*सबसे बड़ा सवाल*
लॉक डाउन लगने के साथ ही लोगों का पलायन करना जारी है और कारण यह बताया जाता है कि जिला प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा रहा है। जो कि पूर्ण रूप से निराधार एवं झूठ का आरोप है। जिला प्रशासन के साथ ही निगम प्रशासन एवं पुलिस-प्रशासन, सरकार द्वारा समाजसेवियों के द्वारा दिया जा रहा भोजन बंटने के साथ ही बच जाने पर सड़ने पर फेंका भी जाता है। सरकार, जिला प्रशासन के द्वारा निगम प्रशासन के माध्यम से गरीब परिवारो को 7 किलो चावल 3 किलो आलू 1 किलो प्याज 1 किलो नमक 1 लीटर तेल एक साबुन को पैक कर लॉक डाउन लगने के बाद से अनवरत सभी मोहल्लों के गरीब परिवारों को चिन्हांकित कर वार्ड पार्षद के माध्यम से घर घर पहुंचाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त रेलवे क्षेत्र में रहने वाले मांग कर जीवन यापन करने वालो को सोनिया नगर के युवकों एवं रेलवे पुलिस फोर्स के द्वारा प्रतिदिन रात्रि 7:30 बजे पका पकाया भोजन परोसा जा रहा है जिस की गुणवत्ता बहुत ही उच्च स्तरीय होती है ।शहर के सभी दिशाओं में मांग कर जीवन यापन करने वालों को कई माध्यमों से कच्चा राशन ,पका पकाया भोजन, ब्रेड, बिस्किट, पानी,आदि निरंतर बांटे जा रहे हैं। जिसमें पुलिस प्रशासन का सहयोग प्रमुखता से लिया जा रहा है। इतना सब कुछ करने के बाद भी दिगर प्रांतों से आकर छत्तीसगढ़ में 20 वर्षों से अपना व्यवसाय कर पैसे कमा कर अपने घर भेजते रहे हैं । इसके साथ ही छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार की समस्त योजनाओं का लाभ भी उठाते रहे हैं अभी वर्तमान में संकट काल के दौरान भी सरकार, जिला प्रशासन, निगम प्रशासन, पुलिस प्रशासन, इन लोगों की ही यथासंभव मदद कर रहे है। तब भी यह लोग सभी की बुराई करने से बाज नहीं आ रहे हैं अब जब केंद्र सरकार ट्रेनों के माध्यम से सभी प्रांतों के श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की लिए ट्रेन चला रही है। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा बाहर जाने के लिए ई पास जारी किए जा रहे हैं तब भी अन्य प्रांतों के लोग जबरन का साईकिल पैदल पैदल रेल पथ के किनारे किनारे होकर पलायन कर रहे हैं । शायद इस सोच से की पुलिस उन्हें पकड़ कर आइसोलेशन में 28 दिनों तक डाल देगी तो उनका माह भर का खर्च निकल जाएगा एवं मेहमानों की तरह राजकुमारों की तरह आइसोलेशन शिविरों में रह कर अपनी शान ओ शौकत के किस्से बाद में अपने परिवार वालों अपने गांव वालों को सुनाएंगे।






