🌀 टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम ….. चुनावी सरगर्मियां बढ़ते ही भाजपाइयों के स्वर ओ पी चौधरी के विरुद्ध मुखर होने लगे हैं. एक वेब पोर्टल में दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट रूप से रायगढ़ विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी पर तंज कसते हुए कहा कि ओपी चौधरी प्रदेश स्तर के बड़े नेता हैं और वे भाजपा से प्रदेश के मुख्यमंत्री की दौड़ में है। इसके बावजूद उनके रायगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ने से महिलाओ के हितों की बात करने वाली पार्टी का चरित्र उजागर हो गया है. रायगढ़ विधानसभा में रायगढ़ शहर में क्या भाजपा नेताओं का अकाल पड़ गया. जो खरसिया विधानसभा से चुनाव हार चुके प्रत्याशी को रायगढ़ से प्रत्याशी बनाया गया है. उक्त कार्य भाजपा की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर उजागर कर देता है. गोपिका ने कहा कि उन्हें कुछ और एवं सरिया क्षेत्र से व्यापक जन समर्थन प्राप्त हो रहा है. रायगढ़ विधानसभा में महिला को टिकट न मिलने से महिलाओं में उत्साह नहीं देखा जा रहा है. वह पिछले 20 सालों से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई है एवं जमीनी कार्यकर्ता है. जिसे भाजपा के द्वारा नजर अंदाज कर दिया गया. वह पिछले साढ़े तीन वर्षो से चुनाव की तैयारी में जुट कर जनसंपर्क करने का कार्य कर रही है परंतु टिकट न मिलने की वजह से उन्हें अपमानित होना महसूस हो रहा है. उन्होंने कहा कि रायगढ़ शहर से किसी भाजपाई को टिकट न मिलना घोर आश्चर्य का विषय है. गोपिका ने आगे यह कहा कि भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी को त्याग करते हुए टिकट वापस कर देनी चाहिए जिससे उनके सम्मान में बढ़ोतरी हो सकेगी. त्याग करने वाले का नाम हमेशा ऊंचा होता है. ओपी चौधरी बड़े नेता है उनको पूरे प्रदेश की 90 विधानसभाओं को संभालना चाहिए था. गोपिका ने कहा कि उसको पूरे विधानसभा क्षेत्र से जन समर्थन प्राप्त हो रहा है. इसलिए. वे 27 तारीख को नामांकन पत्र दाखिल करने जा रही है. नामांकन पत्र दाखिल न करने के लिए किए जाने वाले सारे मैनेजमेंट को इनकार कर दिया जाएगा.
अब आने वाला समय ही तय करेगा की गोपिका गुप्ता भाजपा की बगावती प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेगी या फिर अपने चुनाव लड़ने के अरमानों को कुचल देगी. यदि वे चुनाव नहीं लड़की है तो उनके समर्थकों पर उनका प्रभाव कम होगा. जिस पर भविष्य में कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकेगा. आम चुनाव 5 वर्ष में होने वाला महापर्व होता है.इसे एक खेल के रूप में भी खेला जाता है जिसे खेलने का अधिकार हर किसी को होता है. 5 साल के बाद समय, काल परिस्थिति क्या होती है. इसे कोई नहीं जानता है. इसलिए “काल कर सो आज कर, आज करे सो अब, पल में पल में परलो होगी, बहुरि करेगा कब”






