🎤 टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़. रायगढ़ में उद्योगों के बाढ़ आने की तर्ज पर जिस्मफरोशी के धंधे की भी बाढ़ सरीखे आई हुई है। रायगढ़ शहर के अनेक मोहल्ले गलियों के अतिरिक्त आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी देह व्यवसाय का धंधा अमरबेल की तरह फल फूल रहा है। उद्योगों के वजह से रायगढ़ में बाहरी लोगों की आमद बहुत ज्यादा बढ़ गई है। देश के लगभग सभी प्रांतों के लोग आकर यहां मेहनत मजदूरी का कार्य करने से लेकर एसी चेंबर में बैठकर कार्य करने वाले आते जाते रहते हैं। अपना घर परिवार अपने गांव में छोड़कर आने वाले लोगों की सबसे ज्यादा जरूरत की वस्तु तन की शांति बनकर रह गई है। दिन भर मेहनत मशक्कत करने के बाद आराम शांति मौज-मस्ती के लिए शराब सवाब और कबाब का सहारा ढूंढता है। यह तीनों चीजें रायगढ़ में सरलता से उपलब्ध हो जाया करती है। शहर की पाश कालोनियों के फ्लैटों से लेकर तंग गलियों की झोपड़पट्टीयो,अटल आवास, ईडब्ल्यूएस के घरों, शहर की कई लाजो में देह व्यवसाय का धंधा बगैर किसी डर खौफ के बात गति से निर्बाध गति से संचालित हो रहा है। लाजो के संचालकों के द्वारा ग्राहकों से मात्र 500 ₹ लेकर बगैर ठोस पहचान पत्र के युवक-युवती, महिला पुरुष को दो चार घंटे के लिए मनोरंजन करने की खातिर कमरे उपलब्ध करवा दिए जाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि पूरे शहर में उक्त होटलों के विषय में पूरी जानकारी होने के बावजूद पुलिस को जानकारी ना होना आश्चर्य किंतु सत्य है। किसी भी लाज में आकस्मिक छापेमारी कर जांच पड़ताल करना पुलिस जरूरी नहीं समझती है। बाहर से आने वाली कॉल गर्ल रात्रि 12:00 बजे से पहले बदनाम लाजो में आया करती है और कल सुबह चेक आउट कर जाती है। स्थानीय कॉल गर्ल सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक इन लाजो के कमरों में देह व्यवसाय संचालित करती है। जिसकी जानकारी लाजो के मालिकों को होने के बावजूद अर्थ लिप्सा की वजह से भोले ,भाले सीधे-साधे, सफेदपोश, समाजसेवी धार्मिक प्रवृत्ति के बने बैठे रहते हैं। संदिग्ध जोड़ों के ठहरने पर भी होटल के मालिको, मैनेजरो के द्वारा पुलिस को सूचित करना जरूरी नहीं समझते हैं। होटल वाले यह समझते हैं कि पुलिस की छापेमारी से उनकी लाज की बदनामी हो जाएगी। जबकि सच तो यह है कि बगैर पुलिस के छापेमारी के शहर की अधिकतर लाजे, होटले पहले से ही देह व्यवसाय करवाने के लिए बदनाम है।
रायगढ़ शहर से सटे जाम टिकरा में 24 घंटे दी जाती है सर्विस विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ओडिशा मार्ग पर के आई टी कॉलेज के कुछ दूर पर ही धर्म कांटा के सामने जाम टिकरा नाम की छोटी सी बस्ती है जिससे आगे केलो नदी जाने वाले सुनसान मार्ग पर एक दो तल्ला सर्व सुविधा युक्त आलीशान मकान है। इसमें गत कई वर्षों से पुलिस के संरक्षण में देह व्यवसाय संचालित हो रहा है। इस अड्डे पर शहर, ग्रामीण क्षेत्रों अन्य जिलों एवं कई प्रांतों की रंगीन मछलियों का आना जाना लगा रहता है। देह व्यवसाय का यह अड्डा शहर के रसूखदारो, बिगड़ैल नवाबजादो,शबाब के शौकीनो की पहली पसंद है। जहां पर शराब, शबाब, कबाब तीनों का आनंद उठाया जा सकता है। जिसके लिए चंद गांधी छाप कागज देने पड़ते हैं। इस अड्डे की जानकारी लाइन में चलने वाले लंबी दूरी के ट्रेलर, हाईवा,ट्रक ड्राइवरो,खलासीयों को है। इस मार्ग पर नो एंट्री की वजह से रुके हुए वाहनो के ड्राइवरो,खलासियों को समय व्यतीत करने के लिए उक्त स्थल किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता है। जाम टिकरा के रहवासियों को गंदा धंधा संचालित होने की जानकारी होने के बावजूद आज तक किसी ने कोई विरोध या शिकायत क्यों नहीं की है। यह भी कम आश्चर्य जनक बात नहीं है






