रायगढ़——फैलता शहर,बढ़ता यातायात का दबाव,सिकुड़ती सड़को के कारण शहर की प्रत्येक सड़को में सुबह से देर रात तक जाम की स्थिति निर्मित होती रहती है। जिसमे पुलिस वाहन,एम्बुलेंस,दमकल,अधिकारियों,नेताओ के वाहन फंसे आसानी से देखे जा सकते है। एम्बुलेंस के सायरन,पुलिस वाहनों के हूटर कोई मायने नही रखते क्योंकि पासिंग तो तभी दी जायेगी जब आगे लगा जाम समाप्त होगा।
20 फिट चौड़ी रविशंकर शुक्ल मार्केट की सड़कें दोनों ओर व्यवसाईयों के दुकानों के समान बाहर रखने एवं वाहन खड़ी कर देने के कारण बमुश्किल से 14 फिट रह जाती है। जिसके बीच मे सरकारी महकमे ने बेरिकेट लगाकर अपनी कार्य कौशलता का परिचय देने का एक्स्प्रीमेन्ट किया जा रहा है। जो कि परमानेंट तो है ही नही और इस कारण से वाहन चालकों के बीच होती तकरार,गाली,गुफ्तार देखी जा सकती है।
इससे उचित तो यह होता कि सड़क के बीचों बीच परमानेंट डिवाइडर ही बनवा दिया जाता ताकि पैदल चालक डिवाइडर पर चल पाते और हल भी कुछ हद तक निकल जाता।
कब नौ मन तेल होगा और कब राधा नाचेगी—इस बात को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है कि कब इस मार्ग की दुकाने पीछे सरकाई जाएगी और कब चौड़ी सड़क का निर्माण होगा। शहर के मास्टर प्लान का नक्शा भी न जाने किस संदूक में बंद हो गया। पूर्व कलेक्टर अमित कटारिया के जाने के बाद कई कलेक्टर आये और गये परन्तु उनके जैसी दृढ़ इच्छाशक्ति शहर के विकास सौन्द्रीयकरण का अभाव ही देखा गया।
बुरा हाल है एम जी रोड,हटरी चौक का—-सबसे ज्यादा तकलीफ हंडी चौक से सुभाष चौक,गांधी पुतला से रामनिवास टाकीज चौक तक के मार्गो में होती है। समझदार लोग इन मार्गो से आवागमन करना उचित नही समझते है। रांग साइड में खड़े वाहन,मौसमी फल फूल बेचने वालों,एकांगि मार्ग घोषित होने पर भी दोनों तरफ से वाहनों का बदस्तूर आवागमन यातायात विभाग,नगर पालिका निगम को कुछ नही समझते है। भारी वाहनों के प्रवेश निषेध होने पर भी भारी वाहनों से वसूली करते जवानों को देखा जा सकता है। दानीपारा तो पूरा अवैध पार्किंग स्थल बनकर रह गया है।बड़े बड़े रशुखदारो के वाहनो ने सड़को,गलियों को लील लिया है। बगैर पोर्च,गैरेज वालो के वाहनों को निगम,नटवर स्कूल,गाँधीगंज,रामलीला के मैदानों में पार्किंग करने की कड़े शब्दों में हिदायत दी जानी चाहिए।
नो गैरेज,नो फाइनेंस— सभी वाहन फाइनेंसरों को भी चाहिए कि अपने नियम कानून में एक पॉइंट और जोड़ दे कि जिसके पास गाड़ी खड़ी करने के लिए पोर्च,गैरेज नही होगा। उसे गाड़ी फाइनेंस नही की जाएगी।
फ्लाई ओवर ब्रिज तुड़वाओ,निजात पाओ—- शहर के लिए नासूर बन चुके फ्लाई ओवर ब्रिज ने पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को तहस नहस करके रख दिया है। यातायात दबाव से उबरने के लिए पुराना शनि मंदिर से लेकर तुलसी होटल तक के फ्लाई ओवर ब्रिज के हिस्से को तुड़वा दिया जाना ही श्रेयस्कर साबित होगा। बाकी के हिस्से को व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स, या सब्जी मार्केट का रूप भी दिया जा सकता है।









