रायगढ़—– जिला कलेक्टर भीम सिंह,नगर पालिका निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय अलसुबह उठकर अपने लाव लश्कर सहित प्रतिदिन शहर के वार्डो का भ्रमण कर शहर को स्वच्छता रैंकिग में स्थान दिलवाने के लिए पूरे मनोयोग से भले ही जुटे हो परन्तु अमृत मिशन,केबल वायर के लिए खोदे गए गढ्ढो की वजह से चांद में दाग की कहावत चरितार्थ हो रही है। सड़क खोदने का एक कार्य पूर्ण होता है तो सड़क खोदने का दूसरा कार्य शुरू कर दिया जाता है मानो की ये सड़क न होकर तवे पर बन रहे एग रोल है। जिसे मैदे की रोटी की परत चढ़ा कर परोसा जाता है।
सड़क खोदने पर लगता था भारी भरकम जुर्माना पूर्व में सड़क खोदने पर भारी भरकम जुर्माना वसूलने का नियम था। नल लगवाने की खातिर सड़क खोदने पर लगभग 8 हजार रुपये की राशि निगम वसूलता था। समाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सड़क खोदना पूर्णतया वर्जित था परन्तु समय बीतता गया और सारे नियम कानून निगम की फाइलों में दबते चले गए।
1 मार्ग 52 गलियों का शहर है रायगढ़ समय के साथ शहर की तमाम गालियां अवैध निर्माण के कारण सिकुड़ती चली गई एवं गलियों से हो रहे आवागमन का दबाब मुख्य सड़कों पर आ गया। यदि शहर की महज 10,15 गलियों को पुनः अस्तित्व में लाया जाए तो याततात की समस्या से निजात तो मिलेगा ही साथ ही शहर को विकास के लिए भविष्य में होने वाले व्यापक तोड़फोड़ से भी बचाया जा सकता है।
एक समान बनाना होगा सभी नए पुराने डिवाइडर— बाहर से एवं महानगरों से आये लोग शहर के मार्गो में बने अवयवस्थित डिवाइडरों की बनावट देखकर अपना माथा ठोक लेते है। कहीं ऊंचा,कहीं नीचा, कहीं टेढ़ा,कहीं मेढ़ा, कहीं दुबला,कहीं मोटा,कहीं 10 कदम पर तो कहीं 20 कदम पर निकलने का रास्ता छोड़ा गया है। जो किसी भी कारण से उचित नही माना जा सकता। कहीं चकाचक तो कहीं बदरंग,कहीं पौधे तो कहीं सपाट,कहीं लोहे की जाली तो कहीं दुकानों के बोर्ड,कहीं यातायात के स्टॉपर तो कहीं कुछ नही आदि से शहर की सुंदरता बदसूरती में दिखलाई पड़ती है ।
सड़क किनारे बेतरबी से खड़े वाहन,जगह जगह लगे ठेले,खोमचे की दुकानें, गलियों का मार्ग बंद होना शहर की यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बन गया है। दानीपारा,लालटँकी,पैलेश रोड़,कोष्टापारा,एम जी रोड़, हंडी चौक,गांधी गंज,इतवारी बाजार,ओवरब्रिज के नीचे,कोतरा रोड़ आदि प्रमुख स्थानों पर धनकुबेरों ने अपनी बपौती समझकर वाहनों की स्थाई पार्किंग बना लिये है। अधिकांश चार पहिया वाहन के मालिकों के पास वाहन खड़ी करने के लिए स्वंय का गैरेज तक नही है । जो सरकारी सड़क को अपनी निजी सम्पति समझकर अन्य लोगो की वाहन को कुछ समय के लिए भी खड़ी भी नही होने देते।
अगर जिला प्रशासन, निगम प्रशासन शहर को साफ सुंदर रखना,देखना चाहते है तो उनको अपने देखे जाने वाले सपनो को पंख लगाने पड़ेंगे तभी सारे सपने साकार हो सकते है।





