🌀टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ . शहर के प्राइम लोकेशन पर उद्यान,पोर्च,रिक्त भूमि,सर्वेंट क्वाटर से परिपूर्ण एक आलीशान बंगला है. आज इस बंगले की वास्तविक कीमत कई करोड़ रुपए है किंतु जमीन का कारोबार करने वाले व्यावसाई एवं दलाल की निगाहें इस बंगले की ओर नहीं जाती है. तालाब के किनारे बहुत बड़े भूखंड पर बसे इस बंगले के बारे में कई किदवंतियां लोगों की जुबान से सुनने को को मिल जाती. किसी समय में यह बंगला रायगढ़ के अतिरिक्त हाई कोर्ट जबलपुर तक में प्रसिद्ध अधिवक्ता का हुआ करता था। जहां अधिवक्ता पत्नी,३ बेटों के साथ खुशहाल रूप मे रहा करते थे. जो शहर के बड़े-बड़े व्यवसाई राजनीतिक लोगों के लीगल एडवाइजर हुआ करते थे. पूरे जिले भर में अधिवक्ता का बहुत ज्यादा सम्मान हुआ करता था. उनके तीनो बेटे भी वकालत कर चुके थे.बड़ा बेटा जबलपुर हाईकोर्ट में प्रेक्टिस करने चला गया था. अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर वह जबलपुर हाईकोर्ट में महा अधिवक्ता भी बन गया. दूसरे एवं तीसरे नंबर के बेटों के विषय में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है परंतु वे भी बंगला छोड़कर बाहर चले गए थे. उसके बाद यह बंगला पूरा विराम हो गया. उस समय शहर में जमीनों के दाम न्यूनतम थे. इसलिए किसी ने भी इस बंगले को खरीदने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.
कुछ वर्ष बीत जाने के बाद मैरिज गार्डन का संचालन करने वाले सरदार जी ने उक्त बंगला खरीद कर उसे भी मैरिज गार्डन का रूप देकर अंधाधुंध पैसा कमाने का विचार किया था. मगर कुछ वर्षों के बाद ही सरदार जी को उक्त बंगला बेचना पड़ गया. बतलाया जा रहा है कि बंगले को खरीदने के बाद सरदार जी का पूर्व का मैरिज गार्डन भी बुकिंग होना बंद हो गया और उनको आर्थिक नुकसान होने लगा. यह भी बतलाया जा रहा है कि सरदार जी का पुत्र जमीन खरीदी बिक्री के मामले में बहुत बुरी तरह से फंस गया था। जिसमें उनको जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा था और इस वजह से सरदार जी का घमंड,अकड़,गुरुर, पहचान सारी जाती रही. साल भर में सरदार जी को शासकीय कार्यों से करोड़ों रुपए की कमाई हुआ करती थी जो की बंद हो गई. सरदार जी की पहचान केवल सिक्ख सामाज स्तर तक ही सिमट कर रह गई. आर्थिक कारणों की वजह से सरदार जी को मैरिज गार्डन रूपी उक्त बंगले को बहुत मुश्किल से तिकड़मबाजी,मिन्नते,चिकनी चुपड़ी बातो के जाल में फंसाकर, मारवाड़ी भाषा बोलकर खरसिया के धन कुबेर को बेचना पड़ गया.
खरसिया के धन कुबेर के द्वारा उक्त बंगला खरीद कर अपने हिसाब से बनवाया गया. जब बंगला बन कर तैयार हुआ तो सेठ की पत्नी का देहांत हो गया. जिसके बाद उक्त आलीशान को शराब दुकान के संचालन के लिए दिया गया और बंगला को शराब का अहाता बना कर उपयोग किया जाने लगा. एक-दो साल के बाद ही वहां से शराब दुकान भी हट गई और अहाता भी है हट गया. कुछ समय बाद सेठ के इकलौते पुत्र का निधन हो गया. कभी प्रदेश की राजनीति में दखल रखने वाले सेठ की राजनीति भी जाती रही. समय के चक्र के साथ सेठ जी का निधन हो गया और उक्त बंगला पुनः वीराने में बदल गया. उक्त बंगले की देखभाल का जिम्मा सेठ जी की पुत्री और दामाद पर आ गया.जो कभी विदेश में रहा करते थे. वे अब स्वदेश लौट आए है. किसी समय में कांग्रेस का कद्दावर नेता समझे जाने वाले, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के खासम खास समझे जाने वाले सेठ को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया था. कांग्रेस में पुनः वापसी के लिए सेठ जी ने साम, दाम, दंड, भेद की नीति भी अपनाई किंतु वह तनिक भी काम न आई. कोरोना काल के समय सेठ जी पर कानूनी कारवाई भी हुई थी. तब सेठ जी का पैसा, पावर, पहुंच कुछ काम ना आया. बाद में निधन हो गया.
वर्तमान में उक्त बंगला खरसिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके. भाजपा से रायगढ़ विधानसभा के प्रत्याशी ओ पी चौधरी ने चुनाव कार्यालय के लिए किराए पर लिया हुआ है.







