🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़… भाजपा की प्रदेश राजनीति में आदिवासी नेता के रूप में रवि भगत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. भाजयुमो के राष्ट्रीय महामंत्री रवि भगत को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौप कर यह एहसास करवा दिया कि आने वाले समय में रवि भगत की तूती पूरे प्रदेश में बोलेगी। इनकी शालीनता और आक्रामकता दोनों ही देखने लायक होती है। विशुद्ध छत्तीसगढ़िया भाषा में उद्बोधन करने वाले रवि भगत बहुत तेजी से युवाओं के बीच अपनी पैठ जमाते जा रहे हैं। भाजपा के धरना प्रदर्शन आंदोलनों में यह बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज करवाते हैं। जिसको देखकर जिले के अन्य कद्दावर भाजपा नेता बौने बनते जा रहे हैं। यदि रवि भगत इसी रफ्तार से आक्रामकता वाकपटुता का रूप बनाए रखेंगे तो आने वाले समय में रायगढ़ सांसद के लिए इनका एकमात्र इनका ही नाम दिल्ली से तय हो जाएगा।
रवि भगत की ताजपोशी से विचलित हो गए हैं मुख्यमंत्री का सपना देखने वाले…. लैलूंगा के आदिवासी युवा रवि भगत की प्रदेश स्तर पर हुई ताजपोशी को लेकर भविष्य में मुख्यमंत्री बनने का सपना लेकर राजनीति करने वाले गैर आदिवासी नेताओं के दिलों पर सांप लौट गया है. जिसका प्रमाण ओपी चौधरी के द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता है जो कि रवि भगत के रायगढ़ आगमन से 1 दिन पूर्व ही आयोजित कर डाली ताकि अगले दिन रवि भगत की पूछ – परख, स्वागत के आगे वे बौने ना बन जाए. युवा आदिवासी नेता रवि भगत के साथ पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय भी शामिल रहने की बातें सामने निकलकर आ रही है। रवि भगत को प्रदेश भाजयुमो अध्यक्ष बनाने से प्रदेश के युवा वर्ग में रवि भगत काफी लोकप्रिय होंगे जो आगे चलकर उनको सांसद एवं मुख्यमंत्री बनाने के लिए कारगर साबित होंगे. वे प्रदेश में जहां भी जाएंगे युवा वर्ग की भीड़ स्वतः उनके पास आ खड़ी होगी क्योंकि उनके द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में अध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे एवं प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी उनके द्वारा किया जाएगा.
नियुक्ति मिलते ही आक्रमक हो उठे हैं रवि भगत… रवि भगत को प्रदेश भाजयुमो का अध्यक्ष बनने के बाद यह अपनी आक्रमक शैली में आते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लैलूंगा आगमन पर काले झंडे दिखलाने का साहस जुटाया गया। आप जिले की खस्ताहाल सड़कों को लेकर वह लैलूंगा से पदयात्रा करते हुए रायगढ़ पहुंच रहे हैं। जिला भाजयुमो के वर्तमान पदाधिकारी एवं नए पदाधिकारी बनने की चाह लिए युवा वर्ग उनके आगमन पर पलक पावडे बिछाए हुए हैं। रवि भगत का नाम अप्रत्याशित रूप से जिले में धूमकेतु की तरह चमकने लगा है। जिसको देखकर जिले के भाजपा के आदिवासी नेताओं की रातों की नींद उड़ गई है। विश्लेषकों के द्वारा यह भी कयास लगाया जा रहा है की रवि भगत सबसे कम उम्र के सांसद बन सकते हैं एवं भविष्य में वे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े भीड़ जुटाऊ नेता के रूप में सामने आ कर मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. जिसको लेकर रायगढ़ ही नहीं अपितु प्रदेश के भाजपा के आदिवासी नेताओ की बेचैनियां बढ़ गई है।
आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग बहुत पुरानी है… छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासियों के राज्य के रूप में पूरे विश्व में जाना जाता है परंतु दुर्भाग्य यह है कि यहां से किसी भी आदिवासी नेता को प्राथमिकता नहीं दी जाती है. आदिवासी लोग इतने भोले भाले होते हैं कि वे अपने लाभ को त्याग कर तुरंत ही किसी के भी चिकनी चुपड़ी बातों में आ जाते हैं. शायद यही कारण है कि आदिवासी नेताओं की मजबूत पकड़ होने के बावजूद चुनाव के बाद उनको किनारे लगा दिया जाता है। अब प्रदेश में जब भी भाजपा की सरकार आएगी तो आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में रवि भगत के नाम पर केंद्र से मुहर लगा दी जाएगी। वैसे भी फिलहाल केंद्र में सरकार बदलने के अभी कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।





