⭐ टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ ….वोट देने का अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है. वोट देने में किसी भी तरह का आरक्षण या सीमित तरीका नहीं बनाया गया है. राष्ट्रपति से लेकर दिहाड़ी मजदूर,अंधे, लंगड़े, लूले,बहरे,कमजोर,अक्षम,विकलांग, टाटा बिड़ला से लेकर भीख मांगने वाले, कलेक्टर से लेकर चपरासी तक,मर्द,नामर्द,किन्नर भारत में निवास कर रहे 18 वर्ष से ऊपर आयु वाले को वोट देने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है ताकि जनता जनार्दन बगैर किसी के दबाव में आए अपना वोट किसी को भी देने के लिए स्वतंत्र रहे. वोट देने से पूर्व इस बात पर गहन विचार मंथन किया जाना चाहिए कि उनके मतदान से चुने जाने वाला जनप्रतिनिधि जनता की सेवा कर सके. अपने क्षेत्र के विकास में सक्रिय होकर जन समस्याओं सड़क,बिजली,पानी, चिकित्सा,शिक्षा,रोजगार आदि को दूर करने में अपनी ऊर्जा लगा कर निराकरण करने वाला हो, अपने क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में शामिल होने वाला हो, बड़ों को आदर, छोटों को स्नेह देने वाला समदर्शी हो. कागज के चंद नोट,बकरा,भात, मुर्गा, शराब,साड़ी, कंबल,दरी,बर्तन आदि अन्य समान कर वोट बेच देने पर जनप्रतिनिधि की नजरों में आपकी कोई इज्जत नहीं रह पाती है. इन लालच के कारण वोट दे देने पर जनता को 5 साल तक जनप्रतिनिधियों के बुरे कर्म,रूखे व्यवहार को भुगतना पड़ता है. सामग्रियों के लालच में वोट बेच देने पर बाद में जनप्रतिनिधियों से आंख मिलाने में भी ग्लानि महसूस होने लगती है. जनता जनार्दन को चाहिए कि वे अपने मत का इस्तेमाल कर अन्य लोगो को भी मतदान करने के लिए प्रेरित कर शत प्रतिशत मतदान करने का संदेश देवे. भारत के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार परंतु बहुत बड़ी जिम्मेवारी दी गई है मतदान करने की इसलिए अपनी जिम्मेवारी पुरी कर जागरूक नागरिक बनें.





