पिछले 3-4 दिन से लगातार ऐसी सूचनाये प्रसारित हो रही है कि सत्ताधारियों से, शासकों से,नेताओ से, भृष्ट अफशरशाही से, पत्रकारों को कंही 500 मिल रहे है तो कंही एक हजार ? कोई बतायेगा?कि एक न्यूज पोर्टलस की आय के स्रोत क्या है ? कोई बतायेगा?कि तदाकथित सम्मानित मीडिया/प्रेस में कितनी सैलरी मिलती है ?फिर भी शाही अंदाज में जीवनयापन कैसे करते है लोग? यदि इस 500-1000 कि बक्शीस ओर भीख से ही जीवनयापन करना है तो आप सिस्टम,सत्ता,भृष्ट अफशरशाही,व्यवस्था के खिलाफ आवाज कैसे उठायेंगे ? कुछ और व्यवसाय कर लीजिए ! बहुत ऑप्शन है ! लेकिन 500-1000 की बख्शीश,भीख लेकर अपने सम्मान,स्वाभिमान,जमीर को मत बेचिये ! हमारी न्यूज़ पोर्टलस से कोई आय नही है, हम व्यवस्था के खिलाफ, भृष्टाचारियो के खिलाफ खुलकर लिखते ओर प्रसारित करते है ! हम किसी भृष्टाचारी के पास कभी न तो फ्री में एक कप चाय भी पीना पसन्द करेगे, पैसे लेना तो दूर की बात, न जायेगे, हमे जनता जो बतायेगी, जो हम व्यवस्था में खामी देखेगे, सत्ता में,भृष्ट अफशरशाही में, क्रूरता, अत्याचार, जनाक्रोश,अन्नाय देखेगे वो लिखेगे ! चाहे कितना भी ताकतवर कोई क्यो न हो ? क्योकि हमारे पास खोने के लिए कुछ नही है, ओर कुछ भीख या बख्शीश के रूप में या भृष्ट तरीको से पाने,हासिल करने की तम्मना भी नही है ! हमारी अपेक्षा ओर जरूरतें भी सीमित है ! हम अपना सम्मान,स्वाभिमान इन भृष्टाचारियो के हाथों कभी नही बेचेंगे ! सब जगहो से, तमाम भृष्टाचारीयो से मिलाकर कुल कितना मिला होगा,आप लोगो को?कंही से 500, कंही से एक हजार?कुल 20-25हजार? लेकिन आप लोगो का ज़मीर,स्वाभिमान बिक गया?स्वम् को आपने उस भृष्टाचारी के सामने आत्म-समर्पण कर दिया ? भृष्ट सत्ताधारियों से,भृष्ट अफसरशाही से,भृष्ट लोगो से दीपावली की 500-1000 की बक्शीस/भीख लेकर, आप लोगो ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को,अपने स्वाभिमान,सम्मान को, इतने सस्ते में बेच दिया ! कुछ और कर लो भाई, बहुत व्यवसाय है ! स्थिति अत्यन्त चिंताजनक है ! यही वजह है कि किसी भी तदाकथित मीडिया/समाचार-पत्र,में जनता की आवाज कंही दिखती नही है, उससे अधिक नेताओं के दौरों की,चापलूसी की, सूचनाओ से तमाम मीडिया भरा पड़ा रहता है ! जबकि जनता को मात्र लोकतंत्र के दूसरे ओर चौथे स्तम्भ, यानि न्यायपालिका ओर मीडिया से बहुत उम्मीदें है ! क्योकि बाकि सभी तंत्र तो क्रूरता,अत्याचार,
शोषण,भृष्टाचार की पराकाष्ठा पार कर, चरम सीमा पर है ! इस लेख का उद्देश्य यह है कि जो लोग 500-1000 में भृष्ट सिस्टम के पास अपना स्वाभिमान,सम्मान,जमीर बेचकर भी स्वम् को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होने का झूठा दावा करते है ?वो कोई अन्य आजीविका के संसाधन अपना ले ! अन्यथा भृष्ट सिस्टम, अफशरशाही, नेताओं और राजनीति की तरह जनता को भविष्य में तदाकथित मीडिया से भी नफरत हो जायेगी ! बड़े पैमाने पर बिकाऊ मीडिया का तमगा तो पहले ही मिल चुका है !









