🔭टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार के द्वारा राजधानी रायपुर के बड़े होटल “बेबी लॉन इन” मे प्रदेश स्तर पर महापौर सम्मान का आयोजन किया गया था ।जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में पधारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा प्रदेश की नगर निगमो के महापौरो सभापतियों को मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मान किया गया। नगर निगम के कार्यों मैं तेजी लाने के लिए भूपेश बघेल के द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित करवाया गया था। जिसमें स्वच्छता, साफ,सफाई, सड़क, बिजली,पानी,नाली,स्वास्थ, शिक्षा, पेंशन, राशन, कार्ड, आयुष्मान कार्ड, आदि जनहित में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर पुरस्कार प्रदान किए गए।

जब रायगढ़ नगर निगम को पुरस्कार देने का समय आया तो मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, भी सोच में पड़ गए कि आखिर रायगढ़ नगर निगम ने ऐसा कौन सा कार्य किया है जिसकी वजह से उसको पुरस्कार दिया जाना चाहिए। लेकिन आखिर नगर निगम पर काबिज शहरी कांग्रेस सरकार की इज्जत तो रखनी ही थी। अपने मूल कार्यों से भटक चुकी रायगढ़ नगर निगम को धनवंतरी पुरस्कार देखकर इज्जत बचाई गई। जबकि धनवंतरी दवाइयों की दुकानों को कंपटीशन मार्केट के बीच में नया आयाम और ऊंचाइयां प्रसिद्धि देने के लिए धनवंतरी मेडिकल स्टोर के संचालको को पूरा पूरा श्रेय जाता है। अगा अगर रायगढ़ नगर निगम की इज्जत बचाना ही था तो धनवंतरी मेडिकल स्टोर के संचालकों के अतिरिक्त निगम कमिश्नर संबित मिश्रा को पुरस्कृत किया जाना चाहिए था। चंद्र मेडिकल एजेंसी एवं जिंदल इंटरप्राइजेज के संचालक घनश्याम अग्रवाल एवं उनके पुत्रों अनुभव अग्रवाल एवं अनूप अग्रवाल को रायपुर बुलाकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। जिससे पूरे प्रदेश में धन्वंतरि मेडिकल स्टोर संचालकों में भी कुछ नया कर गुजर पुरस्कार पाने की लालसा जागृत हो सकती थी।

रायगढ़ नगर पालिका निगम अपने कार्यों में की फिसड्डी साबित हो रही है। चाहे वहां संजय कांपलेक्स सब्जी मंडी को इतवारी बाजार में शिफ्टिंग का मामला हो चाहे, नया बस स्टैंड ढिमरापुर के आगे बनाने का हो, चाहे शहर की तालाबों का सौंदर्यीकरण का कार्य हो, या फिर संबलपुरी गौठान का मामला हो, चाहे वह मरीन ड्राइव के घटिया निर्माण का मामला हो अभी सभी बड़े विकास कार्यों में नगर पालिका निगम सुपर डुपर फ्लॉप निगम में गिनी जाती है। सुपर डुपर फ्लॉप निगम मे रायगढ़ नगर पालिका निगम पूरे प्रदेश में अव्वल नंबर पर आ सकती है। नगर पालिका निगम के द्वारा धन की बंदरबांट कर लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए ऑक्सीजोन दम तोड़ चुके हैं। इसी तरह शहर के अंदर से हटाए गए बेजा कब्जा पुनः अपने पैर पसार लिए हैं। हर महीने, 15 दिन में निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं। जिसका कारण उनको समय पर वेतनमान नहीं दिया जाना होता है। शहर की सभी गलियों में कचरे का ढेर निगम की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी है। शहर की सभी दिशाओं में लगे विद्युत खंभों पर लगे बोर्ड फ्लेक्स आदि शहर की सुंदरता में काला धब्बा समान है।

सबसे अहम प्रश्न यह है कि धनवंतरी मेडिकल स्टोर में कम मूल्य पर जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध होती है क्या इसके लिए निगम के द्वारा प्रदेश की शासकीय योजना का प्रचार – प्रसार, नुक्कड़ – नाटक, वॉल पेंटिंग पोस्टर, पंपलेट, बैनर,फ्लेक्स आदि के माध्यम से एक बार भी किया गया है क्या. पुरस्कार पाने वाले जनप्रतिनिधियों के द्वारा धनवंतरी मेडिकल मेडिकल स्टोर जाकर कभी भी निरीक्षण किया या फिर उनको होने वाली तकलीफ हो को जानना चाहा। अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में धनवंतरी मेडिकल खुलने के कुछ समय बाद आसपास के दवा दुकानदारों के द्वारा धनवंतरी मेडिकल के संचालकों एवं स्टाफ को काफी ज्यादा धमकाया चमकाया एवं प्रताड़ित किया गया था। बताया जा रहा है कि बाहरी दवा दुकानदारों के द्वारा डॉक्टर के हाथ से प्रिसक्रिप्शन तक छीन कर ले जाया जाता है एवं मरीज के परिजनों का अपहरण के समान कृत्य कर अपनी दुकान ले जाया जाता है। इस अस्पताल के आसपास कभी भी दवा दुकानदारों का आपसी में सिर फुटौव्वल होने की संभावना बनी रहती है। निगम कमिश्नर महापौर एवं सभापति को चाहिए कि धनवंतरी मेडिकल वालों को सुरक्षा प्रदान की जाए एवं बाहरी दवा दुकानदारों का आतंक समाप्त किया जाए।

और मुख्यमंत्री ने दे दिए जुबानी जमा खर्च (150000000) पंद्रह करोड़ रुपए … रायपुर में प्रदेश के सभी निगम महापौर श्रम का सम्मान कार्यक्रम रखा गया था जहां पर भी रायगढ़ की महापौर आर्थिक सहायता मांगने से पीछे नहीं रही. उनके द्वारा आर्थिक सहायता मांगी गई तो मुख्यमंत्री ने भी बगैर स्टीमेट के तुरंत ₹15,00,000,00 की सहायता देने में अपनी जुबानी जमा खर्च रकम प्रदान कर दी। इससे पहले भी संजय कंपलेक्स सब्जी मंडी के निर्माण के लिए 14 करोड रुपए की राशि आ चुकी है परंतु उस पर अब तक कोई कार्य शुरू नहीं किया गया है जिस वजह से उक्त राशि वापस प्रदेश सरकार के खाते में जमा हो जाएगी और फिर से नए सिरे से प्राक्कलन तैयार कर राज्य शासन को भेजा जाएगा तब जाकर कुछ सालों के पश्चात राशि पुनः स्वीकृत होगी जिसके लिए काफी इंतजार करना पड़ेगा। अब तो लग रहा है कि उक्त कार्य नए महापौर के द्वारा ही करवाया जा सकेगा। पूर्व निगम कमिश्नर आशुतोष पांडे के कार्यकाल के समय में भी 990 लाख रुपए की राशि रायगढ़ के विकास के लिए स्वीकृत हो चुकी थी और जिन कार्यों के लिए उक्त राशि आबंटित की गई थी। वह कार्य शायद शुरू होने से पहले ही बंद हो गए।








