नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, लोगों की पहली पसंद टूटी कलम समाचार बन चुका है, सरकार एवं जिला प्रशासन का व्यवस्थाओं समस्याओं पर ध्यान आकर्षण करवाना हमारा पहला कर्तव्य है
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🌍…. तमनार कांड को बीते एक माह लगभग होने जा रहा है और इस कांड के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू होचुका है। शांतिपूर्ण चल रहा आंदोलन न जाने किसकी शह पर हिंसक रूप ले लिया और आगजनी, मार पिटाई,गाली गुफ्तार की घटना घट गई. हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रायगढ़ पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल को मोर्चा संभालना पड़ा था.
राधेश्याम शर्मा ने लिखाई अपहरण की रिपोर्ट… जिंदल एवं जिला प्रशासन ने जबरदस्त तुकबंदी करते हुए अनवरत चलने वाले आंदोलन को खत्म करवा दिया . सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आंदोलन की वजह से जिंदल पावर प्लांट में कोयले की कमी हो रही थी. कोयले की नियमित आपूर्ति करवाने के लिए आंदोलन को कुचल कर रख दिया गया। आंदोलन कर रहे हजारों लोग अपने-अपने घर लौट गए क्योंकि अब दोबारा उतनी भीड़ इकट्ठी करनी संभव नहीं हो पायेगी. आंदोलन समाप्त होने पर आंदोलनकारी राधेश्याम शर्मा ने पुलिस के द्वारा अपने पुत्र अमित शर्मा के अपहरण की रिपोर्ट लिखवाते हुए आईजी बिलासपुर संभाग, डीजीपी रायपुर, गृह मंत्री से पत्र व्यवहार कर दोषी व्यक्तियों पर अपराध दर्ज करने का निवेदन किया है।
चित्रसेन का निकला जुलूस बेटी पहुंची बचाव में.. तमनार हिंसा कांड में एक घृणानात्मक पहलू सामने आया था। एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें पुरुषों के एक समूह ने एक महिला आरक्षक को सड़क से अंदर खेत में ले जाकर पटक दिया था और उसके अधोवस्त्र, वर्दी, तार तार करने का प्रयास किया जा रहा था। उक्त कृत्य आंदोलन का भाग न होकर बदनियति की मंशा हो सकती थी। जब महिला आरक्षक के कपड़े फाड़े जा रहे थे तब एक मैकेनिकल इंजीनियर बचाव करने की अपेक्षा वीडियो बनाने में मशगूल था। उक्त इंजीनियर भी सजा का पात्र है। पुलिस को चाहिए कि उक्त इंजीनियर पर भी बराबर की कार्रवाई करें। पुलिस ने वायरल वीडियो से चिन्नाहाकित कर आरोपियों की धर पकड़ शुरू कर दी और साथ आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस ने मुख्य आरोपीय चित्रसेन को हेमू कालानी चौक से जिला जेल तक पैदल लगाया गया। पैदल मार्च के दौरान चित्रसेन के कपड़े निकाल दिए गए थे और फटी बनियान में, चेहरे पर लिपस्टिक पोतकर, हाथों में हथकड़ी लगाकर अपराधी तत्वों को यह जताने का प्रयास किया गया कि यदि पुलिस के साथ दुर्व्यवहार होता है तो उसकी सजा इसी तरह होगी।
चित्रसेन के जुलूस ने तूल पकड़ा. चित्रसेन के जुलूस के बाद कुछ लोगों पर भड़कावे पर उसकी पुत्री कलेक्टर के पास पहुंचकर मानव अधिकार के नाम से जुलूस को गलत ठहराते हुए जुलूस में शामिल पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। यदि पुलिस कर्मियों को दंडित कर दिया जाता है तो आम महिलाओं के साथ अमानवीय हरकत अत्याचार के मामले बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। जब महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो अन्य महिलाएं कैसे सुरक्षित रह पाएगी।




