🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🌍….. 27 दिसंबर को तमनार में हुए घटना कांड के बाद जिंदल प्रबंधन के द्वारा ग्रामीणों को लॉलीपॉप देते हुए बताया कि कंपनी प्रबंधन के द्वारा सफल हो चुकी जनसुनवाई को ग्रामीणों की भावनाओं को मद्दे नजर रखते हुए निरस्त करने हेतु पत्र व्यवहार किया गया है। जिससे खुश होकर ग्रामीणों ने अपना धरना आंदोलन समाप्त कर दिया था। इसके बाद जिंदल को कोयला आपूर्ति करने वाली वाहनों की एक बार फिर से रेलमपेलशुरू हो गई और जिंदल प्रबंधन ,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन अपने मकसद में कामयाब हो गए. इसके बाद पुलिस के द्वारा आंदोलनकारियों को पकड़ पकड़ कर जेल में डालना शुरू किया और दहशत का माहौल बना दिया। इस घटनाक्रम पर हमने पहले ही संकेत दे दिए थे की जिंदल प्रबंधन के द्वारा जनसुनवाई निरस्त करने के लिए किया गया पत्र व्यवहार पूरी तरह से मति भ्रमित करने वाला है जिसका मकसद मात्र यह था कि किसी भी तरह से आंदोलनकारियो को धरना स्थल से हटाया जाए ताकि जिंदल कंपनी को कोयले की आपूर्ति बनी रहे। पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह है कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिंदल कंपनी प्रबंधन ने धरना स्थल पर अपने गुंडे घुसवाकर कर माहौल खराब किया गया एवं वाहनों को आग के हवाले कर इस वारदात को आंदोलनकारियो के मत्थे मड़ दिया गया। हिंसक वारदात का सबसे शर्मनाक पहलू महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ना, गंदी-गंदी गालियां बकना, अश्लील वीडियो वायरल करना रहा। बताया जा रहा है कि उक्त घटना को भी जिंदल कर्मियों के द्वारा अंजाम दिया गया एवं अश्लील वीडियो वायरल भी जिंदल के मैकेनिकल इंजीनियर के द्वारा किया गया था।
एक कोयला खदान की जनसुनवाई करने की जिद ने पूरे जिले की आबोहवा में आक्रोश घोल दिया है। शांतिपूर्ण जिला अब हर दिन कहीं न कहीं विरोध की आवाजों से दहल रहा है। 27 दिसंबर को हुई घटना के बाद जैसे-तैसे आंदोलन खत्म हुआ था। इसके बाद हो रही गिरफ्तारियों और एक आरोपी के जुलूस ने जनाक्रोश को कई गुना बढ़ा दिया है। सोमवार को 14 गांवों के ग्रामीण बिना किसी नारेबाजी के तमनार थाने पहुंचे और अफसरों-जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए। तमनार में अब हालात सामान्य नहीं रहे।
बीते 27 दिसंबर को जिंदल पावर लिमिटेड तमनार की प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे 14 गांवों के ग्रामीणों और पुलिस में हिंसक झड़प हुई। कई पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को चोटें आईं। आधा दर्जन गाडिय़ां फूंक दी गईं। एक महिला पुलिसकर्मी के साथ भी कुछ लोगों ने बर्बरता की जिसमें अपराध दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कलेक्टर और जिंदल पावर प्रबंधन को लिखकर आश्वासन देना पड़ा। इसके बाद दो दिन तक बातचीत के बाद आंदोलनकारी उठने पर सहमत हुए। तब तक पुलिस ने नौ एफआईआर दर्ज की थी। महिला पुलिसकर्मी से अभद्रता करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इस बीच एक आरोपी के जुलूस निकाले जाने की घटना ने ग्रामीणों को झकझोर दिया है। पुलिस भी उस दिन के वीडियो देखकर लोगों को गिरफ्तार कर रही है। इस वजह से ग्रामीणों का आक्रोश फिर से सडक़ पर आ गया है। 14 गांवों के लोगों ने पुलिसिया मनमानी के विरुद्ध फिर से सडक़ की राह चुनी है।
सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण तमनार थाने पहुंचे लेकिन रास्ते में ही पुलिस ने उनको रोक दिया। लगातार हो रही गिरफ्तारियों के विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन छेड़ दिया है। ग्रामीणों ने थाना प्रभारी तमनार, अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा, जिंदल पावर लिमिटेड प्रबंधन, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं 27 दिसंबर को सीएचपी चौक लिबरा में पदस्थ पुलिसकर्मियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की है। टांगरघाट, आमगांव, तिलाईपारा, बिजना, खुरुसलेंगा, समकेरा, रायपारा, धौराभांठा, झरना, लिबरा, झिंकाबहाल, बागबाड़ी, बुडिय़ा एवं महलोई किसान एकजुट होकर थाने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है और यहां पेसा अधिनियम लागू है। ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का प्रवेश, आधिपत्य या परियोजना स्वीकृत करना कानूनन अपराध है।
टीआई ने निकाली गाडिय़ां
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण 8 दिसंबर से सीएचपी चौक लिबरा में धरना दे रहे थे। इसी दौरान 27 दिसंबर को पुलिस संरक्षण में 30-35 कोयला लदे वाहनों को टीआई तमनार ने जबरन निकालने का प्रयास किया। विरोध करने पर टीआई के निर्देश पर पुलिस बल ने धरने पर बैठे 35-40 महिला-पुरुषों के साथ मारपीट की। उनको धक्का देकर हटाया गया। इसी दौरान कोयला लदे वाहन ने खुरुसलेंगा में एक बुजुर्ग ग्रामीण को कुचल दिया। उसकी मृत्यु 4 जनवरी को हो गई। यह वाहन पुलिस के निर्देश पर जबरन निकाला गया था।
घटना के आरोपियों से कोई संबंध नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि जिंदल पावर लिमिटेड द्वारा अपने ही नियोजित लोगों से तोडफ़ोड़ व आगजनी कराई गई ताकि आंदोलन को बदनाम किया जा सके। महिला आरक्षक के साथ हुई शर्मनाक घटना की भी ग्रामीणों ने निंदा की और कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों का इससे कोई संबंध नहीं है। पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग, पीएमओ कार्यालय, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को भी प्रेषित की गई है।
मुख्य आरोपी की जमानत रद्द
इधर महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई बर्बरता के मुख्य आरोपी चित्रसेन साव की जमानत याचिका खारिज हो गई है। उसकी ओर से अधिवक्ता राजीव कालिया ने बताया कि जिला न्यायालय ने जमानत नहीं मिली। अदालत में चित्रसेन ने एक कान से सुनाई नहीं देने की बात कही है। पुलिस की पिटाई से कान को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है। यह भी कहा है कि जबड़ा भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इस पर न्यायाधीश ने चिकित्सक से रिपोर्ट लेकर दाखिल करने का आदेश दिया है।
रायगढ़ किसी की जागीर नहीं है- राधेश्याम
ग्रामीणों का साथ देने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने हिंसक घटना का दोषी पुलिस और प्रशासन को माना है। उनका कहना है कि ग्रामीण किसी एक के खिलाफ एफआईआर कराने नहीं आए हैं। जिसने अपने पद का दुरुपयोग किया, उसके विरुद्ध अपराध दर्ज कराने आए हैं। कलेक्टर और एसपी के संरक्षण में अपराध हो रहा है लेकिन न्यायपालिका को दिखाई नहीं दे रहा है। रायगढ़ किसी की जागीर नहीं है। आगजनी जिंदल पावर के लोगों ने की है। लोगों पर एसडीएम के आदेश पर लाठियां चलाई गईं। सभी शांतिपूर्वक बैठे थे। जो व्यक्ति मर गया, वह डंपर थानेदार ने घुसवाया था। जब तक रोजनामचे में मामला दर्ज नहीं होगा, तब तक बैठेंगे। राधेश्याम शर्मा ने कहा कि रायगढ़ एसपी की रियासत नहीं है।



