विशेष लेख टूटी कलम — कोरोना के पहले हमले से महफूज होकर लोग बेपरवाह,लापरवाह हो गए। 2 गज की दूरी,मास्क है जरूरी,सेनेटाइजर आदि को भूलकर लोग पुनः 5 राज्यो की चुनावी रैलियो,क्रिकेट मैच के दौरान लोग खचाखच जूट गए। जिसका कोरोना वायरस ने बुरा मान लिया और अपना आक्रमण दुगुनी गति से तेज कर देश के राज्यो में पुनः लाकडाउन के लिए सरकारों को विवश कर दिया। जबकि लाकडाउन करना इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने वाला उपाय नही है।
टीके लगाने की धीमी रफ्तार,टीके का निर्यात करना भविष्य के लिए चिंतनीय है —— फिलहाल जिस रफ्तार से देश मे टीकाकरण चल रहा है। वह सफल नही हो सकता। जिसका कारण लोगो के मन मे टीका लगवाने का उत्साह न होकर डर समाया हुआ है और स्वास्थ विभाग भी बेफिक्री से टीका अभियान चला चला रहा है। व्यक्ति टीका लगवाये तो ठीक न लगवाये तब भी ठीक और टीकाकरण से बचे यही लोग कोरोना संक्रमण फैलाने का कार्य करेंगे।
सघन प्लस पोलियो अभियान की तरह सघन कोरोना टीकाकरण अभियान चलाना ही पड़ेगा। तब जाकर कहीं सुरक्षा चक्र बन पायेगा। स्वास्थ्य कर्मियों को घर घर जाकर राशन कार्ड के आधार पर पूरे परिवारों को टीकाकरण करना ही पड़ेगा। 165 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत मे यदि 1 करोड़ लोगों को रोजाना टीका लगाया जाएगा तो 165 दिन यानि लगभग 3 माह लग सकते है। जबकि यह संभव नही हो सकता। पूरे देश वासियों को टीका लगाने में 5 साल लग सकते है। लोगो को चिन्ह चिन्ह कर टीका लगाना पड़ेगा। सरकारी एवं निजी कार्यो में नौकरीयो में टीकाकरण हो जाने की रसीद की अनिवार्यता करनी पड़ेगी। पार्षदों,पंचों, सरपंचों,जनप्रतिनिधियों के द्वारा वेरीफेशन किये जाने पर,शपथपत्र देना होगा। तमाम तरह के नियम कानून बना देने होंगे ताकि लोग टीका लगवाने में रुचि रखने लग जाये। शादी,विवाह,पार्टी,मतदान आदि में सहभागिता के लिए कोरोना टीकाकरण हो चुके व्यक्ति को ही प्राथमिकता,जरूरी कर देने से टीकाकरण शत प्रतिशत सफल हो सकता है और कोरोना वायरस का समूल नाश किया जा सकता है। बच्चों के स्कूल एडमिशन पर,मतदान करने,प्रॉपर्टी की खरीदी बिक्री,होटलो में ठहरने वालो,किरायेदारों को घर देने,रेलवे,बस,हवाई यात्रा की टिकट के समय टीकाकरण कार्ड दिखलाने पर ही दिया जाना चाहिए।ओवर आल सभी व्यक्ति को आधार कार्ड की तरह कोरोना टीकाकरण का कार्ड बनवाना जरूरी कर देना चाहिए। कोरोना कार्ड पर ही सरकारी सुविधाएं दी जानी चाहिए।






