🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज 🌍 रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🏹… जब लालची आदमी के दिल में रुपए कमाने की हवस सवार हो जाती है और लोग उसे अपनी बेवकूफी की वजह से अपराधी कर्म करने के लिए आगे बढ़ा देते हैं तो अर्थ पिपासु अपना भूत वर्तमान भविष्य भूल जाता है और आंखों पर से शर्म की पट्टी हटाकर एक के बाद एक अपराध करने लगता है. उसे भविष्य की चिंता नहीं रहती है कि अपराध छोटा हो या बड़ा कभी छुप नहीं सकता. एक न एक दिन पाप का घड़ा फूट जाता है और अपराधी अपने कर्मों की सजा जेल में जाकर भुगतता है. अपराधी को बचाने की चाहे कितनी भी कोशिश कोई क्यों न कर ले मगर एक न एक दिन सच सामने आ ही जाता है. भुक्तभोगी को जब स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिलता है तो वह ऊपर तक की दौड़ लगा देता है और यदि वहां से भी उसकी समस्या का समाधान नहीं होता है तो न्यायपालिका के द्वार खुले रहते हैं. जब न्यायपालिका में अपराधियों के साथ देने वालों के नाम का खुलासा होता है तो लोग उनके नाम जानकर उनके काम जानकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं.
असीम कृपा फाऊंडेशन की आड़ में वृद्धा से ठगे गए 1,10,000 रुपए.. मामला टेंडा नवापारा घरघोड़ा का है. जहां से रणजीत चौहान और सुदीप मंडल ने “भगवती महापात्र” उम्र 74 वर्ष जो कि अपनी पुत्री और दामाद के साथ रहती थी. उसे अपने आश्रम में रखना एवं परवरिश करने का आश्वासन देते हुए “असीम छाया” आश्रम में ले आए. शुरू शुरू में उन्होंने वृद्धा की खूब सेवा सत्कार की क्योंकि उन्हें मालूम हो गया था कि वृद्धा के बैंक खाते में पेंशन के लाखों रुपए जमा है. वृद्धा ने बताया कि रणजीत,सुदीप उसे दान की रकम बोलकर घरघोड़ा बैंक ले गए और 50-50 हजार दो बार और एक बार 10000 ₹ कुल 1,10,000 रुपए आहरण कर लिए. वृद्धा के द्वारा अपनी रकम वापस मांगने पर “असीम छाया”के डायरेक्टर रणजीत चौहान के द्वारा अनेक बार बैंक के चेक दिए गए जो बाउंस हो गए. वृद्धा को अपने साथ हुई धोखा घड़ी का एहसास होने पर उसने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दिया था. कलेक्टर के आदेश पर रंजीत के द्वारा आधी रकम वापस की गई और आधी रकम देने में टालमटोल करने लगा. तब वृद्धा ने चक्रधर नगर थाने में लिखित आवेदन दिया था. जिस पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से वृद्धा ने मीडिया का सहारा लिया और अपने साथ हुई छल कपट के विषय में बताया. बरहाल रंजीत संदीप असीम कृपा से पीड़ित दर्जनों लोग एफ आई आर दर्ज करवाएंगे. रंजीत के द्वारा सरकारी दस्तावेजों,सील, मोहर, का इस्तेमाल किया गया है जो गंभीर मामला है. इसी तरह रंजीत एवं सुदीप ने असीम छाया के डायरेक्टर बनकर दोनों के हस्ताक्षर युक्त अनेक बैंकों के सैकड़ो फर्जी चेक कागजों के टुकड़ों की तरह बांट देना. उनके शातिर दिमाग की कहानी बयां कर देते हैं. क्रमशः