🌀टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ … पिछले कई दिनों से भाजपा एवं कांग्रेस के झंडा, बैनर,पोस्टर,हटाने,जलाने,फाड़ने की सरगर्म चर्चा से अटकलों का बाजार गर्म हो था. कांग्रेस के द्वारा भाजपा के समर्थको और भाजपा के द्वारा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर दोषारोपण करने का दौर चल रहा था. जिस वजह से दोनो ही पार्टियों के कार्यकर्ताओं में आरोप प्रत्यारोप किया जाने लगा था. मगर जब हकीकत सामने आई तो एक दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप झूठे साबित हुए.
कांग्रेस पार्टी से निष्कासित भजन कीर्तन मंडली को अपना वोट बैंक मानकर चल रहे. ऑटो रिक्शा चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी शंकर लाल अग्रवाल के खरीदे हुए समर्थकों की हरकत सामने आ गई. स्वयं को विधायक प्रकाश नायक की टिकट कटवाने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा झोंकने वाले और धनबल के सहारे विधायक बनने का दुश्वप्न देखने वाले शंकर लाल के समर्थकों के द्वारा भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश चौधरी के पोस्टरों पर शंकरलाल की फोटो चिपकाकर अपनी गिरी हुई मानसिकता की पहचान दे दी गई. शंकर लाल अग्रवाल के चुनाव प्रचार को देखकर ऐसा लगता है मानो वे तीस साल पहले होने वाले स्कूलों एवं कॉलेजो की तर्ज पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हो. या फिर सरायपाली, बसना, में सरपंच पद पर खड़े हुए है,जबकि शंकर लाल अग्रवाल के दसवीं तक पढ़े होने की जानकारी सामने आई है.
बिकी मीडिया शंकर लाल की बनी चुनाव प्रचारक.. रायगढ़ जिले में वेब पोर्टल के नाम पर पत्रकारिता की दुकानदारी पान ठेलो की तरह धड़कल्लो से फलने फूलने लगी है. जिस पर प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के जनसंपर्क विभाग की कोई पकड़ नही रह गई है. घर परिवार पर बोझ बने अनपढ़, निठल्ले,बेरोजगार,बेकार,अशिक्षित,फूहड़,युवकों के द्वारा ५–६हजार खर्च कर वेब पोर्टल के माध्यम से पत्रकार कहलाकर उगाही,धमकी,चमकी, ब्लैकमेलिंग,आदि में लिप्त हो जाते है। जिसे वास्तविक रूप में संगीन अपराध माना जाना चाहिए. ऐसे लोगो की वजह से पत्रकारिता गर्त में समा चुकी है. पत्रकारिता का स्तर बनाए रखने के लिए बड़े बैनर के अखबारों, चैनलों के द्वारा इस और ध्यान देकर गिरती हुई पत्रकारिता को बचाने के लिए केंद्र सरकार से इस विषय पर बिल लाने का निवेदन करना चाहिए. अन्यथा ऐसा समय आएगा जब हर घर में पत्रकार पैदा हुआ करेंगे. पत्रकारिता की कमजोरी भापते हुए व्यवसाई शंकर लाल अग्रवाल के द्वारा कुछ पोर्टल वालों को 1000–2000 देकर अपने पक्ष में धरमजयगढ़ से मिले बने बनाए समाचार देकर इस तरह से वायरल करवाया जाने लगा मानो पूरा समाचार वेब पोर्टल वालों ने लिखा हो.





