रायगढ़——— केबिनेट मंत्री उमेश पटेल और स्थानीय विधायक के बीच चेले चपाटी मतभेद के साथ मतभेद के बीज बोने में लगातार सफल हो रहे है। आने वाले विधानसभा चुनाव मे इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। एक गुट के चेले अपने विधानसभा क्षेत्र में काम न कर,अन्य विधानसभा क्षेत्र के अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते देखे जा सकेंगे । छोटे छोटे मुद्दों को बड़ा बनाकर दर्शाने में एक युवा नेता सिद्धस्त है। जो नाम के लिए कांग्रेस समर्पित है परन्तु असली खेल इसी के द्वारा खेला जाता है। तिल का ताड़ बनाने की कला इन्होंने अपने पूर्व राजनीतिक गुरु से सीखा है। जिसने मौका मिलते ही अपना गुरु भी बदल डाला,वैसे अभी तक जो पिक्चर सामने आई उसमें यही दिखा की अभी तक प्रदेश के तीनों मुख्यमंत्री का करीबी दर्शाने का हर संभव प्रयास इस युवा नेता द्वारा किया जाता है ताकि इसके कार्यो पर नजर डालने की हिमाकत कोई न कर सके। प्रशासन, पुलिस,पर अपना पौवा दिखलाने का यह नायाब तरीका है। जबकि अंदुरिनि कहानी कुछ और ही होती है। एस पी, कलेक्टरो से भी अपने पीढ़ियों के सम्बंध गूगल पर खोज लिया जाता है। फिलहाल बात यहां असल मुद्दे की है।
निगम,पंचायत,योजना समिति के चुनावों मे विधायक प्रकाश नायक ने आशातीत सफलता पाई। जो हजम करने लायक नही रही। प्रकाश की सटीक रणनीति से भाजपा पुनः शिकस्त खा गई। 22 के विरुद्ध 25 मत कांग्रेस को मिले जिससे गदगद विधायक लाबी धोखा खा गई। अध्यक्ष पद के लिए बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस को हार मिली। ऐसा माना जा रहा है कि सुनियोजित षडयंत्र के तहत कांग्रेसियों ने क्रॉस वोटिंग कर विधायक के समर्थक उम्मीदवार को हरा कर जीत भाजपा को परोस दी गई ताकि उक्त हार का ठीकरा स्थानीय विधायक के सर फोड़ा जा सके।
बात यदि क्रॉस वोटिंग की हो और घरघोड़ा की चर्चा न हो जो कि असंभव मामला है क्रॉस वोटिंग की शुरुआत घरघोड़ा नगर पंचायत से हुई। जहां स्पष्ट बहुमत के बावजूद तालमेल बिठा कर अध्यक्ष भाजपा का तो उपाध्यक्ष कांग्रेस का बना। जिस पर पूरे प्रदेश में तीखी प्रतिक्रिया हुई एवं कांग्रेस के भीतर घातियो पर अनुशासन हीनता की भी तलवार लटकी परन्तु केबिनेट मंत्री के वरदहस्त प्राप्त नेता को पार्टी से निष्कासन से बचा तो लिया गया परन्तु मौका मिलते ही उसने योजना समिति के चुनाव में पुनः अपना भाजपा प्रेम जाहिर कर डाला।
कांग्रेस के हर छोटे बड़े होने वाले कार्यक्रमो में विधायक एवं मंत्री के चपरगट्टूओ को जिले एवं शहर में लगे तमाम होर्डिंग्सो,बैनरो,पोस्टरो,निमन्त्रणपत्रो,अखबारो के विज्ञापनो आदि पर नजर जमाये रखने का मेहनताना दिया जाता है। जिनका काम ही यह होता है कि किसकी फोटो छपी,किसकी नही छपी,किसका नाम छपा, किसका नही छपा। जिसे बारिकी से खोजकर अपने आकाओं तक पहुंचाने का कार्य करना ही इनकी निष्ठा होती है ये सब छोटे छोटे घांव अब नासूर बनने लगे है। कांग्रेस के प्रत्येक कार्यक्रम अब दो अलग अलग गुटो द्वारा अलग अलग स्थानों पर अलग अलग नेतृत्व में किया जाने लगा है। जिसका परिणाम खरसिया एवं रायगढ़ विधानसभा चुनावों में देखने को निश्चित तौर पर देखने को मिलेगा।









