों को दूध पीने का कप दिया गया एवं तीसरी केटेगरी में डायरी एवं पेन दी गई। जो पाने वाले की किसी काम के नहीं है क्योंकि अभी के समय में कागज पेन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है अपितु दूसरे के समाचारों को कॉपी पेस्ट कर या फिर मोबाइल से वॉइस टाइपिंग का सहारा लेकर टूटे-फूटे शब्दों में समाचार बनाकर अपने के पत्रकारिता के क्षेत्र में मौजूद रहने का प्रयास किया जाता है।





