🎤 टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ … “सब कुछ लूटाकर होश में आए तो क्या आए” रायगढ़ जिले की चार विधानसभा में से तीन विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाकर रायगढ़ जिले की नाक बचा ली. मगर जिला मुख्यालय की रायगढ़ विधानसभा सीट में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ स्तर पर सर्वाधिक वोटो से हार मिलने का इतिहास में नाम दर्ज करवा दिया है. इतनी बड़ी ऐतिहासिक हार के बाद जिला कांग्रेस कमेटी की कुंभकर्णी नींद खुल रही है. जिसे “अब का होत जब चिड़िया चुग गई खेत” माना जाना चाहिए. सत्ता,पद के नशे में चूर जिला कांग्रेस कमेटी का नशा पूरी तरह से काफुर हो चुका है. कांग्रेस के लोग प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी ओ पी चौधरी को कम आंक कर चल रहे थे. उन्हें यह गलतफहमी हो गई थी कि भाजपाइयों के द्वारा भीतरघात कर ओपी चौधरी के जीत के मार्ग को रोक दिया जाएगा परंतु उनकी गलतफहमी दूर हो गई और पूरा भाजपा संगठन एक होकर पूरी ताकत के साथ चुनाव में सक्रिय हो गया. इसके ठीक विपरीत कांग्रेसियों के द्वारा प्रत्याशी प्रकाश नायक के चुनाव प्रचार से दूरी बनाकर घर में घुसे रहना,कोई कार्य न करना भीतरघात करना, प्रत्येक वार्ड के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि को अपनी जेब के हवाले करना उचित समझा. शहर के किसी भी वार्ड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा ना तो चुनावी कार्यालय खोला गया, ना मतदाता पर्चियां बांटी गई, ना डोर टू डोर जनसंपर्क किया गया. कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश नायक को लगभग 65,000 वोट प्राप्त हुए जो की उनकी धर्मपत्नी “सुषमा नायक” द्वारा की गई मेहनत वजह से प्राप्त हुए. अगर सुषमा नायक ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क नहीं किया होता तो संभवत प्रकाश नायक की हार १ लाख वोटों से हो जाती. इतनी बड़ी हार केवल लोकसभा चुनाव में देखी जाती है. विधानसभा चुनाव में नहीं.
रायगढ़ शहर की नगर पालिका निगम में कांग्रेस सरकार स्पष्ट बहुमत वाली पार्षदों के साथ कार्यरत है. यही हाल जिला पंचायत का भी है. जिला पंचायत में भी कांग्रेस का बहुमत है. इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को शहर के किसी भी वार्ड के पोलिंग बूथ, ग्रामीण क्षेत्रों के किसी पोलिंग बूथ से कांग्रेस बढ़त हासिल नहीं कर पाई. इसका सीधा साधा अर्थ है यह है कि कांग्रेस के पदाधिकारीयों, कार्यकर्ताओं, सदस्यों, पार्षदों, जिला पंचायत के पदाधिकारीयों, कार्यकर्ताओं, सदस्यों,ने अपना एक बूंद पसीना भी कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार प्रसार में नहीं बहाया. केवल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चेहरे पर ही कांग्रेसी सरकार लौटने की आशा में रहे और खाने-पीने मटरगश्ती करने में ही लग रहे हैं. जिला कांग्रेस कमेटी केवल अपने 2–4 मीडिया वाले पिठ्ठूओ को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलाकर मैनेजमेंट करते रहे और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पीसीसी को दिग्भ्रमित करते रहे.
अब कांग्रेस को चाहिए कि हार की समीक्षा, मंथन ना करते हुए ऊर्जावान, उत्साही, लोकप्रिय, जनप्रिय, युवाओं को सुलझे हुए कांग्रेसियों को जिला कांग्रेस कमेटी में स्थान देवें क्योंकि आने वाले समय में लोकसभा,नगर निकाय एवं पंचायत के चुनाव होने वाले हैं. जिला कांग्रेस कमेटी में जोगी कांग्रेस के लोगों को पद दिया गया था. जो चुनाव के समय में कांग्रेस प्रत्याशी के लिए भारी पड़ गया. जोगी से जुड़े कांग्रेसी अंदर ही अंदर भाजपा प्रत्याशी ओ पी चौधरी का प्रचार प्रसार करते रहे. कांग्रेस की मीडिया सेल बुरी तरह से फिसड्डी साबित हुई.
अति विश्वसनीय सूत्रों ने बतलाया कि रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक को हराने के लिए खरसिया विधायक एवं ओ पी चौधरी की बैठकें हुई. जिसमें यह समझौता हुआ कि ओपी चौधरी रायगढ़ से चुनाव लड़े तो उन्हें पूरे के पूरे सामाजिक वोट दिलवाए जाएंगे, पूरी मदद की जाएगी, कार्यकर्ता उपलब्ध करवाए जाएंगे, क्योंकि खरसिया विधायक के मन में डर समाया था कि यदि इस बार ओ पी चौधरी खरसिया से चुनाव लड़ेंगे तो कांग्रेस का गढ़ ढह जाएगा. छत्तीसगढ़ में कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके ओपी चौधरी के द्वारा अचानक से रायगढ़ विधानसभा से अपनी दावेदारी पेश कर लाइन में लगे सभी लोगों को चुप कर दिया गया. जिस वजह से भाजपा के अंदर भीतरघात नहीं हो पाया. रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक को चुनाव हराने का एकमात्र कारण यह था कि प्रकाश नायक के द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान लगातार फ्लाई ऐश डंपिंग के मामले पर अपनी आवाज बुलंद की जाती रही. ज्ञात रहे की फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग केवल खरसिया विधानसभा क्षेत्र में ही की जाती रही है. खरसिया विधायक के मन में यह भय हो गया था कि यदि इस बार प्रकाश नायक चुनाव जीत जाते हैं और कांग्रेस सरकार सत्ता में आती है तो प्रकाश नायक को मंत्री पद दिया जाएगा. जिसके दम पर प्रकाश नायक अपनी आवाज और दमदारी से बुलंद करेंगे. इसलिए “सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे” की तर्ज पर खेल-खेल दिया गया.





